ऊर्जा बैण्ड क्या है, चालक, अचालक व अर्द्धचालक को स्पष्ट कीजिए | Energy Band in Hindi

ऊर्जा बैण्ड क्या है? – इस अध्याय में ऊर्जा बैण्ड के बारे में विस्तार से सरल भाषा में अध्ययन किया गया है। तथा इसमें ऊर्जा बैण्ड के आधार पर – चालक, अचालक तथा अर्द्धचालक का भी पूर्ण रूप से वर्णन किया गया है।

ऊर्जा बैण्ड की परिभाषा

जब अनेक परमाणु मिलकर किसी ठोस की रचना करते हैं तो इन परमाणुओं के बीच अन्योन्य क्रियाओं के कारण उनके ऊर्जा स्तरों में विक्षोभ उत्पन्न हो जाता है जिसके परिणाम स्वरूप प्रत्येक ऊर्जा स्तर अनेक ऊर्जा स्तरों में विभक्त होकर एक बैण्ड का रूप ले लेते हैं, जिसे “ऊर्जा बैण्ड (energy band in Hindi)” कहते हैं।

ऊर्जा बैण्ड के आधार पर चालक विद्युत रोधी और अर्धचालक की व्याख्या कीजिए

ऊर्जा बैण्ड संरचना के आधार पर चालक, अचालक (या विद्युतरोधी) तथा अर्द्ध-चालक की व्याख्या क्रिस्टल में ऊर्जा बैण्ड सिद्धांत के आधार पर निम्न प्रकार से की गयी है –
किसी पदार्थ की विद्युत चालकता दो बातों पर निर्भर करती है।
(1). चालक बैण्ड के आंशिक भरे अथवा पूर्णतः खाली होने पर, तथा
(2). वर्जित ऊर्जा अन्तराल पर ।

1. चालक (conductor) – इन पदार्थों में संयोजकता बैण्ड का ऊपरी भाग और चालन बैण्ड का निचला भाग एक-दूसरे पर अतिव्यापित हो जाता है। अतः वर्जित ऊर्जा अन्तराल का मान EG = 0 (शून्य) होता है। ऐसे पदार्थों में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या बहुत अधिक होती है। चित्र-1 में देखें।

और पढ़ें.. ठोसों में ऊर्जा बैंड किस प्रकार बनते हैं? संयोजी बैंड, चालन बैंड तथा वर्जित ऊर्जा अन्तराल को समझाइए।

चालक

अर्थात् बिना अतिरिक्त ऊर्जा के इलेक्ट्रॉन आसानी से संयोजी बैण्ड से चालन बैण्ड में चले जाते हैं। इसलिए धातुओं की चालकता सर्वाधिक होती है।
उदाहरणार्थ – चाॅंदी, सोना, एलुमिनियम तथा ताॅंबा आदि पदार्थ चालक पदार्थ कहलाते हैं।

2. अचालक (insulator) – इन पदार्थों में संयोजकता बैण्ड पूर्ण रूप से भरा और चालन बैण्ड पूर्ण रूप से खाली होता है। तथा इन बैण्डों के वर्जित ऊर्जा अन्तराल का मान बहुत अधिक अर्थात् EG = 7 eV या से अधिक होता है। चित्र-2 में देखें।

अचालक ऊर्जा बैण्ड

इसीलिए सामान्य परिस्थितियों में संयोजी बैण्ड के इलेक्ट्रॉनों को इतनी ऊर्जा नहीं मिल पाती कि वे संयोजी बैण्ड से चालन बैण्ड में पहुंच जाएं और वैद्युत का चालन सम्भव नहीं हो पाता है।
उदाहरणार्थ – डायमण्ड, लकड़ी, रवड़, काॅंच तथा मोम आदि पदार्थ अचालक (या विद्युतरोधी) पदार्थ कहलाते हैं।

3. अर्द्ध-चालक (semi-conductor) – अर्द्ध-चालक पदार्थों में संयोजकता बैण्ड पूर्ण भरा और चालन बैण्ड पूर्ण खाली होता है, परन्तु वर्जित ऊर्जा बैण्ड की चौड़ाई बहुत कम (EG \simeq 1 eV) होती है। (उदाहरण के लिए, सिलिकॉन के लिए EG = 1.12 eV तथा जर्मेनियम के लिए EG ≈ 0.72 eV )। चित्र-3 में देखें।

अर्द्धचालक ऊर्जा बैण्ड

अर्थात् कमरे के ताप पर ही ऊष्मीय प्रक्षोभों द्वारा प्राप्त ऊर्जा से इलेक्ट्रॉन संयोजी बैण्ड से चालन बैण्ड में पहुंच जाते हैं। तथा बहुत कम विद्युत् चालन होता है।
उदाहरणार्थ – यहाॅ जर्मेनियम (Ge), सिलिकॉन (Si) आदि अर्द्ध-चालक पदार्थ हैं।

ऊर्जा बैण्ड के आधार पर चालक, अचालक एवं अर्द्धचालकों में अन्तर

(1). चालक – ऊर्जा बैण्ड संरचना के आधार पर चालक वे पदार्थ होते हैं, जिनके चालन बैण्ड इलेक्ट्रॉनों से आंशिक रूप से भरे होते हैं। तथा इनके संयोजी बैण्ड एवं चालन बैण्ड या तो परस्पर अतिव्यापित होते हैं या उनके बीच वर्जित ऊर्जा अन्तराल लगभग नगण्य होता है।

(2). अचालक – ऊर्जा बैण्ड संरचना के आधार पर अचालक वे पदार्थ होते हैं, जिनके संयोजी बैण्ड पूर्णतः भरे हुए तथा चालन बैण्ड पूर्णतः रिक्त होते हैं तथा उनके बीच वर्जित ऊर्जा अन्तराल बहुत अधिक होता है।

(3). अर्द्धचालक – ऊर्जा बैण्ड संरचना के आधार पर अर्द्धचालक वे पदार्थ होते हैं, जिनके संयोजी बैण्ड पूर्ण रूप से भरे हुए होते हैं तथा चालन बैण्ड पूर्णतः रिक्त होते हैं, परन्तु चालन बैण्ड एवं संयोजी बैण्ड के बीच वर्जित ऊर्जा अन्तराल बहुत कम होता है।

Note – ऊर्जा बैण्ड से सम्बन्धित प्रशन पूछें जाते हैं।
Q.1 ऊर्जा बैण्ड क्या है?
Q.2 ऊर्जा बैण्ड के आधार पर चालक, विद्युत् रोधी और अर्द्धचालक की व्याख्या कीजिए?
Q.3 ऊर्जा बैण्ड के आधार पर चालक, अचालक एवं अर्द्धचालकों में अन्तर स्पष्ट कीजिए?

Read More –

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *