एण्ट्रॉपी वृद्धि का नियम क्या है | Entropy Increase Law in Hindi

एण्ट्रॉपी वृद्धि का नियम

यदि किसी निकाय की एण्ट्रॉपी में परिवर्तन निकाय एवं परिवेश के बीच ऊष्मा का आदान-प्रदान के फलस्वरूप होता है। अतः जब किसी निकाय की एण्ट्रॉपी में परिवर्तन होता है, तो निकाय एवं परिवेश की एण्ट्रॉपी में भी परिवर्तन होता है अतः निकाय एवं परिवेश की एण्ट्रॉपियों में परिवर्तन का योग “विश्व की एण्ट्रॉपी में परिवर्तन” कहलाता है।

एण्ट्रॉपी में वृद्धि ज्ञात करना

एण्ट्रॉपी में वृद्धि ज्ञात करने के लिए, हम एक प्राकृतिक अनुत्क्रमणीय प्रक्रम के कारण विश्व की एण्ट्रॉपी में परिवर्तन पर विचार करते हैं। यदि कोई निकाय किसी प्राकृतिक प्रक्रम के द्वारा u अवस्था से v अवस्था में ले जाया जाए तो हम निकाय की एण्ट्रॉपी में परिवर्तन (Sv– Su) का सूत्र
Sv – Su = \int^v_u \frac{dQ}{T}
द्वारा ज्ञात नहीं कर सकते, क्योंकि यह सूत्र केवल उत्क्रमणीय प्रक्रमों पर ही लागू होता है। अतः हम वास्तविक अनुत्क्रमणीय प्रक्रम के स्थान पर किसी ऐसे उत्क्रमणीय प्रक्रम के लिए (Sv – Su) का मान ज्ञात करेंगे, जो निकाय को u अवस्था से v अवस्था में ले जा सके। यही मान वास्तविक अनुत्क्रमणीय प्रक्रम के लिए भी लागू होता है। क्योंकि एण्ट्रॉपी केवल निकाय की अवस्था पर निर्भर करती है।

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उदाहरण के लिए – हम एक अनुत्क्रमणीय प्रक्रम ऊष्मा-चालन पर विचार करते हैं। माना कि एक ऊष्मारोधी बॉक्स में ताप T1 की एक गर्म वस्तु तथा ताप T2 की एक ठंडी वस्तु परस्पर संपर्क में रखी है। तथा ऊष्मा वस्तु M से वस्तु N में तब तक प्रवाहित होती है जब तक कि दोनों का ताप समान नहीं हो जाता। माना कि ताप Tm तथा प्रवाहित ऊष्मा Q है। अथवा ऊष्मा का प्रवाह अनुत्क्रमणीय है। इस प्रक्रम के कारण निकाय की एण्ट्रॉपी में परिवर्तन ज्ञात करने के लिए हमें किसी ऐसे उत्क्रमणीय प्रक्रम पर विचार करना होगा। जिसके द्वारा Q ऊष्मा गर्म वस्तु M से ठण्डी वस्तु N में जा सके। ऐसे प्रक्रम के लिए हमें एक ऐसा ऊष्मा-कुण्ड लेना होगा। जिसका ताप लगातार बदला जा सके। अब ऊष्मा-कुण्ड को ताप T1 पर समायोजित करके वस्तु M के संपर्क में रखेंगे तथा फिर इस ताप को अत्यन्त धीरे-धीरे Tm तक गिराएंगे। इस प्रक्रम में ऊष्मा Q वस्तु M से कुण्ड में आएगी तथा वस्तु M का ताप भी Tm तक गिर जाएगा ।
अतः वस्तु M की एण्ट्रॉपी में कमी
∆S1 = \frac{Q}{T_{1m}}
यहां T1m तापों T1 तथा Tm का औसत मान है। अतः ऊष्मा-कुण्ड की एण्ट्रॉपी में इतनी वृद्धि होगी और इस प्रकार विश्व की एण्ट्रॉपी अपरिवर्तित रहेगी।
अब ऊष्मा-कुण्ड को ताप T2 पर समायोजित करके वस्तु N के सम्पर्क में रखते हैं। तथा फिर इस ताप को अत्यन्त धीरे-धीरे Tm तक बढ़ाएंगे। इस प्रक्रम में Q ऊष्मा-कुण्ड से वस्तु N में जाएगी जिससे उसका ताप बढ़कर Tm हो जाएगा ।
अतः वस्तु N की एण्ट्रॉपी में वृद्धि
∆S2 = \frac{Q}{T_{2m}}
यहां T2m तापों T2 तथा Tm का औसत मान है। अतः ऊष्मा-कुण्ड की एण्ट्रॉपी में इतनी कमी होगी और इस प्रकार विश्व की एण्ट्रॉपी अपरिवर्तित रहेगी।

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कुल निकाय की एण्ट्रॉपी में परिवर्तन

अतः निकाय की एण्ट्रॉपी में नेट परिवर्तन
∆S = ∆S2 – ∆S1 = \frac{Q}{T_{2m}} \frac{Q}{T_{1m}}
अथवा
∆S \cong \frac{Q}{T_2} \frac{Q}{T_1}
जोकि धनात्मक राशि है, क्योंकि T1 > T2 है। यह विचाराधीन उत्क्रमणीय प्रक्रम के कारण निकाय की एण्ट्रॉपी में वृद्धि है। अर्थात् इस उत्क्रमणीय प्रक्रम में ऊष्मा-कुण्ड की एण्ट्रॉपी में इतनी कमी होती है और इस प्रकार विश्व की एण्ट्रॉपी अपरिवर्तित रहती है।
अब हम पुनः वास्तविक अनुत्क्रमणीय प्रक्रम (ऊष्मा-चालन) पर विचार करते हैं। वास्तविक प्रक्रम के कारण भी निकाय की एण्ट्रॉपी में वृद्धि ∆S के बराबर होगी, अर्थात् अनुत्क्रमणीय प्रक्रम ऊष्मा-चालन से विश्व की एण्ट्रॉपी में वृद्धि होती है। इसी प्रकार हम देखते हैं कि अन्य अनुत्क्रमणीय प्रक्रमों में भी विश्व की एण्ट्रॉपी में वृद्धि होती है। चूंकि प्रकृति में होने वाले सभी प्रक्रम अनुत्क्रमणीय हैं। अतः हम कह सकते हैं कि सभी प्राकृतिक प्रक्रमों में एण्ट्रॉपी में वृद्धि होती है। “यही एण्ट्रॉपी वृद्धि का नियम कहलाता है।”

Note – सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं –
Q. 1 समझाइए कि सभी प्राकृतिक प्रक्रमों में एण्ट्रॉपी बढ़ती है ?
Q. 2 एण्ट्रॉपी वृद्धि का नियम क्या है ? तथा इसे सिद्ध कीजिए ?

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