ठोसों में ऊर्जा बैंड किस प्रकार बनते हैं, संयोजी बैंड, चालन बैंड तथा वर्जित ऊर्जा अन्तराल को समझाइए।

Energy Bands in Solids in Hindi, ठोसों में ऊर्जा बैंड किस प्रकार बनते हैं, संयोजी बैंड, चालन बैंड तथा वर्जित ऊर्जा अन्तराल को समझाइए। नोट – इस अध्याय में इन सभी का विस्तार से सरल भाषा में अध्ययन किया गया है।

ठोसों में ऊर्जा बैंड का बनना

किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन, नाभिक के चारों और निश्चित कक्षाओं में घूमते हैं तथा प्रत्येक कक्षा की एक निश्चित ऊर्जा होती है लेकिन यह वितरण केवल विमुक्त परमाणु के लिए ही सत्य है। क्रिस्टल संरचना में चूॅंकि परमाणु एक-दूसरे से विमुक्त नहीं होते हैं बल्कि वे एक-दूसरे के विद्युत् क्षेत्र से प्रभावित होते हैं, जिससे उनकी ऊर्जा अवस्थाएं भी प्रभावित होने लगती हैं।

जब दो परमाणु एक-दूसरे के पास होते हैं तो प्रत्येक परमाणु की सबसे बाहरी कक्षा के इलेक्ट्रॉन, स्थायी परमाणु संरचना प्राप्त करने के लिए केवल अपने मूल परमाणु से बध्द नहीं रहते हैं, बल्कि पड़ौसी परमाणुओं से बध्द होने लगते हैं जिसके फलस्वरूप उनकी अपनी ऊर्जा कम होने लगती है। तथा परमाणुओं के बीच की दूरी साम्य दूरी के बराबर होने पर इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा न्यूनतम हो जाती है।

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इस प्रकार, तनिक भिन्न ऊर्जा के मान दोनों परमाणुओं के संगत दो ऊर्जा-स्तर प्राप्त हो जाते हैं। क्रिस्टल संरचना अथवा ठोस में चूॅंकि अनेक परमाणु एक दूसरे के पास स्थित होते हैं अतः प्रत्येक परमाणु का ऊर्जा-स्तर क्रिस्टल में उपस्थित परमाणु की संख्या के बराबर ऊर्जा-स्तर में विभक्त हो जाता है। अतः ये ऊर्जा-स्तर एक-दूसरे के इतने समीप होते हैं। कि ये “ठोसों में ऊर्जा बैंड (energy bands in solids in Hindi)” का निर्माण करते हैं।

ठोसों का ऊर्जा बैंड सिद्धांत

जिस प्रकार क्रिस्टल में परमाणुओं की संख्या बढ़ती है, उसी प्रकार बैंडों में ऊर्जा-स्तर की संख्या भी बढ़ती है। फलतः बैंड को सतत् माना जा सकता है। अर्थात् ऊर्जा बैंड की चौड़ाई प्रत्येक विमुक्त परमाणु के ऊर्जा-स्तर पर तथा क्रिस्टल में परमाणुओं के बीच की दूरी पर निर्भर करती है। निम्न ऊर्जा-स्तर बैंड की चौड़ाई कम तथा उच्च ऊर्जा-स्तर के बैंड की चौड़ाई अधिक होती है। जैसा कि चित्र-1 में किसी क्रिस्टल के लिए एकविमीय ऊर्जा-स्तर आरेख प्रदर्शित है।

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ठोसों में ऊर्जा बैंड

माना चित्र में किसी ठोस (या क्रिस्टल) में अन्तर-परमाणुक दूरी के साथ ऊर्जा-स्तरों का बनना प्रदर्शित है। अतः चित्र से स्पष्ट है कि अन्तर-परमाणुक दूरी घटने पर सर्वप्रथम ऊपर के उच्चतम ऊर्जा-स्तर विभक्त होने लगते हैं तथा फिर क्रम से नीचे के ऊर्जा-स्तर प्रभावित होते हैं। निम्न उर्जा-स्तरों में विभाजन बहुत कम होता है जब परमाणुओं के बीच की दूरी साम्य दूरी के बराबर होती है, तब क्रिस्टल (या ठोसों में) ऊर्जा बैंड प्रदर्शित किया जाता हैं।

ठोसों में ऊर्जा बैंडों के प्रकार

किसी ठोस पदार्थ में अनेक प्रकार के ऊर्जा बैंड पाये जाते हैं, जिसमें ये तीन ऊर्जा बैंड महत्वपूर्ण हैं जोकि इस प्रकार से दर्शायें गयें हैं।
(1). संयोजी बैण्ड (valance band),
(2). चालन बैण्ड (conduction band) तथा
(3). वर्जित ऊर्जा अन्तराल (forbidden energy gap) ।

1. संयोजी बैण्ड (Valance Band in Hindi)

वह ऊर्जा बैंड जिसमें संयोजक इलेक्ट्रॉनों के ऊर्जा-स्तर उपस्थित होते हैं, संयोजी बैण्ड कहलाते हैं।

2. चालन बैण्ड (Conduction Band in Hindi)

वह ऊर्जा बैंड जिसमें चालक इलेक्ट्रॉनों के ऊर्जा-स्तर उपस्थित होते हैं, चालन बैण्ड कहलाते हैं।

3. वर्जित ऊर्जा अन्तराल (Forbidden Energy band in Hindi)

संयोजी बैण्ड तथा चालन बैण्ड के बीच एक रिक्ति होती है जिसमें कोई इलेक्ट्रॉन उपस्थित नहीं रहता है, इसे वर्जित ऊर्जा अन्तराल कहते हैं।

नोट – चालन बैण्ड, संयोजी बैण्ड तथा वर्जित ऊर्जा अन्तराल पर सरल भाषा में टिप्पणी लिखिए?

ऊर्जा बैण्डों पर संक्षिप्त टिप्पणी

यदि हम उन ऊर्जा-स्तरों के संगत बैंड लें, जिनमें ऊर्जा स्तर इलेक्ट्रॉनों द्वारा पूर्णतः भरे होते हैं, ‘संयोजी बैण्ड’ कहलाते है। इसमें संयोजी इलेक्ट्रॉन होते हैं। तथा परम शून्य ताप पर जबकि इलेक्ट्रॉन केवल अपनी निम्नतम ऊर्जा अवस्थाओं में होते हैं,
संयोजी बैण्ड के ऊपर इसके पास के सभी उच्च ऊर्जा-स्तर पूर्णतः खाली होते हैं तथा ये ऊर्जा-स्तर मिलकर चालन बैण्ड बनाते हैं, ये ऊर्जा-स्तर इलेक्ट्रॉनों द्वारा आंशिक भरे होते हैं अथवा पूर्णतः खाली होते हैं, ‘चालन बैण्ड’ कहलाते है।
क्रिस्टल में इलेक्ट्रॉन संयोजी बैण्ड तथा चालन बैण्ड के बीच नहीं रहता है। अतः इन ऊर्जा बैण्डों के बीच के अन्तराल को ‘वर्जित ऊर्जा अन्तराल’ कहते हैं।

Note – ठोसों में ऊर्जा बैंड से संबंधित प्रशन –
Q.1 ठोसों में ऊर्जा बैंड किस प्रकार बनते हैं तथा ठोसों में वैद्युत का चालन किस प्रकार होता है? विस्तार से समझाइए।
Q.2 ठोसों में कितने प्रकार के ऊर्जा बैंड होते हैं? संक्षिप्त विवरण कीजिए।

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