बेलन क्या है, एक खोखली शाफ्ट, ठोस शाफ्ट से अधिक मजबूत क्यों होती हैं | Cylinder in Hindi

बेलन की परिभाषा

बेलन एक ऐसा तीन ठोस आयाम वाली आकृति होती है। जिसके दो वृताकार घेरे तथा एक वक्र आयत सतह मिलकर बना होता है। जिसके दो समान त्रिज्या वाले सिरे व्रत होते हैं। तथा एक वक्र पृष्ठ भी होता है। तो उस ठोस आकृति को ही “बेलन (Cylinder in Hindi)” कहते हैं।

बेलन का ऐंठन (Cylinder spasm in Hindi)

माना कि एक बेलनाकार छड़ की लंबाई l व त्रिज्या r है। तथा छड़ के ऊपरी व निचले सिरे के केन्द्र O व O’ हैं। जैसा की चित्र-1 में दिखाया गया है। इसका ऊपरी सिरा स्थिर है। तथा नीचे के स्वतंत्र सिर पर एक ऐंठन बल युग्म इसकी लंबाई के लम्बवत् तल में लगाया गया है। इसलिए नीचे का सिरा θ कोण से घूम जाता है। निचले सिरे के घूमने से, प्रत्यास्थता के कारण इसमें एक प्रत्यानयन बलयुग्म कार्य करने लगता है। संतुलन की अवस्था में प्रत्यानयन बलयुग्म लगाए गए ऐंठन बलयुग्म के बराबर तथा विपरीत होता है।

बेलन का ऐंठन
बेलन का ऐंठन

अब बेलनाकार छड़ को बहुत से समअक्षीय बेलनाकार खोलों में बांटा जाता है। इसमें से लंबाई l तथा त्रिज्या x का एक बेलनाकार खोल लिया। माना इसकी मोटाई dx है। जब छड़ को ऐंठा जाता है तो अक्ष के समांतर एक रेखा OP जो कि एक बेलन की सतह पर है घूमकर O’P स्थिति में आ जाती है। यहां ∠OPO’ = φ अपरूपण कोण है। यदि ऐंठन से पहले बेलनाकार खोल को OP से काटकर फैला दें, तो यह MNOP आयत का रूप धारण कर लेता है, तथा ऐंठ देने पर यह PO’MN’ आकृति का हो जाएगा। जैसे के चित्र-1 (c) में दिखाया गया है।

यदि छड़ के नीचे के सिरे पर ऐंठन कोण θ हो, तो
OO’ = OPφ = O’Q’θ या lφ = xθ

या \footnotesize \boxed{φ = \frac{xθ}{l}} ….(1)

“यही ऐंठन कोण तथा अपरूपण कोण के बीच सम्बन्ध है”

और पढ़ें… ठोस तथा खोखले बेलन का जड़त्व आघूर्ण

बेलन की मरोड़ी दृढ़ता का व्यांजक

माना कि बेलनाकार खोल के आधार पर F स्पर्शीबल विकृति पैदा करता है। तो ,

स्पर्शी बल = \frac{F}{खोल के आधार का क्षेत्रफल} = \frac{F}{2πx.dx}

यदि छड़ के पदार्थ के लिए दृढ़ता गुणांक η हो, तो

η = \frac{स्पर्शी प्रतिबल}{अपरूपण विकृति} = \frac{F}{2πx.dxφ}

अतः समीकरण 1 से φ का मान,

η = \frac{F}{2πx.dx}.\frac{l}{xθ}

तथा F = \frac{2πηθ}{l} x2dx

अतः छड़ की अक्ष OO’ के परित F का आघूर्ण (dι) = Fx हो, तो
या dι = \frac{2πηθ}{l} x3dx …..(2)

यह बल युग्म त्रिज्या x, लंबाई l तथा मोटाई dx के बेलनाकार खोल को θ कोण से कोड ऐंठ देता है। अतः r त्रिज्या की पूरी बेलनाकार छड़ को θ कोण से ऐंठन के लिए आवश्यक परिणामी बलयुग्म,

ι = \int^r_0 \frac{2πηθ}{l} x3dx

ι = \frac{2πηθ}{l} [ \frac{x^4}{4} ]rθ
ι = \frac{2πηθ}{l} \frac{r^4}{4}
ι = \frac{πηθr^4}{2l} ….(3)
\footnotesize \boxed{ ι = Cθ }
चूंकि यदि θ = 1 तो एकांक ऐंठन के लिए बलयुग्म, समीकरण (3) से,
ι = \frac{πηr^4}{2l} = C

तब एकांक रेडियन ऐंठन के लिए आवश्यक ऐंठन बलयुग्म

\footnotesize \boxed{ C = \frac{πηr^4}{2l} } …..(4)

“यही बेलनाकार छड़ के लिए मरोड़ी दृढ़ता का सूत्र कहलाता है।” तथा यहां C को तार के पदार्थ का ऐंठन दृढ़ता गुणांक कहते हैं या इसे एकांक ऐंठन के लिए प्रत्यानयन बलयुग्म कहते हैं। अतः किसी पदार्थ की ऐंठन या मरोड़ी दृढ़ता, एकांक ऐंठन के लिए ऐंठन बलयुग्म के बराबर होती है।

पढ़ें… ठोस गोले का जड़त्व आघूर्ण

खोखले बेलन की मरोड़ी दृढ़ता का व्यंजक

यदि कोई बेलनाकार छड़ या खोखला तार है तथा जिसकी आन्तरिक एवं बाह्य त्रिज्याएं r1 व r2 हो, तो बेलन को θ कोण से ऐंठने के लिए बलयुग्म का आघूर्ण
ι’ = \int^{r_2}_{r_1} \frac{2πηθ}{l} x3dx
ι’ = \frac{πηθ}{2l} (r42 – r41)
\footnotesize \boxed{ ι' = C'θ } …(5)
अतः खोखले बेलन की मरोड़ी दृढ़ता गुणांक
\footnotesize \boxed{ C' = \frac{πη(r^4_2 - r^4_1)}{2l} } …(4)

“यही खोखले बेलन के लिए मरोड़ी दृढ़ता का व्यंजक कहलाता है।”

खोखली शाफ्ट का ठोस शाफ्ट से मजबूत होना

माना त्रिज्या r तथा लंबाई l की एक ठोस बेलनाकार शाफ्ट है। इस ठोस शाफ्ट को पिघलाकर समान लंबाई l तथा समान द्रव्यमान m की एक खोखले बेलनाकार शाफ्ट बनाई जाती है।
माना खोखली शाफ्ट की आंतरिक त्रिज्या r1 तथा बाह्य त्रिज्या r2 है। तब ठोस शाफ्ट के लिए मरोड़ी दृढ़ता

C = \frac{πηr^4}{2l} ….(1)

तथा खोखली शाफ्ट के लिए मरोड़ी दृढ़ता

C’ = \frac{πη(r^4_2 - r^4_1)}{2l} ….(2)

समीकरण (1) व (2) से,

\frac{C'}{C} = \frac{(r^4_2 - r^4_1)}{r^4}

या \frac{C'}{C} = \frac{(r^2_2 - r^2_1)(r^2_2 + r^2_1)}{(r^2. r^2)} ….(3)

चूंकि दोनों शाफ्टों के पदार्थ लंबाई तथा द्रव्यमान सभी समान हैं। अतः दोनों शाफ्टों का आयतन भी सम्मान होना चाहिए, अर्थात्

खोखली शाफ़्ट का आयतन = (ठोस शाफ्ट का आयतन)

π(r22 – r21)l = πr2l

या r22 – r21 = r2 ….(4)

या r22 = r2 + r21 …..(5)

अतः समीकरण (3) से r22 का रखने पर,

\frac{C'}{C} = \frac{r^2 + r^2_1 + r^2_1}{r2}

या \frac{C'}{C} = \frac{(r^2 + 2r^2_1)}{r^2} ….(6)

अतः समीकरण (6) से स्पष्ट है। कि

\frac{C'}{C} > 1
या \footnotesize \boxed{ C' > C }

अतः समीकरण से स्पष्ट है कि समान लंबाई, समान द्रव्यमान तथा एक ही पदार्थ की दो बेलनाकार छड़ों को एक ही ऐंठन कोण θ से ऐंठने के लिए खोखले बेलन के लिए आवश्यक बलयुग्म ठोस बेलन के लिए आवश्यक बलयुग्म से अधिक होगा। अर्थात् “खोखली शाफ्ट, समान वस्तु की लंबाई तथा द्रव्य मान की ठोस शाफ्ट की अपेक्षा अधिक मजबूत पायी जाती हैं।

Note – संबंधित प्रश्न –
Q.1 किसी बेलनाकार छड़ की मरोड़ी दृढ़ता का सूत्र ज्ञात करो?
Q.2 एक सिलेंडर में एकांक रेडियन ऐंठन उत्पन्न करने वाले बलयुग्म के आघूर्ण का सूत्र प्राप्त कीजिए?
Q.3 किसी बेलनाकार छड़ में कुछ ऐंठन उत्पन्न करने के लिए आवश्यक बल युग्म का सूत्र स्थापित कीजिए?
Q.4 समान द्रव्यमान की एक पीली शाफ्ट एक ठोस शाफ्ट की अपेक्षा अधिक मजबूत होती है। समझाइए?
Q.5 सिध्द कीजिए कि समान द्रव्यमान तथा समान लंबाई की खोखली शाफ्ट, ठोस शाफ्ट की अपेक्षा अधिक मजबूत क्यों होती है?
Q 6 एक बेलनाकार छड़ में निश्चित ऐंठन उत्पन्न करने के लिए आवश्यक बल युग्म का सूत्र स्थापित कीजिए?

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *