एण्ट्रॉपी क्या है, परिभाषा, सूत्र, मात्रक तथा भौतिक महत्व समझाइए | Entropy in Hindi

एण्ट्रॉपी क्या है

किसी पदार्थ की ऊष्मागतिकी अवस्था उसके आयतन, दाब और ताप द्वारा निर्धारित होती है परन्तु अनेक उष्मागतिकी घटनाओं को ठीक प्रकार से व्यक्त करने के लिए तथा ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम को सूत्र रूप में स्थापित करने के लिए क्लाॅसियस ने आयतन, दाब और ताप की भांति एक अन्य भौतिक राशि पर विचार किया, जिसे ‘एण्ट्रॉपी (entropy in Hindi)’ कहते हैं। क्लाॅसियस ने यह भी सिद्ध किया कि उत्क्रमणीय रुद्धोष्म परिवर्तन में पदार्थ की एण्ट्रॉपी नियत रहती है
अतः एण्ट्रॉपी को निम्न प्रकार से परिभाषित कर सकते हैं –
“किसी पदार्थ की एण्ट्रॉपी वह भौतिक राशि है, जो उत्क्रमणीय रुद्धोष्म परिवर्तन में सदैव नियत रहती है।”

एण्ट्रॉपी का भौतिक महत्व

एण्ट्रॉपी की भौतिक अभिधारणा देना मुश्किल है क्योंकि इसकी भौतिकता व्यक्त करना असंभव है। तथा एण्ट्रॉपी को ताप अथवा दाब के समान अनुभव नहीं किया जा सकता है, लेकिन चूंकि एण्ट्रॉपी को निम्न प्रकार से परिभाषित किया जाता है, तो –

एण्ट्रॉपी में परिवर्तन = \frac{दी गई या ली गई ऊष्मा}{परम ताप}

अतः हम कह सकते हैं कि ऊष्मा की विमाएं एण्ट्रॉपी व परम ताप के गुणनफल की विमाओं के समान होती है। तथा किसी पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा उसके द्रव्यमान तथा शून्य स्तर से ऊंचाई के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होती है। यहां यदि हम ताप को ऊंचाई के अनुक्रमानुपाती लें, तो एण्ट्रॉपी को द्रव्यमान या जड़त्व के तुल्य ले सकते हैं। अतः इस प्रकार, ‘हम एण्ट्रॉपी को तापीय जड़त्व मान सकते हैं जो ऊष्मागतिकी में ठीक उसी प्रकार व्यवहार करता है जैसे रेखीय गति से द्रव्यमान घूर्णन गति में जड़त्व आघूर्ण करता है।’
अर्थात् इस तरह ‘एण्ट्रॉपी उष्मीय जड़त्व की तरह कार्य करती है।’
एण्ट्रॉपी का मात्रक – यह ऊष्मा तथा परम ताप के मात्रक पर निर्भर करता है। इसे प्रायः ‘जूल/केल्विन’ या ‘कैलोरी/कैल्विन’ में मापा जाता है।

और पढ़े… ऊष्मागतिकी के शूनयवें नियम को समझाइए? ताप की व्याख्या (Zeroth Law of Thermodynamics in Hindi)

और पढ़े… ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम क्या है? उपयोग, सीमाएं। (First Law of Thermodynamics in Hindi)

उत्क्रमणीय चक्र में एण्ट्रॉपी परिवर्तन

माना कि उत्क्रमणीय चक्र में एण्ट्रॉपी में परिवर्तन दर्शाने हेतु कार्नो चक्र के अनुसार जैसे कि चित्र में दिखाया है।

उत्क्रमणीय चक्र में एण्ट्रॉपी
उत्क्रमणीय चक्र में एण्ट्रॉपी

माना कि कार्यकारी पदार्थ स्त्रोत से ताप T1 पर Q1 ऊष्मा ग्रहण करता है। चूंकि समतापीय प्रसार M से N तक होता है अतः इससे
एण्ट्रॉपी में क्षति = \frac{Q_1}{T_1}

अब N से O तक रुद्धोष्म प्रसार होता है जिसमें एण्ट्रॉपी स्थिर रहती है। तथा O से P तक समतापीय सम्पीडन ताप T2 पर होता है, जिसमें कार्यकारी पदार्थों ऊष्मा Q2 का त्याग करता है अर्थात् सिंक को Q2 ऊष्मा दी जाती है, अतः
सिंक की एण्ट्रॉपी में वृद्धि = \frac{Q_2}{T_2}

अतः P से M तक कार्यकारी पदार्थ को रुध्दोष्म विधि से सम्पीडित करके लाया जाता है जिससे एण्ट्रॉपी परिवर्तन शून्य होता है। अतः
निकाय की एण्ट्रॉपी में वृद्धि = \frac{Q_2}{T_2} \frac{Q_1}{T_1}

उत्क्रमणीय प्रक्रम के आधार पर ताप के केल्विन के परम तापक्रम की परिभाषा के अनुसार,
\frac{Q_2}{T_2} = \frac{Q_1}{T_1}
अथवा
( \frac{Q_2}{T_2} = \frac{Q_1}{T_1} ) = 0
या \footnotesize \boxed{ \oint \frac{dθ}{T} = 0 }
अतः “उत्क्रमणीय चक्र में निकाय की एण्ट्रॉपी परिवर्तन शून्य होता है।”

पढ़े… ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम क्या है? परिभाषा, सूत्र (Third Law of Thermodynamics in Hindi)

पढ़े… ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम क्या है? आवश्यकता (Second Law of Thermodynamics in Hindi)

अनुत्क्रमणीय चक्र में एण्ट्रॉपी परिवर्तन

किसी इंजन की दक्षता जिसका कार्यकारी पदार्थ उत्क्रमणीय चक्र स्त्रोत के ताप T1 व सिंक के ताप T2 के बीच पूर्ण करता है।
η = 1 – \frac{Q_2}{Q_1} = 1 – \frac{T_2}{T_1}
यह प्रक्रम अनुत्क्रमणीय होता है। अतः इंजन की दक्षता का अधिकतम मान (1 – \frac{T_2}{T_1} ) से कम होगा, अर्थात्
(1 – \frac{Q_2}{Q_1} ) < (1 – \frac{T_2}{T_1} ) या \frac{Q_2}{Q_1} > \frac{T_2}{T_1}
या \frac{Q_2}{T_2} > \frac{Q_1}{T_1}
या ( \frac{Q_2}{T_2} \frac{Q_1}{T_1} ) > 0
या \footnotesize \boxed{ \oint \frac{dQ}{T} > 0 } ….(1)
यदि यहां पर एक ऐसे निकाय पर विचार किया जाए कि जिसमें कार्यकारी पदार्थ एक पूर्ण चक्र के उपरान्त अपनी प्रारंभिक अवस्था प्राप्त कर लेता है, तब इस चक्र में स्त्रोत की एण्ट्रॉपी में कमी ( \frac{Q_1}{T_1} ) होगी (क्योंकि स्त्रोत से T1 ताप पर Q1 ऊष्मा ली जाती है) जबकि सिंक की एण्ट्रॉपी में वृद्धि ( \frac{Q_2}{T_2} ) होगी (क्योंकि सिंक को ताप T2 पर Q2 ऊष्मा दी जाती है)।

इस प्रकार निकाय की एण्ट्रॉपी में वृद्धि = ( \frac{Q_2}{T_2} \frac{Q_1}{T_1} )

परन्तु समीकरण (1) से इस राशि का मान शून्य से अधिक होगा, अर्थात् यह राशि धनात्मक होगी। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि “अनुत्क्रमणीय प्रक्रम में एण्ट्रॉपी सदैव बढ़ जाती है।”

पढ़े… कार्नो इंजन क्या है? परिभाषा, भाग, कार्यविधि, इंजन की दक्षता का सूत्र (Carnot’s Engine in Hindi)

पढ़े… कार्नो प्रमेय क्या है? परिभाषा एवं सिद्ध कीजिए। (Carnot’s Theorem in Hindi)

Important question – क्लाॅसियस की प्रमेय क्या है ? संक्षेप में सूत्र बताइए।

Ans. क्लाॅसियस के अनुसार, जब किसी भी ऊष्मागतिकी निकाय में परिवर्तन होता है, तो उसकी एण्ट्रॉपी या तो नियत रहती है अथवा बढ़ती है अर्थात्
\oint \frac{dQ}{T} = 0 (उत्क्रमणीय चक्र में)
तथा
\oint \frac{dQ}{T} > 0
\footnotesize \boxed{ \int {dQ}{T} ≥ 0 }
“यही क्लाॅसियस की प्रमेय है।”

Note – एण्ट्रॉपी से सम्बन्धित प्रशन पूछें जाते हैं।

Q. 1 एण्ट्रॉपी को परिभाषित कीजिए तथा उसके भौतिक महत्व को समझाइए। दर्शाइए कि आदर्श गैस की एण्ट्रॉपी उत्क्रमणीय प्रक्रम में नियत रहती है तथा अनुत्क्रमणीय प्रक्रम में बढ़ जाती है ?
Q. 2 एण्ट्रॉपी क्या है ? इसका भौतिक महत्व समझाइए। एण्ट्रॉपी के लिए क्लॉसियस की प्रमेय लिखिए व सिद्ध कीजिए ?
Q. 3 एण्ट्रॉपी से आप क्या समझते हैं ? इसकी परिभाषा बताइए तथा इसका भौतिक महत्व समझाइए ?
Q. 4 सिद्ध करो कि अनुत्क्रमणीय प्रक्रम में एण्ट्रॉपी में वृद्धि होती है ?
Q. 5 सिद्ध करो कि उत्क्रमणीय चक्रीय प्रक्रम में एण्ट्रॉपी नियत रहती है ?

  1. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  2. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *