क्रांतिक नियतांक क्या है, परिभाषा सूत्र तथा प्रयोग द्वारा निर्धारण | Critical Constants in Hindi

क्रांतिक नियतांक क्या है

गैसों के निम्न तीन क्रांतिक नियतांक होते हैं।

1. क्रांतिक ताप

किसी गैस का क्रांतिक ताप वह अधिकतम ताप होता है, जिस ताप पर गैसों को केवल दाब लगाकर ही द्रवित किया जा सकता है। स्पष्ट है कि किसी गैस को द्रवित करने के लिए यह आवश्यक होता है कि उसका ताप क्रांतिक ताप से कम हो। यदि किसी गैस का ताप उसके क्रांतिक ताप से अधिक होता है। तो गैस को पहले क्रांतिक ताप से कम ताप तक ठंडा करके फिर दाव लगाकर द्रवित किया जा सकता है। यदि इन गैसों को इनके क्रांतिक ताप से कम ताप तक ठंडा कर लिया जाए तो इन्हें केवल दाब लगाकर ही द्रवित किया जा सकता है। तो इस ताप को “क्रांतिक ताप (critical temperature in Hindi)” कहते हैं।

2. क्रांतिक दाब

यदि क्रांतिक ताप पर किसी गैस को द्रवित करने के लिए जितने दाब की आवश्यकता होती है, तो उसे उस गैस का “क्रांतिक दाब (critical pressure in Hindi)” कहते हैं जैसे- CO2, O2, N2 व He के लिए क्रांतिक दाब का मान क्रमशः 72.8, 49.7, 33.5 तथा 12.8 वायुमंडल दाब है।

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3. क्रांतिक आयतन

क्रांतिक ताप व क्रांतिक दाब पर गैस के एकांक द्रव्यमान के आयतन को “क्रांतिक आयतन (critical volume in Hindi)” कहते हैं।

क्रांतिक नियतांकों का निर्धारण

इस प्रयोग में प्रयुक्त उपकरण से किसी गैस के क्रांतिक ताप व क्रांतिक दाब का मान ज्ञात होता है जैसा कि चित्र-1 में दिखाया गया है।

क्रांतिक नियतांक
क्रांतिक नियतांक

इसमें एक कठोर कांच की मुड़ी हुई नली होती है। जिसके दोनों सिरे बंद होते हैं तथा इसमें R से S तक पारा भरा होता है। तथा इस नली को दाब मापी से जोड़ दिया जाता है तथा कांच की नली में S के ऊपरी भाग में वायु तथा R के ऊपर रिक्त स्थान में प्रायोगिक द्रव व उसकी वाष्प भर दी जाती है। तथा इस नली को एक ताप स्थायी या ताप स्थिरांक में रख दिया जाता है, अतः इसे साधारण ताप पर R के स्थान पर द्रव का ‘मेनिस्कस’ स्पष्ट दिखाई देता है। जब नली का ताप धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है तो मेनिस्कस सपाट होने लगता है। तथा तापस्थायी से वह ताप जिस पर द्रवित गैस, वाष्प में बदल जाती है। तो इसे नोट कर लेते हैं। अब ताप को थोड़ा-सा घटाकर देखते हैं। कि वाष्प, द्रव में बदल जाती है। तथा इस ताप को भी नोट कर लेते हैं। इन दोनों तोपों का मध्यमान ही ‘क्रांतिक ताप Tc‘ होता है। तथा ताप के संगत दाब का मान दाबमापी की सहायता से इसे भी नोट कर लेते हैं। अतः दाब का यह मान ही ‘क्रांतिक दाब Pc‘ होता है।

अब गैस के क्रांतिक आयतन का मान ज्ञात करना कठिन होता है। क्योंकि क्रांतिक अवस्था में ताप व दाब के थोड़े से परिवर्तन से ही गैस का आयतन बहुत तेजी से बदल जाता है। तथा क्रांतिक आयतन का मान सरल रेखीय व्यास विधि अथवा माध्य घनत्व के नियम द्वारा ज्ञात किया जा सकता है। हम जानते हैं, कि क्रांतिक ताप पर संतृप्त वाष्प का घनत्व, द्रव के घनत्व के बराबर होता है।

क्रांतिक नियतांक
चत्र-2 क्रांतिक नियतांक

तथा क्रांतिक ताप से नीचे संतप्त वाष्प का घनत्व ताप के बढ़ने के साथ-साथ बढ़ता जाता है। जबकि द्रव का घनत्व ताप के बढ़ने के साथ-साथ घटता रहता है। जैसा की चित्र-2 में दिखाया गया है। तथा क्रांतिक ताप से कम तापों पर द्रव के घनत्व ρ1 एवं संतृप्त वाष्प के घनत्व ρ2 तथा ताप के बीच एक ग्राफ को प्रदर्शित किया गया है। यह ग्राफ एक परवलयाकार होता है। तथा ग्राफ से स्पष्ट होता है, कि क्रांतिक ताप Tc पर ρ2 तथा ρ1 के मान बराबर होते हैं। अतः प्रत्येक ताप पर वाष्प-घनत्व ρ2 तथा द्रव-घनत्व ρ1 का माध्यमान \frac{1}{2} 21) ज्ञात करते हैं। इस माध्यमानों से होकर एक सरल रेखा MN खींचते हैं। जो कि परवलय को बिंदु N पर काटती है। तथा क्रांतिक बिंदु N के संगत Y-अक्ष पर क्रांतिक घनत्व ρc होता है। तो इस प्रकार, क्रांतिक घनत्व ज्ञात होने पर मोलर “क्रांतिक आयतन” VC (= \frac{1}{ρ_c} ) ज्ञात कर लेते हैं। अतः इस प्रकार गैसों के क्रांतिक नियतांकों के मानों को स्पष्ट रूप से ज्ञात कर लिया जाता है। अर्थात स्पष्ट होता है कि गैसों के तीनों क्रांतिक नियतांकों, क्रांतिक ताप, क्रांतिक दाब तथा क्रांतिक आयतन की पुष्टि कर ली जाती है।

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 क्रांतिक नियतांक क्या है ? इन्हें प्रयोग द्वारा कैसे ज्ञात करते हैं?
Q. 2 गैसों के क्रांतिक नियतांकों को को चित्र की सहायता से समझाइए ? तथा क्रांतिक नियतांकों की परिभाषा दीजिए?
Q. 3 क्रांतिक नियतांक किसे कहते हैं। गैसों की क्रांतिक घटनाओं का वर्णन कीजिए?

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