नए देशों की खोज और व्यापार, NCERT सार संग्रह | Discovery and Trade of New Countries in Hindi

हेलो दोस्तों, आज के इस लेख में हम आपको संक्षिप्त इतिहास NCERT सार संग्रह “महेश कुमार वर्णवाल” Book का अध्याय “नए देशों की खोज और व्यापार” (Discovery and trade of new countries in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। इसमें हम आपको विश्व की प्रमुख भौगोलिक खोजें एवं विश्व के प्रमुख भौगोलिक उपनाम ट्रिक को विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाएंगे, तो आप इस आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़ें।

नए देशों की खोज और व्यापार

  • जिज्ञासा की जिस भावना ने यूरोप में पुनर्जागरण काल के व्यक्तियों को साहित्य, विज्ञान, कला और धर्म के क्षेत्रों में नए-नए विचार व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया था, उसी जिज्ञासा की भावना ने अन्य व्यक्तियों को नए देश खोजने के लिए प्रोत्साहित किया।
  • इन साहसी यात्राओं का प्रमुख उद्देश्य पूर्व के देशों के साथ व्यापार करके मुनाफा कमाना था।
  • वास्को-डि-गामा ने अपनी पहली भारत-यात्रा में पाया था कि उस समय कालीकट में काली मिर्च की जो कीमत थी उससे 26 गुना ज्यादा वेनिस में थी।
  • 13वीं सदी में मार्कोपोलो ने वेनिस से चीन तथा जापान तक की यात्रा की थी। उसके वर्णनों से यूरोपवासियों को चीन के समृद्ध नगरों, जापान की सुनहरी मीनारों, बर्मा तथा स्याम के बौद्ध मंदिरों, पूर्वी द्वीप समूह के मसालों और भारत की भोग-विलास की वस्तुओं के बारे में जानकारी मिलती है।
  • धर्मयुद्धों के बाद यूरोपवासियों की पूर्वी देशों में दिलचस्पी बढ़‌ती गई। पूर्व के देशों के साथ व्यापार करने के कारण इटली के शहर बहुत समृद्ध हो गए थे।
  • नए मार्ग खोजना पुनर्जागरण काल के साहसी नाविकों के लिए एक चुनौती थी।
  • 15वीं सदी के अंतिम चरण तक विश्व के किसी भी एक क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को विश्व के अधिकांश हिस्सों के बारे में जानकारी नहीं थी।
  • पुर्तगाली और स्पेनी शासकों के सहयोग से नाविकों ने धरती की खोजबीन के लिए पहली बार साहसिक कदम उठाए।
  • उन्हें महासागरों की लंबी यात्राओं के लिए आवश्यक कुतुबनुमा और एस्ट्रोलेब जैसे उपकरणों की जानकारी मिल गई थी।

महान खोज यात्राएँ: 1492 – 1520 ई.

  • पुर्तगाल के शासक हेनरी ने अफ्रीका के तट को यात्राओं के आधार पर मानचित्र बनाकर अपने देश के नाविकों को प्रोत्साहित किया जो नाविक नाम से प्रसिद्ध था।
  • बार्थोलोम्यो डियाज नामक व्यक्ति उस जगह तक पहुँच चुका था, जिसका नाम पुर्तगालियों ने उत्तमाशा अंतरीप (केप आफ गुड होप) रखा था।
  • भौगोलिक अनुसंधान के क्षेत्र में पहत्वपूर्ण असफलता प्राप्त करने का श्रेय वास्कोडिगामा को है। सन् 1497 ई. में वह अपने साथियों सहित पूर्वी द्वीप समूह की खोज के लिए निकल पड़ा। केप-केमोरिन पहुँचने के बाद वह जंजीबार की तरफ मुड़ गया। संयोगवश यहां उसे एक अरब नाविक की सहायता मिल गई जो उसे 1498 ई. में सीधा भारत के विख्यात बंदरगाह कालीकट तक ले आया।
  • पूर्वी देशों के लिए जलमार्ग खोजने में स्पेन के नाविकों ने भी गहरी रुचि ली और अनजाने में ही नई दुनिया (अमेरिका) को खोज निकाला। इसका श्रेय क्रिस्टोफर कोलम्बस को है।
  • वह जेनेवा का नागरिक था। उसका विचार था कि भारत पहुंबने के लिए पश्चिम की ओर से समुद्र को आर-पार यात्रा करनी चाहिए। अन्त में स्पेन की रानी आइसबेला में उसे आर्थिक सहयोग देकर नया मार्ग खोजने की प्रेरणा दी।
  • 3 अगस्त, 1492 के दिन कोलम्बस ने अपनी महान यात्रा के लिए प्रस्थान किया। कैनेरी द्वीप पहुंचने के बाद वह पश्चिम दिशा की ओर बढ़ता ही चला गया।
  • कोलम्बस ने अमेरिका की धरती पर पहाला कदम बहामा द्वीप समूह पर रखा। इसके बाद कुछ दिन उसने क्यूबा, हैती आदि स्थानों की खोज में बिताये। कोलम्बस अपनी इस खोज की महानता को नहीं जान पाया क्योंकि उसने सोचा था कि वह एशिया के दक्षिण-पूर्व में स्थित भारत (इंडीज) द्वीप समूह में पहुँच गया है। इसलिए उसने वहां के मूल निवासियों को इंडियन कहां।
  • अमेरिगो वेस्पूची नामक एक इटालियन ने कोलम्बस के काम को आगे बढ़ाया और उसने यह सिद्ध किया कि नई दुनिया एशिया का भाग न होकर एक नई दुनिया है। इसी कारण बाद के लोगों ने इस नई दुनिया का नाम उसे सम्मान में ‘अमेरिका’ रखा।
  • पुर्तगाल का एक अन्य नाविक फर्डिनेंड मैग्लेन उन भू-भागों को जिनके आगे कोलंबस नहीं जा सका था, पार कर और आगे चला गया एवं पश्चिम की ओर दक्षिण अमेरिका के छोर तक पहुँच गया। इस जगह को मैग्लेन का जलडमरूमध्य कहा जाता है।
  • जलडमरूमध्य को पार करके वह एक नए महासागर में घुसा। इसका नाम उसने प्रशांत महासागर रखा, क्योंकि उसको यह महासागर अटलांटिक महासागर की तुलना में काफी शांत लगा।
  • इसके बाद वह उस जगह पहुँचा जिसे अब फिलिपाइन द्वीप समूह कहा जाता है। दो सौ नाविकों में से जो मैग्लेन के साथ यात्रा पर गए थे, उनमें से सिर्फ 18 नाविक जीवित लौट पाए थे।

✴️ भूगोलविद्

नामभौगोलिक खोजें
1.बार्थोलोम्यो डियाजअफ्रीका के दक्षिणतम भाग में पहुंचे (1488 ई.) और इसे केप ऑफ स्टार्म्स कहा। बाद में इसे केप ऑफ गुड होप नाम दिया गया।
2.क्रिस्टोफर कोलम्बसपूर्व की ओर नवीन समुद्री मार्ग की खोज के क्रम में एक द्वीप पहुंचे (1492 ई.) जिसे इंडीज समझा गया, लेकिन वस्तुतः यह अमेरिका था।
3.वास्को-डि-मामाभारत के पश्चिमी तर पर कालीकट पहुंचे (1498 ई.)। इस प्रकार भारत और पूर्वी क्षेत्र व्यापार के लिए खुल गए।
4.अमेरिगो वेसपुसीकोलंबस के मार्ग का अनुसरण करते हुए अमेरिका पहुंचा। उसने नए विश्व की खोज की घोषणा की जो एशिया से बहुत अलग था। अमेरिका का नामकरण इसी के नाम पर हुआ।
5.फर्डिनेंड मैग्लेनपृथ्वी की परिक्रमा करने वाला प्रथम सामुद्रिक यात्री।
6.हर्नन कोर्टेजमैक्सिको की खोज की।
7.जाॅन कैबोटउत्तरी अमेरिका के उत्तर पूर्वी तट पर पहुंचा। इसमें से एक द्वीप का नाम न्यू फाउंडलैण्ड रखा गया।
8.सर फ्रांसिस ड्रैकसमुद्री मार्ग से विश्व की परिक्रमा की।
  • इस समुद्री यात्रा को सफल माना गया, क्योंकि मैग्लेन ने इस यात्रा के द्वारा संसार का पूरा चक्कर लगाया। उसने यह भी सिद्ध कर दिया, कि पृथ्वी गोल है।
  • दूसरे देश जैसे इंग्लैण्ड, फ्रांस और नीदरलैंड भी इस चुनौतीपूर्ण खोज की दौड़ में शामिल हो गए।
  • इंग्लैण्ड के जॉन कैबोट ने पश्चिम की ओर जहाजी यात्रा को और कनाडा पहुँच गया। सन् 1577 में इंग्लैंड के नाविक फ्रांसिस ड्रेक ने पूरे विश्व का चक्कर लगाया।

व्यापार और उपनिवेशीकरण

  • भारत पहुँचने के लिए समुद्री मार्ग की खोज से वेनिस का यूरोप और एशिया के बीच व्यापार नियंत्रण का अंत हो गया और कुछ समय के लिए एशिया के साथ यूरोप के व्यापार पर पुर्तगाल का एकाधिकार हो गया।
    🔺ये खोज करने वाले जहाँ भी गए उनके पीछे-पीछे उनका राष्ट्रीय झंडा तथा वहाँ के मिशनरी भी पहुँचे। इस प्रकार साम्राज्य विस्तार के युग का प्रारम्भ हुआ।
  • कहा जाता है कि यूरोपीय राष्ट्रों की चिंता महज तीन चीजों के लिए थी-सोना, कीर्ति और ईश्वर (गोल्ड, ग्लोरी एंड गाॅड)। कोलंबस ने कहा था कि, सब चीजों में सोना सर्वाधिक मूल्यवान वस्तु है।
  • अनेक खोजी यात्रियों को यह सच्चा विश्वास था कि उनका मुख्य उद्देश्य विश्व के कोने-कोने में ईश्वर के वचन और उसके पुत्र का ज्ञान पहुँचाना है। लेकिन उनकी समुद्री यात्राएँ उनकी अपनी सरकारों और उन धनपतियों की मदद से ही संभव हुई जिनका एक मात्र उद्देश्य लाभ था।
  • इन खोजों से न सिर्फ व्यापार का आकार बढ़ा बल्कि जिन-जिन वस्तुओं का व्यापार होता था, उन वस्तुओं की संख्या भी बढ़ी। इसी के साथ एशिया का उपनिवेशीकरण आरम्भ हुआ और आगे की शताब्दियों में यूरोपीय देशों ने लगभग पूरे एशिया को पूरी तरह अपने कब्जे में कर लिया।
  • 19वीं सदी में आकर यूरोप के साम्राज्यवादी देशों ने बड़े पैमाने पर अफ्रीका को अपने अधीन किया।
  • भौगोलिक खोजों के कुछ दशकों के पश्चात् ही अमेरिका से जो वस्तुएँ पहले यूरोप में उपलब्ध नहीं थी तथा जिनके बारे में यूरोप के लोगों को ज्ञान नहीं था, अब उपलब्ध हो गई जैसे- आलू, तंबाकू और मक्का आदि।
  • यूरोपीय लोगों की अमेरिका विजय के पश्चात् जो महत्वपूर्ण बात हुई वह यह थी, कि उत्तरी अमेरिका, वेस्ट इंडीज और ब्राजील में बागान प्रथा लागू की गई और वहाँ पर मुख्य रूप से गन्ना, तंबाकू और कपास की खेती होने लगी।
  • 15वीं सदी के परवर्ती काल में दासों का व्यापार आरंभ हुआ। इस व्यापार का प्रारम्भ व्यक्तिगत सौदागरों, नाविकों और जलदस्युओं ने की थी, लेकिन 16वीं सदी के अंत तक यह नियमित रूप से दासों का व्यापार करने वाली कंपनियों के हाथों में चला गया।
  • अमेरिका में यूरोपीय उपनिवेशवादियों की संपन्नता में स्थानीय कृषिदासों (सर्फ) और अफ्रीकी दासों का महत्वपूर्ण योगदान है।
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