डॉप्लर प्रभाव क्या है, ध्वनि तथा प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव का व्यंजक | Doppler effect in Hindi

ध्वनि में डॉप्लर प्रभाव

“किसी ध्वनि स्त्रोत एवं श्रोता के मध्य आपेक्षिक गति के कारण, ध्वनि स्त्रोत की आवृत्ति में होने वाले आभासी परिवर्तन की परिघटना को डॉप्लर प्रभाव कहते हैं।” अर्थात्
जब श्रोता और ध्वनि के स्त्रोत के बीच आपेक्षिक गति होती है तो श्रोता को ध्वनि की आवृत्ति बदलती हुई प्रतीत होती है। आपेक्षिक गति से जब श्रोता तथा ध्वनि-स्त्रोत के मध्य दूरी बढ़ रही होती है तो आवृत्ति घटती हुई और जब दूरी घट रही होती है तो आवृत्ति बढ़ती हुई प्रतीत होती है। ध्वनि स्त्रोत तथा श्रोता के मध्य आपेक्षिक गति के कारण ध्वनि-स्त्रोत की आवृत्ति में उत्पन्न आभासी परिवर्तन का अध्ययन सर्वप्रथम डॉप्लर ने सन् 1842 में किया था, इसी कारण इसे ‘डॉप्लर प्रभाव (doppler’s effect in Hindi)’ कहते हैं।

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ध्वनि में डॉप्लर प्रभाव के कारण आभासी आवृत्ति का व्यंजक

ध्वनि में डॉप्लर प्रभाव का अध्ययन निम्नलिखित तीन भागों में किया जाता है –
1‌.ध्वनि स्त्रोत गतिमान है तथा श्रोता स्थिर है:- (a)-यदि ध्वनि स्त्रोत, श्रोता की ओर आ रहा हो तो आभासी आवृत्ति का सूत्र,
n’ = n( \frac{v}{v - v_s} ) …(1)
चूंकि \frac{v}{v - v_s} > 1 अतः n’ > n
अर्थात् आभासी आवृत्ति, वास्तविक आवृत्ति से अधिक है। इस दशा में श्रोता को स्त्रोत की ध्वनि तीक्ष्ण प्रतीत होती है।
(b)-यदि ध्वनि स्त्रोत, श्रोता से दूर जा रहा हो तो आभासी आवृत्ति का सूत्र,
n’ = n( \frac{v}{v + v_s} ) …(2)
चूंकि \frac{v}{v + v_s} < 1 अतः n’ < n
अर्थात् आभासी आवृत्ति, वास्तविक आवृत्ति से कम है। अतः इस दशा में श्रोता को स्त्रोत की ध्वनि मोटी प्रतीत होती है।

2.श्रोता गतिमान है तथा ध्वनि स्त्रोत स्थिर है:- (a)-यदि श्रोता, स्थिर ध्वनि स्त्रोत की ओर आ रहा हो तो आभासी आवृत्ति का सूत्र,
n’ = n( \frac{v + v_o}{v} ) …(3)
चूंकि \frac{v + v_o}{v} > 1 अतः n’ > n
अर्थात् आभासी आवृत्ति, वास्तविक आवृत्ति से अधिक है। अतः इस दशा में श्रोता को स्त्रोत की ध्वनि तीक्ष्ण प्रतीत होती है।
(b)-यदि श्रोता, स्थिर ध्वनि स्त्रोत से दूर जा रहा हो तो आभासी आवृत्ति का सूत्र,
n’ = n( \frac{v - v_o}{v} ) …(4)
चूंकि \frac{v - v_o}{v} < 1 अतः n’ < n
अर्थात् आभासी आवृत्ति, वास्तविक आवृत्ति से कम है। अतः इस दशा में श्रोता को स्त्रोत की ध्वनि मोटी प्रतीत होती है।

3.ध्वनि स्त्रोत तथा श्रोता दोनों गतिमान हैं:- माना ध्वनि स्त्रोत S तथा श्रोता O दोनों ही क्रमशः vs तथा vo वेगों से ध्वनि की दिशा में चल रहे हैं, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

डॉप्लर प्रभाव
डॉप्लर प्रभाव

अतः “ध्वनि सदैव स्त्रोत से श्रोता की ओर चलती है।” तब यदि केवल ध्वनि स्त्रोत ही चल रहा है तो श्रोता द्वारा सुनाई जाने वाली आभासी आवृत्ति n1 होती है तब समीकरण (1) से,
n1 = n( \frac{v}{v - v_s} )
परन्तु यदि श्रोता भी स्रोत से दूर जा रहा है तो आभासी आवृत्ति n1 से बदलकर n’ हो जाती है। तब समीकरण (4) से,
n’ = n1( \frac{v - v_o}{v} )
अतः n1 का उपरोक्त मान रखने पर,
\footnotesize \boxed{ n' = n( \frac{v - v_o}{v - v_s} ) } …(5)
यदि स्त्रोत व श्रोता में से किसी के चलने की दिशा ध्वनि की दिशा के विपरीत होती है तो समीकरण में उसके वेगों के चिन्ह बदल जाते है।

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प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव

“प्रकाश स्त्रोत तथा प्रेक्षक की सापेक्ष गति के कारण प्रकाश की आवृत्ति अथवा तरंगदैर्ध्य में प्रेक्षित आभासी परिवर्तन को ‘प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव (Doppler effect in light in Hindi)’ कहते हैं।” अर्थात्
यदि कोई प्रकाश-स्त्रोत किसी प्रेक्षक की ओर आ रहा है तो प्रकाश की आभासी आवृत्ति बढ़ जाती है अर्थात् तरंगदैर्ध्य घट जाती है। अतः इसकी स्पेक्ट्रमी रेखाएं स्पेक्ट्रम के बैंगनी भाग की और को विस्थापित हो जाती हैं। इसके विपरीत, यदि प्रकाश-स्त्रोत प्रेक्षक से दूर जा रहा है तो स्पेक्ट्रमी रेखाएं स्पेक्ट्रम के लाल भाग की और को विस्थापित हो जाती हैं।

डॉप्लर विस्थापन क्या है

“प्रकाश स्त्रोत तथा प्रेक्षक के मध्य आपेक्षिक गति के कारण स्पेक्ट्रमी रेखाओं में अपनी सामान्य स्थिति से होने वाले विस्थापन को ‘डॉप्लर विस्थापन (Doppler’s shift in Hindi)’ कहते हैं।” यह दो प्रकार के होता हैं। बैंगनी विस्थापन तथा लाल विस्थापन। डॉप्लर विस्थापन को निम्न सूत्र से व्यक्त किया जाता है। अर्थात्
डॉप्लर विस्थापन \footnotesize \boxed{ ∆λ = ( \frac{v}{c})λ }

प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव के कारण आभासी आवृत्ति का व्यंजक

प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव का अध्ययन निम्नलिखित दो भागों में किया जाता है –

  1. यदि प्रकाश स्त्रोत तथा प्रेक्षक के बीच की दूरी कम हो रही है, तो स्त्रोत की आभासी आवृत्ति का सूत्र,
    v’ = v \sqrt{ \frac{1 + v/c}{1 - v/c} } …(1)
    अर्थात् इस दशा में प्रेक्षक को स्त्रोत की आवृत्ति बढ़ी हुई अथवा तरंगदैर्ध्य घटी हुई प्रतीत होती है। इसके फलस्वरूप “प्रकाश की स्पेक्ट्रमी रेखाएं स्पेक्ट्रम के बैंगनी भाग की और विस्थापित हो जाती हैं, इसे डॉप्लर बैंगनी विस्थापन कहते हैं।”
  2. यदि प्रकाश स्त्रोत तथा प्रेक्षक के बीच की दूरी बढ़ रही है, तो स्त्रोत की आभासी आवृत्ति का सूत्र,
    v’ = v \sqrt{ \frac{1 - v/c}{1 + v/c} } …(2)
    अर्थात् इस दशा में प्रेक्षक को प्रकाश की आवृत्ति घटी हुई प्रतीत होती है। इसके फलस्वरूप “तरंगदैर्ध्य के बढ़ जाने के कारण प्रकाश की स्पेक्टमी रेखाएं स्पेक्ट्रम के लाल भाग की और विस्थापित हो जाती हैं, तब इसे डाॅप्लर लाल विस्थापन कहते है।”

डॉप्लर प्रभाव के अनुप्रयोग

  • प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव – प्रकाश के डॉप्लर प्रभाव से तारों तथा गैलेक्सियों की गति का अनुमान लगाया जाता है। तारों से आने वाले प्रकाश के स्पेक्ट्रम में हाइड्रोजन, हिलियम तथा सोडियम इत्यादि तत्वों की स्पेक्टमी में रेखाएं पाई जाती है।
  • ध्वनि में डॉप्लर प्रभाव – सोनार (sonar), यह समुद्र के अन्दर छिपी हुई पनडुब्बी अथवा आइसबर्ग आदि की स्थिति तथा उसके वेग ज्ञात करने की युक्ति है। इस मशीन की सहायता से पनडुब्बी अथवा आइसबर्ग का पता लगाया जा सकता है।

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Note – ध्वनि के लिए डॉप्लर प्रभाव, प्रकाश के लिए डॉप्लर प्रभाव से किस प्रकार भिन्न है?

ध्वनि के डॉप्लर प्रभाव तथा प्रकाश के डॉप्लर प्रभाव में अन्तर

ध्वनि तरंगों के लिए डॉप्लर प्रभाव ध्वनि स्त्रोत तथा श्रोता के बीच की दूरी परिवर्तन के साथ-साथ इस बात पर भी निर्भर करता है कि दोनों में से कौन किसकी ओर गतिमान है, जबकि प्रकाश तरंगों के लिए डॉप्लर प्रभाव केवल प्रकाश स्त्रोत तथा प्रेक्षक के बीच की दूरी परिवर्तन पर निर्भर करता है। परन्तु यह इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि इनमें से कौन किसकी ओर गतिमान है।

Note – डॉप्लर प्रभाव से सम्बन्धित प्रशन परिक्षाओं में पूछे जाते हैं।
Q.1 डॉप्लर प्रभाव क्या है? एक स्थिर ध्वनि स्त्रोत की ओर एक श्रोता एकसमान वेग से गति कर रहा है। श्रोता द्वारा सुनी गई आभासी आवृत्ति के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Q.2 प्रकाश में डॉप्लर प्रभाव क्या है? स्पेक्ट्रमी रेखाओं के डॉप्लर विस्थापन के लिए व्यंजक का निगमन कीजिए। तथा इनके अनुप्रयोगों की विवेचना भी कीजिए।

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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