ट्रांजिस्टर के धारा प्रवर्धन गुणांक क्या है, संबंध ज्ञात करों | Current Amplification Factors of Transistors in Hindi

ट्रांजिस्टर के धारा प्रवर्धन गुणांक

ट्रांजिस्टर के अभिलाक्षणिक वक्रों की सहायता से ट्रांजिस्टर के धारा प्रवर्धन गुणांक α तथा β का मान ज्ञात कर सकते हैं।
ट्रांजिस्टर के धारा प्रवर्धन गुणांक दो प्रकार के होते हैं –
(1). एल्फा (α) धारा प्रवर्धन गुणांक या उभयनिष्ठ आधार विन्यास में धारा लाभ।
(2). बीटा (β) धारा प्रवर्धन गुणांक या उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में धारा लाभ।

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1. उभयनिष्ठ आधार विन्यास में धारा लाभ

ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ आधार विन्यास में यदि संग्राहक-आधार विभव को नियत (स्थिर) रखा जाए, तो संग्राहक धारा IC में परिवर्तन तथा उत्सर्जक धारा IE में परिवर्तन की निष्पत्ति को ‘उभयनिष्ठ-आधार विन्यास में धारा लाभ’ अथवा ‘एल्फा धारा प्रवर्धन गुणांक’ कहते हैं। इसे α से प्रदर्शित करते हैं, इस प्रकार

α = ( \frac{संग्राहक धारा I_C में परिवर्तन}{उत्सर्जक धारा I_E में परिवर्तन} )(नियत संग्राहक-आधार वोल्टता के लिए)
अर्थात्
α = ( \frac{∂I_C}{∂I_E} )VCB …(1)
अतः α का मान 1 से कम (लगभग 0.95 तथा 0.98 के मध्य) होता है।

2. उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में धारा लाभ

ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में संग्राहक-उत्सर्जक विभव को नियत (स्थिर) रखा जाए, तो संग्राहक धारा IC में परिवर्तन तथा आधार धारा IB में परिवर्तन की निष्पत्ति को ‘उभयनिष्ठ-उत्सर्जक विन्यास में धारा लाभ’ अथवा ‘बीटा धारा प्रवर्धन गुणांक’ कहते हैं। इसे β से प्रदर्शित करते हैं, इस प्रकार

β = ( \frac{संग्राहक धारा I_C में परिवर्तन}{आधार धारा I_B में परिवर्तन} )(नियत संग्राहक-उत्सर्जक वोल्टता के लिए)
अर्थात्
β = ( \frac{∂I_C}{∂I_B} )VCE …(2)
अतः β का मान 1 से बड़ा होता है और लगभग 20 से 60 के बीज होता है।

α तथा β धारा प्रवर्धन गुणांकों में संबंध

हम जानते हैं कि उत्सर्जक धारा IE का मान संग्राहक धारा IC तथा आधार धारा IB के योग के बराबर होता है। अर्थात्
IE = IC + IB
या ∂IE = ∂IC + ∂IB …(3)
अब समीकरण (1) से,
∂IC = α ∂IE
उपर्युक्त मान को समीकरण (3) में रखने पर,
∂IE = α ∂IE + ∂IB
या ∂IB = ∂IE (1 – α) …(4)
या ( \frac{∂I_B}{∂I_C} ) = ( \frac{∂I_E}{∂I_C} )(1 – α)

अथवा \frac{1}{β} = \frac{1}{α} (1 – α) …(5)

या \footnotesize \boxed{ β = \frac{α}{1 - α} } …(6)

या \footnotesize \boxed{ α = \frac{β}{1 + β} } …(7)

अथवा 1 – α = 1 – \frac{β}{1 + β} = \frac{1}{1 + β}
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ (1 - α)(1 + β) = 1 } …(8)

अतः समीकरण (6), (7) व (8) धारा प्रवर्धन गुणांक α व β के बीच अभीष्ट संबंध है। चूंकि α का मान 1 के बहुत समीप होता है, इससे (1 – α) का मान बहुत कम होता है। अतः β काफी बड़ा होता है।
यही कारण है कि उभयनिष्ठ-आधार प्रवर्धक की तुलना में, उभयनिष्ठ-उत्सर्जक प्रवर्धक में काफी अधिक धारा प्रवर्धन होता है।

Note – सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 किसी ट्रांजिस्टर में उभयनिष्ठ-आधार और उभयनिष्ठ-उत्सर्जक विन्यास के लिए ट्रांजिस्टर के धारा प्रवर्धन गुणांक अथवा धारा लाभ की परिभाषा दीजिए। तथा उनके बीच संबंध स्थापित कीजिए।
Q.2 ट्रांजिस्टर के प्रवर्धन गुणांक की परिभाषा देते हुए, उनमें संबंध ज्ञात कीजिए।

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