फीडबैक एम्पलीफायर क्या है, सिद्धांत, प्रकार, व्यंजक एवं लाभ | Feedback Amplifier in Hindi

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हेलो दोस्तों, इस आर्टिकल में हमनें ‘फीडबैक एम्पलीफायर’ के बारे में जानकारी दी है। इसमें हमनें फीडबैक एम्पलीफायर का सिद्धांत, प्रकार, फीडबैक सहित प्रवर्धक का वोल्टेज लाभ का व्यंजक, धनात्मक व ऋणात्मक फीडबैक की परिभाषा और उनके लाभों को भी विस्तार से सरल भाषा में समझाया है, तो आप इस अध्याय को पूरा जरूर पढ़ें। चलिए शुरू करते हैं।

फीडबैक (पुनर्निविष्ट) का सिद्धांत

किसी एम्पलीफायर से प्राप्त आउटपुट के एक भाग को इनपुट में प्रेषित किया जाए, तो यह प्रक्रिया “फीडबैक” (Feedback in Hindi) कहलाती है। इसका प्रभाव यह होगा कि फीडबैक डिवाइस का इनपुट इसके ही आउटपुट पर निर्भर करेगा। अतः इस प्रणाली को ‘बंद लूप नियन्त्रण प्रणाली’ भी कहते हैं। इनपुट वोल्टेज (अथवा धारा) का मान लगाए गए इनपुट वोल्टेज (अथवा धारा) व फीडबैक वोल्टेज का वेक्टर योग होगा।

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फीडबैक एम्पलीफायर का सिद्धांत क्या है?

किसी निर्गत ऊर्जा के एक अंश को निवेशी उर्जा के पुनर्निविष्ट करने के प्रक्रम को ही “प्रवर्धक में फीडबैक” कहते हैं। तथा ऐसे प्रवर्धकों को जिनमें फीडबैक (पुनर्निविष्ट) होता है, तो वह “फीडबैक एम्पलीफायर” (feedback amplifier in Hindi) कहलाते हैं। पुनर्निविष्ट (फीडबैक) ऊर्जा निवेशी ऊर्जा के लिए सहायक या विपरीत होती है। तथा इसके आधार पर फीडबैक के प्रकार दो होते हैं।

फीडबैक एम्पलीफायर के प्रकार

फीडबैक (पुनर्निविष्ट) एम्पलीफायर के आधार पर इसके दो प्रकार होते हैं, जो इस प्रकार हैं –
(1). धनात्मक फीडबैक (Positive Feedback in Hindi) व
(2). ऋणात्मक फीडबैक (Negative Feedback in Hindi)।

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धनात्मक फीडबैक (positive feedback in Hindi)

यदि जब फीडबैक वोल्टेज (अथवा धारा) निवेशी सिग्नल वोल्टेज की समान कला में होती है तब निवेशी सिग्नल वोल्टेज की शक्ति बढ़ जाती है, जिससे वोल्टेज लाभ का मान भी बढ़ जाता है। तब इस प्रकार, के फीडबैक को “धनात्मक फीडबैक” या “पुनरूत्पादक फीडबैक” कहते हैं।

यद्यपि धनात्मक फीडबैक वोल्टेज लाभ बढ़ता है, परन्तु दूसरी और यह शोर, विकृति अस्थायित्व भी बढ़ाता है। अतः सामान्यतः इसे प्रवर्धकों में प्रयुक्त नहीं करते हैं, जबकि दोलित्र बनाने में धनात्मक फीडबैक का ही प्रयुक्त होता है।

ऋणात्मक फीडबैक (negative feedback in Hindi)

यदि जब फीडबैक वोल्टेज (अथवा धारा) व निवेशी सिग्नल वोल्टेज की कला में 180° का कलान्तर होता है तब फीडबैक वोल्टेज के कारण निवेशी सिग्नल वोल्टेज की शक्ति घट जाती है, जिससे वोल्टेज लाभ भी घट जाता है। इस प्रकार के फीडबैक को “ऋणात्मक फीडबैक” या “अधोपतित फीडबैक” कहते हैं।

यद्यपि ऋणात्मक फीडबैक प्रवर्धक का वोल्टेज लाभ घटता है, परन्तु दूसरी ओर यह शोर व विकृति को कम करता है। तथा स्थायित्व को बढ़ाता है। इन सभी गुणों के कारण प्रवर्धकों में ऋणात्मक फीडबैक अधिकता आरोपित की जाती है।

प्रवर्धक का फीडबैक के साथ प्रवर्धन (gain of an Amplifier with feedback in Hindi)

फीडबैक के साथ प्रवर्धक का वोल्टेज लाभ निम्न चित्र-1 में फीडबैक एम्पलीफायर का खंड आरेख दिखाया गया है।

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फीडबैक एम्पलीफायर

जैसा कि चित्र-1 में दर्शाया गया है कि इनपुट सिगनल में वोल्टेज eg लगाया जाता है। माना प्रवर्धक के आउटपुट का विभव वोल्टेज e0 है। और माना कि इसका एक भाग βe0 इनपुट को दिया गया है, जिससे प्रवर्धक इनपुट सिग्नल e’g का मान निम्न होगा।
e’g = eg + βe0 …(1)
माना यदि फीडबैक की अनुपस्थिति में प्रवर्धक का वोल्टेज लाभ ‘A’ है, तब प्रवर्धक का आउटपुट वोल्टेज होगा।
e0 = A.e’g या e0 = A.(eg + βe0) …(2)
अतः फीडबैक के पश्चात प्रवर्धक का वोल्टेज लाभ (Afb) आउटपुट व इनपुट वोल्टेज की निष्पत्ति होगी, अर्थात्
Afb = \frac{e_0}{e_g} …(3)
तथा समीकरण (2) से,
e0 = Aeg + Aβe0
या e0 – Aβe0 = Aeg
या e0(1 – Aβ) = Aeg
या \frac{e_0}{e_g} = \frac{A}{1 - Aβ}
यह मान समीकरण (3) में रखने पर,
\footnotesize \boxed{ A_{fb} = \frac{A}{1 - Aβ} } …(4)
अतः स्पष्ट है कि फीडबैक के कारण वोल्टेज लाभ ‘A’ का मान बदल कर \frac{A}{1 - Aβ} हो जाता है।

नोट – विद्यार्थी ध्यान दें कि समीकरण (4) से निम्न निष्कर्ष प्राप्त होते हैं –

(i). यदि जब |1 – Aβ| < 1 हो, तब Afb > A; अर्थात् फीडबैक धनात्मक होगा।
(ii). यदि जब |1 – Aβ| > 1 हो, तब Afb < A; अर्थात् फीडबैक ऋणात्मक होगा।
(iii). यदि जब |1 – Aβ| = 0 हो, तब Afb = ∞; यह परिपथ में दोलन उत्पन्न होने की दशा है। अर्थात् परिपथ दोलित्र की भांति कार्य करने लगेगा।

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धनात्मक फीडबैक के लाभ (advantages of positive feedback in Hindi)

  1. धनात्मक फीडबैक की सहायता से वोल्टेज लाभ बढ़ता है
  2. धनात्मक फीडबैक का प्रयोग दोलित्र परिपथ में किया जाता है।

ऋणात्मक फीडबैक के लाभ (advantages of negative feedback in Hindi)

  1. ऋणात्मक फीडबैक के कारण आयाम विकृति घट जाती है।
  2. ऋणात्मक फीडबैक के कारण आवर्ती विकृति घट जाती है।
  3. ऋणात्मक फीडबैक के कारण प्रवर्धक का स्थायित्व बढ़ जाता है।
  4. ऋणात्मक फीडबैक के कारण शोर कम हो जाता है।
  5. ऋणात्मक फीडबैक के कारण प्रवर्धक की बैण्ड चौड़ाई बढ़ जाती है।

Note – सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 फीडबैक (पुनर्निविष्ट) का क्या सिद्धांत है? धनात्मक व ऋणात्मक फीडबैक क्या होते हैं? किसी प्रवर्धक के लिए फीडबैक की अवस्था में प्रवर्धन हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए। धनात्मक तथा ऋणात्मक फीडबैक के लाभ बताइए।
Q.2 फीडबैक एम्पलीफायर का सिद्धांत क्या है? इसके कितने प्रकार हैं तथा उनकी परिभाषा और लाभों का उल्लेख कीजिए।

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
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