P N प्रकार के अर्द्ध-चालकों में धारा प्रवाह की प्रक्रिया को समझाइए | Current flow in P N type Semi-conductors in Hindi

P N प्रकार के अर्द्ध-चालकों में धारा प्रवाह

बाह्य विद्युत् क्षेत्र की अनुपस्थिति में P-प्रकार अर्द्धचालक में आवेश वाहक होल तथा N-प्रकार अर्द्ध-चालक में आवेश वाहक इलेक्ट्रॉन अपनी ऊष्मीय ऊर्जा के कारण निरन्तर अनियमित गति करते रहते हैं। ये आवेश वाहक लेटिस परमाणुओं के कम्पनों के फलस्वरूप प्रकीर्णन तथा अपद्रव्य आयनों के द्वारा लगने वाले ‘कूलाॅम का नियम‘ बल के कारण लगातार अपनी दिशा बदलते रहते हैं।

बाह्य विद्युत् क्षेत्र लगाने पर आवेश वाहक एक निश्चित दिशा में अनुगमन वेग से चलते हैं। स्थायी अवस्था में विद्युत् क्षेत्र द्वारा संवेग प्राप्ति की दर प्रकीर्णन के कारण संवेग हानि की दर के बराबर होती है, जिसके फलस्वरूप आवेश वाहक स्थायी अनुगमन वेग प्राप्त कर लेते हैं जिससे अनुगमन धारा बहने लगती है।

(1). N-प्रकार के अर्द्ध-चालक में धारा प्रवाह

हम जानते हैं कि N-प्रकार के अर्द्ध-चालक में बहुसंख्यक आवेश वाहक इलेक्ट्रॉन समान संख्या में निश्चल धनात्मक आयन तथा अल्पसंख्यक आवेश वाहक होल होते हैं। अल्पसंख्यक आवेश वाहक होलों का धारा प्रवाह में योगदान लगभग नगण्य माना जा सकता है।

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N-प्रकार के अर्द्ध-चालक में धारा प्रवाह
N-प्रकार के अर्द्ध-चालक में धारा प्रवाह

जैसा कि चित्र-1 में N-प्रकार का अर्द्ध-चालक दो इलेक्ट्रॉडों के बीच रखा है तथा इलेक्ट्रॉडों का संबंध एक बैटरी से किया गया है जिससे इनके मध्य विद्युत् क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। विद्युत् क्षेत्र के प्रभाव में मुफ्त इलेक्ट्रॉनों का धनात्मक इलेक्ट्राॅडों की और अनुगमन होने लगता है। तथा धनात्मक इलेक्ट्राॅडों पर पहुंचने वाले ये इलेक्ट्रॉन इलेक्ट्राॅड की धातु पर गायब हो जाते हैं जबकि धनात्मक इलेक्ट्राॅड के समीप निश्चल धनात्मक आयन इन मुक्त इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन के कारण उदासीन नहीं हो पाते हैं, जिसके फलस्वरूप ये आयन ऋणात्मक इलेक्ट्राॅड से इलेक्ट्रॉन आकर्षित करते हैं ।

इस प्रकार, विभव स्त्रोत के एक सिरे से दूसरे सिरे तक अर्द्ध-चालक में होकर इलेक्ट्रॉन का अनुगमन होने लगता है। अर्द्ध-चालक के अन्दर इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह ऋण इलेक्ट्राॅड से धन इलेक्ट्राॅड की ओर होता है। इलेक्ट्राॅड प्रवाह की दर इलेक्ट्रॉडों के मध्य आरोपित विभवान्तर तथा अर्द्ध-चालक की चालकता पर निर्भर करता है।

(2). P-प्रकार के अर्द्ध-चालक में धारा प्रवाह

चूॅंकि हम जानते हैं कि P-प्रकार के अर्द्ध-चालक में बहुसंख्यक आवेश वाहक होल समान संख्या में निश्चल ऋणात्मक आयन तथा अल्पसंख्यक आवेश वाहक इलेक्ट्रॉन होते हैं। अल्पसंख्यक आवेश वाहक इलेक्ट्रॉनों का धारा प्रवाह में योगदान लगभग नगण्य माना जा सकता है।

P-प्रकार के अर्द्ध-चालक में धारा प्रवाह
P-प्रकार के अर्द्ध-चालक में धारा प्रवाह

जैसा कि चित्र-2 में P-प्रकार का अर्द्ध-चालक दो इलेक्ट्रॉडों के बीच रखा है तथा इलेक्ट्रॉडों का संबंध एक बैटरी से है जिससे इनके मध्य एक विद्युत् क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। विद्युत् क्षेत्र के प्रभाव में होलों का ऋणात्मक इलेक्ट्राॅड की ओर अनुगमन होने लगता है तथा ऋणात्मक इलेक्ट्राॅड पर पहुंचकर ये होल इलेक्ट्राॅड के इलेक्ट्रॉनों से संयोग करके गायब हो जाते हैं। साथ-ही-साथ धनात्मक इलेक्ट्राॅड के समीप समान संख्या में होल उत्पन्न हो जाते हैं। ये ऋणात्मक आयन तथा धनात्मक इलेक्ट्राॅड एक विद्युत् क्षेत्र उत्पन्न करते हैं जिसके फलस्वरूप ग्राही परमाणुओं में अनियमित इलेक्ट्रॉन अलग होकर धनात्मक इलेक्ट्राॅड पर आ जाते हैं और गायब हो जाते हैं।

इस प्रकार, ग्राही परमाणु समीपस्थ सह-संयोजक बन्ध से इलेक्ट्रॉन लेने का प्रयास करता हैं तथा वहां होल उत्पन्न हो जाता है। होलों के उत्पन्न होने की दर ऋणात्मक इलेक्ट्राॅड पर गायब होने की दर के बराबर होती है। स्पष्टतः यह दर इलेक्ट्राॅड के मध्य आरोपित विभवान्तर और अर्द्ध-चालक की चालकता पर निर्भर करती है। अतः स्पष्ट है कि P-प्रकार के अर्द्ध-चालक के अन्दर तो धारा होलों की गति के कारण है, जबकि बाह्य परिपथ में धारा इलेक्ट्रॉनों की गति के कारण ही प्रवाहित होती है।

Note – P N प्रकार के अर्द्ध-चालकों में धारा प्रवाह से संबंधित प्रशन –
Q.1 P तथा N-प्रकार के अर्द्ध-चालकों में धारा प्रवाह की प्रक्रिया को समझाइए?
Q.2 P-प्रकार के अर्द्ध-चालक में बहुसंख्यक तथा अल्पसंख्यक आवेश वाहक कौन-कौन से होते हैं?
Q.3 N-प्रकार के अर्द्ध-चालक में बहुसंख्यक व अल्पसंख्यक आवेश वाहक कौन-कौन से होते हैं?

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