वाण्डरवाल्स अवस्था समीकरण, क्रांतिक नियतांक क्या है | Vander Waal’s equation of state in Hindi

वाण्डर वाल्स समीकरण क्या है

वाण्डर वाल्स का अवस्था समीकरण निम्न है।
(P + \frac{a}{V^2} )(V – b) = RT ….(1)

गैस के क्रांतिक नियतांक

गैसों के तीन क्रांतिक नियतांक होते हैं। (1). क्रान्तिक ताप ‘Tc‘, (2). क्रान्तिक दाब ‘Pc‘ तथा (3). क्रान्तिक आयतन ‘Vc‘ ।

1.क्रान्तिक ताप (critical temperature in Hindi) – किसी गैस का “क्रान्तिक ताप (Tc)” वह उच्चतम ताप है, जिसके नीचे के तापों पर गैस केवल दाब द्वारा द्रवित की जा सकती है। परंतु इसके ऊपर के किसी भी ताप पर दाब द्वारा गैस को द्रवित नहीं किया जा सकता है।

2.क्रान्तिक दाब (critical pressure in Hindi) – गैसों को उसके क्रान्तिक ताप पर द्रवित करने के लिए आवश्यक दाब “क्रान्तिक दाब (Pc)” कहलाता है।

3.क्रान्तिक आयतन (critical volume in Hindi) – क्रान्तिक ताप तथा क्रान्तिक दाब पर 1 मोल गैस का जितना आयतन होता है, वह “क्रान्तिक आयतन (Vc)” कहलाता है।

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क्रान्तिक नियतांकों का ‘a’ व ‘b’ के पदों में मान

यदि किसी भिन्न भिन्न गैसों के लिए क्रांतिक नियतांकों के मान भिन्न-भिन्न होते हैं। तो वाण्डर वाल्स की अवस्था समीकरण है। अतः समीकरण (1) से,
(P + \frac{a}{V^2} )(V – b) = RT

या P = \frac{RT}{V - b} \frac{a}{V^2} …..(2)

यदि इस समीकरण के अनुसार भिन्न-भिन्न स्थिर तापों पर P व V के मध्य ग्राफ खींचा जाए, तो चित्र के अनुसार “समतापी वक्र” प्राप्त होता है। जैसा की चित्र में दिखाया गया है।

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वाण्डर वाल्स समीकरण

क्रांतिक बिंदु X से नीचे वाले समतापी वक्रों में उच्चिष्ठ तथा निम्निष्ठ (maxima and minimum) प्राप्त होते हैं। जबकि इस बिंदु से ऊपर वक्रों में ऐसा नहीं होता है। तथा बिंदु X पर उच्चिष्ठ तथा निम्निष्ठ विलुप्त हो जाते हैं, अतः इनकी स्थितियां ज्ञात करने के लिए समीकरण (2) को ‘V’ के सापेक्ष अवकलित करके ‘शून्य’ के बराबर रखने पर, अर्थात्
( \frac{dP}{dV} )T = 0

\frac{RT}{(V - b)^2} + \frac{2a}{V^3} = 0
या \frac{RT}{V - b} = \frac{2a(V - b)}{V^3} …..(3)

अतः इस समीकरण से एक निश्चित ताप T पर उच्चिष्ठ तथा निम्निष्ठ की स्थितियां प्राप्त होती हैं। अतः सभी वक्रों के उच्चिष्ठ व निम्निष्ठ के बिंदु पथ प्राप्त करने के लिए समीकरण (2) व (3) में से T को विलुप्त करना होगा । और हमें निम्न समीकरण प्राप्त होती है। जो कि चित्र में ‘बिंदुदार वक्र’ का समीकरण है।
P = \frac{2a(V - b)}{V^3} \frac{a}{V^2} ….(4)

यह बिंदुदार बक्र सभी वक्रों के उच्चिष्ठ व निम्निष्ठ से गुजरता है। चूंकि क्रांतिक बिंदु ‘X’ से ऊपर ये उच्चिष्ठ तथा निम्निष्ठ विलुप्त हो जाते हैं। अतः इस वक्र का उच्चिष्ठ या शिखर क्रांतिक बिंदु से संपाती होगा। अतः बिंदु ‘X’ के निर्देशांकों (P, V) का मान प्राप्त करने के लिए समीकरण (4) का ‘V’ के सापेक्ष अवकलन करके शून्य के बराबर रखने पर, अर्थात्
( \frac{dP}{dV} )T = \frac{2a}{V^3} \frac{6a(V - b)}{V^4} + \frac{2a}{V^3} = 0
या \frac{4a}{V^3} = \frac{6a}{V^4} (V – b)
या 2V = 3(V – b)
या V = 3b = Vc {चूंकि Vc = क्रान्तिक बिन्दु पर आयतन} अतः

\footnotesize \boxed{ V_c = 3b } …..(5)

अब समीकरण (3) में V = Vc = 3b तथा T = Tc (क्रांतिक ताप) रखने पर, अर्थात्
\frac{RT_c}{3b - b} = \frac{2a(3b - b)}{(3b)^3}
या \frac{RT_c}{2b} = \frac{2a × 2b}{27b^3}
या RTc = \frac{8ab^2}{27b^3}

अतः \footnotesize \boxed{ T_c = \frac{8a}{27b.R}} …..(6)

अब समीकरण (2) में V = Vc = 3b, T = Tc = \frac{8a}{27bR} तथा P = Pc (क्रांतिक दाब) रखने पर,
Pc = \frac{R}{(3b - b)} × \frac{8a}{27bR} \frac{a}{(3b)^2}
या Pc = \frac{R}{2b} × \frac{8a}{27bR} \frac{a}{9b^2}
या Pc = \frac{4a}{27b^2} \frac{a}{9b^2}
या Pc = \frac{4a - 3a}{27b^2}

अतः \footnotesize \boxed{ P_c = \frac{a}{27b^2}} …..(7)

इस प्रकार क्रमशः Vc = 3b, Tc = \frac{8a}{27bR} तथा Pc = \frac{a}{27b^2} क्रांतिक आयतन, क्रांतिक ताप व क्रांतिक दाब के लिए व्यंजक है। इन मानों से “क्रांतिक गुणांक (Critical Coefficient in Hindi)” का मान निम्न प्रकार ज्ञात कर सकते हैं।
\frac{R.T_c}{P_c.V_c} = R( \frac{8a}{27b.R} )( \frac{27b^2}{a} )( \frac{1}{3b} ) = \frac{8a}{3} = 2.67

या \footnotesize \boxed{ \frac{R.T_c}{P_c.V_c} = \frac{8a}{3}} ….(8)

अर्थात् “ \frac{RT_c}{P_cV_c} को ‘क्रांतिक गुणांक’ कहते हैं, तथा इसका मान सब गैसों के लिए \frac{8}{3} (नियतांक) होता है।”

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‘a’ व ‘b’ के मान ज्ञात करना (Determination of ‘a’ and ‘b’ in Hindi)

अब समीकरण (6) व (7) से,
\frac{T^2_c}{P_c} = ( \frac{8a}{27bR} )2( \frac{27b^2}{a} ) = \frac{64a}{27R^2}

या \footnotesize \boxed{ a = \frac{27R^2}{64} ( \frac{T^2_c}{P_c} )} ….(9)

पुनः समीकरण (6) व (7) से,
\frac{T_c}{P_c} = ( \frac{8a}{27b.R} )( \frac{27b^2}{a} ) = \frac{8b}{R}

या \footnotesize \boxed{ b = \frac{R}{8} \frac{T_c}{P_c}} …..(10)

अतः समीकरण (9) व (10) से स्पष्ट है कि यदि Tc व Pc के मान ज्ञात हो, तो ‘a’ व ‘b’ की गणना की जा सकती है। अतः Tc व Pc के मान प्रयोग द्वारा प्राप्त करने के लिए प्रायोगिक द्रव तथा उसकी वाष्प को एक कठोर कांच की नली में थर्मोस्टेट में रखते हुए एक नैनोमीटर से जोड़ देते हैं। अब थर्मोस्टेट को धीरे-धीरे गर्म किया जाता है तथा फिर ठंडा किया जाता है। उन तारों को, जिन पर गर्म होते समय द्रव का meniscus विलुप्त हो जाता है तथा ठंडा करते समय पुनः दिखाई देता है, तथा इसे नोट कर लेते हैं। अतः प्रेक्षित तापों का माध्य ही ‘क्रान्तिक ताप (Tc)’ है। अर्थात् ताप Tc पर दाब का मापन मैनोमीटर द्वारा कर लेते हैं, जो कि ‘क्रान्तिक दाब (Pc)’ होता है।

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 वाण्डर वाल्स अवस्था समीकरण लिखिए। किसी गैस के क्रांतिक नियतांकों को परिभाषित कीजिए तथा इन्हें वाण्डर वाल्स समीकरण के ‘a’ व ‘b’ के पदों में व्यक्त कीजिए। ‘a’ व ‘b’ का मान कैसे ज्ञात किया जाता है ? सिद्ध कीजिए कि- \frac{R.T_c}{P_c.V_c} = \frac{8}{3}
Q. 2 किसी गैस के क्रांतिक नियतांकों को वाण्डर वाल्स समीकरण के नियतांकों ‘a’ तथा ‘b’ के पदों में व्यक्त कीजिए ? तथा क्रांतिक गुणांक की गणना कीजिए ?

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