p-n संधि डायोड के अवक्षय परत में क्या होते हैं?, अवक्षय परत की मोटाई क्या है | Depletion layer in Hindi

p-n संधि डायोड के अवक्षय परत में होते हैं

जैसा कि चित्र-1 में p-n संधि डायोड को दर्शाया गया है जिसमें चिन्ह \ominus ग्राही आयन को तथा ⊕ दाता आयन को प्रदर्शित करता है। चित्र में ◦ होल (या कोटर) तथा • इलेक्ट्रॉन को प्रदर्शित करते हैं। P-प्रकार अर्द्ध-चालक में ऋणावेशित ग्राही आयन तथा बहुसंख्यक आवेश वाहक होल उपस्थित रहते हैं, जबकि N-प्रकार अर्द्ध-चालक में धनावेशित दाता आयन तथा बहुसंख्यक इलेक्ट्रॉन उपस्थित रहते हैं। अल्पसंख्यक आवेश वाहकों को नगण्य मान लिया गया है।

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p-n संधि डायोड के अवक्षय परत
चित्र-1

p-n संधि डायोड में अवक्षय परत का बनना

चूॅंकि p-n संधि स्थान के दोनों और अशुद्ध परमाणुओं का घनत्व दूरी के साथ बढ़ता जाता है अतः घनत्व प्रवणता के कारण सन्धि के बनते ही ऊष्मीय विक्षोभों के फलस्वरुप संधि के आर-पार धारा-वाहकों का विसरण प्रारम्भ हो जाता है। अर्थात् N-प्रकार के अर्द्ध-चालक से कुछ इलेक्ट्रॉन सन्धि पार करके P अर्द्ध-चालक में तथा P-प्रकार के अर्द्ध-चालक से कुछ होल सन्धि पार करके N अर्द्ध-चालक में विसरित होते हैं तथा सन्धि पार करते समय इलेक्ट्रॉन व होल परस्पर मिलकर उदासीन हो जाते हैं।

इस प्रकार, p-n संधि के पास N-क्षेत्र में निश्चल धनावेशित दाता आयनों की तथा P-क्षेत्र में निश्चल ऋणावेशित ग्राही आयनों की अधिकता हो जाती है। इन्हें “अनावृत आवेश” कहते हैं। सन्धि के एक और P-क्षेत्र में ऋणात्मक अनावृत आवेश तथा दूसरी ओर N-क्षेत्र में धनात्मक अनावृत आवेशों के फलस्वरूप सन्धि पर एक विद्युत्-क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है जिसकी दिशा N-क्षेत्र के इलेक्ट्रॉन विद्युत्-क्षेत्र की दिशा के विपरीत तथा P-क्षेत्र के होल विद्युत्-क्षेत्र की दिशा में चलने लगते हैं । कुछ समय पश्चात इस विद्युत-क्षेत्र का मान इतना अधिक हो जाता है कि सन्धि पर आवेश वाहकों का और आगे विवरण रुक जाता है। अर्थात्

“सन्धि के दोनों ओर की वह परत जो गतिशील आवेश-वाहकों से मुक्त हो जाती है, ‘अवक्षय परत’ (Depletion Layer) कहलाती है।” इस परत की मोटाई लगभग 0.5 माइक्रोमीटर अथवा 10-6 मीटर की कोटि की होती है। इसमें कोई आवेश वाहक उपस्थित नहीं होता है। अर्थात् इस परत के सिरों के बीच उत्पन्न विभवान्तर को “विभव प्राचीर” या “विभव-रोध” कहते हैं। विभव-प्राचीर का मान जर्मेनियम p-n सन्धि के लिए लगभग 0.3 वोल्ट तथा सिलिकॉन p-n सन्धि के लिए लगभग 0.7 वोल्ट होता है।

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p-n संधि डायोड के अवक्षय परत
चित्र-2

अतः चित्र-2(a) में निश्चल दाता व ग्राही आयनों का वितरण प्रदर्शित है चित्र-2(b) में P- व N-क्षेत्र में गतिशील आवेश वाहकों का वितरण तथा चित्र-2(c) में अनावृत आवेश वाहकों का वितरण प्रदर्शित है। अतः स्पष्ट है कि सन्धि पर रोधिका क्षेत्र के कारण एक इलेक्ट्रॉन को N-क्षेत्र से P-क्षेत्र में स्थानान्तरित करने के लिए कुछ ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस ऊर्जा को ही “रोधिका ऊर्जा” कहते हैं। इसका मान अवक्षय परत की मोटाई पर निर्भर करता है तथा लगभग 0.1 वोल्ट से 0.5 वोल्ट की कोटि का होता है।

अब यदि P- व N-क्षेत्र में अल्पसंख्यक आवेश वाहकों की उपस्थिति नगण्य न मानी जाए, तो रोधिका क्षेत्र के कारण ये अल्पसंख्यक आवेश वाहक सन्धि को आसानी से पार कर जाते हैं। अतः इनकी गति के फलस्वरूप अल्प धारा प्रवाहित होने लगती है, लेकिन सन्तुलन की अवस्था में यह धारा, बहुसंख्यक आवेश वाहकों के विपरीत दिशा में प्रवाहित होने के कारण शीघ्र ही सन्तुलित हो जाती है।

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नोट– p-n संधि डायोड के अवक्षय परत के महत्वपूर्ण- FAQs

Q.1 अवक्षय परत क्या है?

Ans. अवक्षय परत – p-n संधि के दोनों ओर की उस परत को अथवा p-n संधि पर बनी दाता व ग्राही आयनों की परत को ‘अवक्षय परत’ कहते हैं जो गतिशील आवेश-वाहकों से मुक्त होती है।

Q.2 विभव प्राचीर क्या है?

Ans. विभव प्राचीर – p-n संधि के दोनों और बनी अवक्षय परत के सिरों के बीच उत्पन्न विभवान्तर को ‘विभव प्राचीर’ अथवा ‘रोधिका विभव’ कहते हैं। इसका मान 0.1 से लेकर 0.5 वोल्ट तक होता है तथा इसका मान सन्धि के ताप पर निर्भर करता है।

Q.3 PN संधि में अवक्षय परत की मोटाई कितनी होती है?

Ans. PN संधि में अवक्षय परत की मोटाई लगभग 10-6 मीटर की कोटि की होती है।

Q.4 p-n संधि को अग्र अभिनत करने पर अवक्षय परत तथा विभव प्राचीर पर क्या प्रभाव पड़ता है?

Ans. p-n संधि को अग्र अभिनत करने पर अवक्षय परत की चौड़ाई कम हो जाती है तथा विभव प्राचीर भी कम हो जाता है।

Note – p-n संधि डायोड के अवक्षय परत से सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 अवक्षय पर्त क्या है? इसकी निर्माण प्रक्रिया समझाइए।
Q.2 N-प्रकार तथा P-प्रकार के अर्द्ध-चालकों की p-n संधि डायोड के अवक्षय परत के बनने की प्रक्रिया समझाइए।
Q.3 p-n संधि डायोड के अवक्षय परत में क्या उपस्थित होते हैं? तथा सन्धि के व्यवहार का वर्णन कीजिए।

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