यूलर के समीकरणों को सिद्ध करों | Euler’s equation of motion in Hindi

दृढ़ पिण्ड की गति के यूलर समीकरण

माना कि एक दृढ़ पिण्ड किसी एक निश्चित बिंदु के परितः एक बल आघूर्ण के अंतर्गत कोणीय वेग ω से घूर्णन गति कर रहा है न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार, जड़त्वीय निर्देश फ्रेम में

\overrightarrow{ι} = \frac{d\overrightarrow{J}}{dt} …..(1)

यहां \overrightarrow{J} जड़त्वीय फ्रेम में पिण्ड का कोणीय संवेग है। यदि पिण्ड में कोणीय वेग ω से घूमते अजड़त्वीय फ्रेम की कल्पना करें, तो घूर्णी फ्रेम में कोणीय संवेग परिवर्तन की दर तथा जड़त्वीय फ्रेम में कोणीय संवेग परिवर्तन की दर में निम्न संबंध होता हैं।

\frac{d\overrightarrow{J}}{dt} = \frac{d\overrightarrow{J}}{dt} + \overrightarrow{ω} × \overrightarrow{J} …..(2)

समीकरण 1 व 2 से,

\overrightarrow{ι} = \frac{d\overrightarrow{J}}{dt} + \overrightarrow{ω} × \overrightarrow{J} …..(3)

अब यदि मुख्य अक्षों के परितः पिण्ड के जड़त्व आघूर्ण I1, I2 व I3 है, तो कोणीय वेग के अवयव ω1, ω2 व ω3 है।

\overrightarrow{J} = \widehat{i} I1ω1 + \widehat{j} I2ω2 + \widehat{k} I3ω3

यदि वेक्टर समय के साथ अपरिवर्तित रहते हैं। अतः

\frac{d\overrightarrow{J}}{dt} = \widehat{i} I1ω1 + \widehat{j} I2ω2 + \widehat{k} I3ω3 ….(4)

समीकरण 3 से,

\overrightarrow{ι} = \widehat{i} I1ω1 + \widehat{j} I2ω2 + \widehat{k} I3ω3 + ( \widehat{i} ω1 + \widehat{j} ω2 + \widehat{k} ω3) × ( \widehat{i} I1ω1 + \widehat{j} I2ω2 + \widehat{k} I3ω3)
या
\overrightarrow{ι} = \widehat{i} (I1ω1 + I3ω2ω3 – I2ω2ω3) + \widehat{j} (I2ω2 + I1ω1ω3 – I3ω3ω1) + \widehat{k} (I3ω3 + I2ω2ω1 – I1ω1ω2)

अब यदि \overrightarrow{ι} = \widehat{i} ι1 + \widehat{j} ι2 + \widehat{k} ι3 तो मुख्य अक्षों के अनुदिश बल आघूर्ण के अवयव लेने पर,

T1 = I1ω1 + (I3 – I2) ω2ω3

T2 = I2ω2 + (I1 – I3) ω3ω1

T3 = I3ω3 + (I2 – I1) ω1ω2 ….(5)

अतः “उपर्युक्त समीकरण दृढ़ पिण्ड की गति के यूलर समीकरण कहलाते हैं।”

इसे भी पढ़ें.. दृढ़ पिण्ड क्या है

मुख्य जड़त्व आघूर्ण तथा मुख्य अक्षें

यदि किसी पिण्ड का किसी बिंदु के सापेक्ष कोणीय संवेग
\overrightarrow{J} = Σm [r2 \overrightarrow{ω} – ( \overrightarrow{r} . \overrightarrow{ω} ) \overrightarrow{r} ] .....(1)

अतः स्पष्ट है कि कोणीय संवेग \overrightarrow{J} तथा कोणीय वेग \overrightarrow{ω} एक ही दिशा में नहीं होते हैं। परन्तु प्रत्येक वस्तु के लिए चाहे उसकी आकृति कुछ भी क्यों ना हो, तीन परस्पर लम्बवत् अक्षें ऐसी होती हैं। जिनके परितः वस्तु को घुमाने पर उसका कोणीय संवेग, कोणीय वेग की दिशा में होता है। इन अक्षों को "मुख्य अक्षें" कहते हैं। तथा इन अक्षों के सापेक्ष वस्तु के जड़त्व आघूर्ण को "मुख्य जड़त्व आघूर्ण" कहते हैं।
इसे I1, I2 तथा I3 से प्रदर्शित करते हैं।
अतः किसी मुख्य अक्ष के परितः घूर्णन कर रही वस्तु के लिए

\overrightarrow{J} = I \overrightarrow{ω} .....(2)

यहां I एक अदिश राशि है। जो उस घूर्णन अक्ष के परितः वस्तु का जड़त्व आघूर्ण (I = Σmr2) है। तथा कार्तीय निर्देशांक पद्धति में मुख्य अक्ष के लिए
\widehat{i} Jx + \widehat{j} Jy + \widehat{k} Jz = I ( \widehat{i} ωx + \widehat{j} ωy + \widehat{k} ωz)
अर्थात्

Jx = Iωx, Jy = Iωy तथा Jz = Iωz

तथा अक्षों के कोणीय वेग \overrightarrow{ω} के अवयव

\overrightarrow{ω} = \widehat{i} ω1 + \widehat{j} ω2 + \widehat{k} ω3
तथा कोणीय संवेग

\footnotesize \boxed{ \overrightarrow{J} = \widehat{i} I_1ω_1 + \widehat{j} I_2ω_2 + \widehat{k} I_3ω_3 }

"यहां I1, I2 तथा I3 मुख्य जड़त्व आघूर्ण है।"

और पढ़ें... जड़त्व तथा जड़त्व आघूर्ण क्या है

और पढ़ें..घूर्णन गति के समीकरण

जड़त्व आघूर्ण के गुणन

घूर्णन कर रहे पिण्ड का कोणीय संवेग \overrightarrow{J} तथा कोणीय वेग \overrightarrow{ω} एक दिशा में नहीं होते हैं। कार्तीय निर्देशांक पद्धति में,

\overrightarrow{r} = \widehat{i} x + \widehat{j} y + \widehat{k} z

\overrightarrow{ω} = \widehat{i} ωx + \widehat{j} ωy + \widehat{k} ωz

\overrightarrow{J} = \widehat{i} Jx + \widehat{j} Jy + \widehat{k} Jz

समीकरण (1) से,
\overrightarrow{J} = Σm [r2 \overrightarrow{ω} - ( \overrightarrow{r} . \overrightarrow{ω} ) \overrightarrow{r} ] से,
या

\widehat{i} Jx + \widehat{j} Jy + \widehat{k} Jz = Σm [( \widehat{i} ωx + \widehat{j} ωy + \widehat{k} ωz)r2 - {( \widehat{i} x + \widehat{j} y + \widehat{k} z).( \widehat{i} ωx + \widehat{j} ωy + \widehat{k} ωz)} ( \widehat{i} x + \widehat{j} y + \widehat{k} z)]

= Σm \widehat{i} [(r2ωx) - (xωxy + zωz)x] + \widehat{j} [(r2ωy) - (xωx + yωy + zωz)] + \widehat{k} [(r2ωz) - (xωx + yωy + zωz)]
अतः
Jx = Σm [(r2ωx) - (xωxy + zωz)x]
या

Jx = ωxΣm (r2 - x2) - ωyΣmxy - ωzΣmxz
इसी प्रकार,

Jy = - ωxΣmxy + ωyΣm(r2 - y2) - ωzΣmy

Jz = - ωxΣmxz + ωyΣmyz + ωzΣm(r2 - z2) .....(4)

अब यदि,
Σm(r2 - x2) = Σm(y2 + z2) = Ixx

Σm(r2 - y2) = Σm(x2 + z2) = Iyy

Σm(r2 - z2) = Σm(x2 + y2) = I_zz

⇒ - Σmxy = Ixy, - Σmyz = Iyz = Izy, तथा - Σmzx = Ix = Ixy माने तो समीकरण (4) से,

Jx = Ixxωx + Ixyωy + Ixzωz

Jy = Iyxωx + Iyyωy + Iyzωz

Jz = Izxωx + Iyzωy + Izzωz ....(5)

यहां Ixx, Iyy तथा Izz क्रमशः X, Y तथा Z अक्षों के सापेक्ष पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण है। Ixy, Iyz, Izx,…. आदि को "जड़त्व का गुणन" कहते हैं।
क्योंकि इनके मान निर्देशांकों के गुणनफल पर निर्भर करते हैं।

Note - संबंधित प्रश्न
Q.1 यूलर समीकरण क्या है। सिद्ध करो कि मुख्य जड़त्व आघूर्ण तथा मुख्य अक्षों क्या है?
Q.2 जड़त्व आघूर्ण के गुणन को समझाइए?
Q.3 दृढ़ पिण्ड की गति के यूलर समीकरणों को स्थापित कीजिए?

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *