विद्युतीय नेटवर्क से क्या तात्पर्य है, विद्युत परिपथ और विद्युत नेटवर्क में अंतर | Electrical Network in Hindi

विद्युतीय नेटवर्क क्या है

विद्युतीय नेटवर्क उस विद्युतीय परिपथ को कहते हैं जिसमें प्रतिरोध (R), प्रेरकत्व (L) तथा धारिता (C) आदि सभी या इनमें से कोई भी घटक तथा विद्युत वाहक बल या शक्ति के स्त्रोत से जुड़े होते हैं, तो ऐसे नेटवर्क को “विद्युतीय नेटवर्क (Electrical Network in Hindi)” कहते हैं। किसी नेटवर्क के घटकों के उस समूह को जो श्रेणी क्रम में जुड़े हैं, तो उसे नेटवर्क की एक शाखा कहते हैं। जिस बिन्दु पर दो से अधिक शाखा मिलती हैं, उसे जंक्शन कहते हैं। जिन नेटवर्कों में विद्युत वाहक बल या धारा शक्ति के स्त्रोत होते हैं उन्हें “सक्रिय नेटवर्क” तथा जिनमें विद्युत वाहक बल या शक्ति स्त्रोत नहीं होते, उन्हें ‘निष्क्रिय नेटवर्क’ कहते हैं।

रेखीय नेटवर्क क्या है

उस नेटवर्क को जिसकी सभी शाखाओं में धारा आरोपित वोल्टेज के समानुपाती होती है, “रेखीय नेटवर्क (Linear Network in Hindi)” कहलाता है।
माना कोई एक बन्द परिपथ की सरल नेटवर्क तथा बहुत से परिपथों से मिलकर बने एक जटिल परिपथ को ‘सम्मिश्र नेटवर्क (complex network in Hindi)’ कहते हैं। सरल नेटवर्क की किसी प्रतिबाधा में प्रवाहित धारा तथा उसके सिरों पर विभवान्तर को “किरचॉफ के नियम” तथा “ओम के नियम” से ज्ञात किया जा सकता है परन्तु सम्मिश्र नेटवर्क में इन राशियों को ज्ञात करने के लिए यह विधि जटिल होती है जिसमें बहुत से समीकरणों को हल करना होता है। इसी कारण ‘विद्युतीय नेटवर्क प्रमेय’ स्थापित की गई है जिसकी सहायता से सम्मिश्र नेटवर्क के किसी भी प्रतिबाधा में प्रवाहित धारा तथा उसके सिरों पर विभवान्तर की गणना की जा सकती है।

रेखीय प्रतिबाधा क्या है

कुछ प्रमेय ऐसी भी होती हैं जिनका उपयोग किसी भी प्रकार के नेटवर्क में किया जा सकता है जबकि कुछ प्रमेय केवल ‘रेखीय प्रतिबाधा’ नेटवर्क में ही प्रयोग की जा सकती हैं। जो प्रतिबाधा ओम के नियम का पालन करती हैं उसे “रेखीय प्रतिबाधा” कहते हैं। या दूसरे शब्दों में, जिस प्रतिबाधा के सिरों पर लगा विभवान्तर उसमें प्रवाहित धारा के समानुपाती होता है उसे रेखीय प्रतिबाधा कहा जाता है।
रेखीय प्रतिबाधा की श्रेणी में प्रतिरोध, प्रेरकत्व तथा संधारित्र आते हैं जबकि दूसरी श्रेणी में तापायनिक वाल्व तथा अर्ध्द-चालक आते हैं। रैखिक प्रतिबाधा अथवा प्रतिबाधाओं से युक्त परिपथ को’रैखिक नेटवर्क’ कहते हैं।

दो टर्मिनल नेटवर्क क्या हैं

जब किसी नेटवर्क के जिन दो सिरों के बीच ऊर्जा स्त्रोत लगाया जाता है अतः उन्हीं दो सिरों के बीच आउटपुट प्राप्त किया जाता है। अर्थात् धारा या विभवांतर ज्ञात किया जाता है तो उस नेटवर्क को “दो टर्मिनल वाला नेटवर्क (Two Terminal Network in Hindi)” कहते हैं। अर्थात् जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

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दो टर्मिनल नेटवर्क

माना चित्र में दो टर्मिनल वाला रेखिक नेटवर्क को लिया गया है। अतः किसी टर्मिनल परिपथ के विभवान्तर में धारा का मान स्थापित करने पर उसमें स्थित प्रतिरोध व प्रेरकतत्व में रेखिक नेटवर्क के संधारित्र से दो टर्मिनल नेटवर्क में विभवान्तर ज्ञात कर लिया जाता है।

विद्युत परिपथ और विद्युत नेटवर्क में अंतर

विद्युत परिपथ में स्थित वैधुत सेल एक ऐसी युक्ति होती है जो रासायनिक ऊर्जा को वैधुत ऊर्जा में बदल कर किसी विद्युत परिपथ में आवेश अथवा धारा के प्रवाह को निरन्तर बनाए रखती है, जबकि विद्युत नेटवर्क में उस विद्युत परिपथ को जिसमें प्रतिरोध, प्रेरकत्व व धारिता आदि को शक्ति स्त्रोत से जोड़ दिया जाता है।

Note – विद्युतीय नेटवर्क से संबंधित प्रशन –
Q.1 विद्युतीय नेटवर्क से आप क्या समझते हैं? रेखीय प्रतिबाधा को समझाइए तथा दो टर्मिनल वाला नेटवर्क क्या होता है? सिद्ध कीजिए।
Q.2 दो टर्मिनल नेटवर्क को किस प्रकार ज्ञात किया जाता है? तथा विद्युत परिपथ एवं विद्युत नेटवर्क में क्या अंतर है? ज्ञात कीजिए।

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