फर्मी ऊर्जा स्तर क्या है, शुद्ध अर्द्ध-चालक में यह चालन बैंड व संयोजी बैंड के बीच स्थित होता है? क्यों | Fermi Energy Level in Hindi

फर्मी ऊर्जा स्तर क्या है

परम शून्य से अधिक सब तापों पर वह ऊर्जा स्तर जहां किसी ताप T पर फर्मी ऊर्जा वह ऊर्जा होती है जिसके संगत किसी अवस्था में इलेक्ट्रॉनों के होने की प्रायिकता 1/2 होती है, फर्मी ऊर्जा स्तर (Fermi Energy Level in Hindi) कहलाता है। इसे EF से दर्शाते हैं। अर्थात् परम शून्य ताप पर फर्मी ऊर्जा EF से ऊपर के सभी ऊर्जा स्तर पूर्णतः रिक्त होते हैं तथा फर्मी ऊर्जा EF से नीचे के सभी ऊर्जा स्तर इलेक्ट्रॉनों द्वारा पूर्णतः भरे होते हैं। स्पष्टतः “फर्मी ऊर्जा EF परम शून्य ताप (T = 0k) पर इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम सम्भव ऊर्जा है।”

Note – दिखाइए कि किसी शुद्ध अर्द्धचालक में फर्मी ऊर्जा-स्तर चालन बैण्ड व संयोजी बैण्ड के ठीक बीच में स्थित होता है?

शुद्ध अर्द्ध-चालक में फर्मी ऊर्जा स्तर

चूंकि हम जानते हैं कि अर्द्ध-चालक में इलेक्ट्रॉन फर्मी-डिराक सांख्यिकी का पालन करते हैं। यदि निकाय में इलेक्ट्रॉन की कुल संख्या नियत है तथा निकाय की कुल ऊर्जा नियत है तो फर्मी डिराक सांख्यिकी के अनुसार फर्मी फलन निम्न प्रकार परिभाषित किया जा सकता है।

f(E) = \frac{1}{1 + e^{(E - E_F)/kT}} …(1)

यहां EF फर्मी-स्तर की ऊर्जा है, k वोल्ट्जमान नियतांक है तथा T परम ताप है। फर्मी फलन f(E), परम ताप T पर किसी ऊर्जा-स्तर E के इलेक्ट्रॉनों द्वारा भरे होने की प्रायिकता को बताता है। इसका मान 0 से 1 के बीच होता है तथा यह मान ऊर्जा E व ताप T पर निर्भर करता है।
परम शून्य ताप T = 0k पर,
(1). यदि E > EF हो तो
f(E) = 1/(1 + e) = 1/(1 + ∞) = 0
(2). यदि E < EF हो तो
f(E) = 1/(1 + e-∞) = 1/(1 + 0) = 1

स्पष्टतः परम शून्य ताप पर फर्मी ऊर्जा EF से ऊपर के सभी ऊर्जा-स्तर पूर्णतः खाली होते हैं जबकि EF से नीचे के सभी ऊर्जा-स्तर इलेक्ट्रॉनों द्वारा पूर्णतः भरे होते हैं। अतः स्पष्ट है कि फर्मी ऊर्जा EF परम शून्य ताप पर इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम सम्भव ऊर्जा है।
अतः किसी अन्य ताप T >> 0k पर,
(3). यदि E = EF हो तो
f(E) = 1/(1 + e0) = 1/(1 + 1) = 1/2

अतः किसी ताप T पर फर्मी ऊर्जा वह ऊर्जा है जिसके संगत किसी अवस्था में इलेक्ट्रॉनों के होने की प्रायिकता 1/2 होती है।

शुद्ध अर्द्ध-चालक में फर्मी ऊर्जा स्तर
शुद्ध अर्द्ध-चालक में फर्मी ऊर्जा स्तर

जैसा कि चित्र-1 में फर्मी फलन f(E) का ऊर्जा वितरण दिखाया गया है। इस वितरण से स्पष्ट होता है कि फर्मी स्तर Ec व Ev के बीच वर्जित ऊर्जा अन्तराल Eg में होना चाहिए।
यदि चालन बैण्ड में फर्मी फलन f(Ec) तथा संयोजी बैण्ड में फर्मी फलन f(Ev) हो तो समीकरण (1) से,
f(Ec) = \frac{1}{1 + e^{(E_c - E_F)/kT}} …(2)
और f(Ev) = \frac{1}{1 + e^{(E_v - E_F)/kT}} …(3)

हम जानते हैं कि किसी ऊर्जा अवस्था में चालन बैण्ड में इलेक्ट्रॉन के होने की प्रायिकता तथा संयोजी बैण्ड में होल (कोटर) के होने की प्रायिकता का योग सदैव 1 होता है। अतः
f(Ec) + f(Ev) = 1
या f(Ec) = 1 – f(Ev) …(4)
समीकरण (2) व (3) से f(Ec) तथा fEv) के मान समीकरण (4) में रखने पर,
\frac{1}{1 + e^{(E_c - E_F)/kT}} = 1 – \frac{1}{1 + e^{(E_v - E_F)/kT}}
या \frac{1}{1 + e^{(E_c - E_F)/kT}} = \frac{1 + e^{(E_v - E_F)/kT} - 1}{1 + e^{(E_v - E_F)/kT}}
या \frac{1}{1 + e^{(E_c - E_F)/kT}} = \frac{e^{(E_v - E_F)/kT}}{1 + e^{(E_v - E_F)/kT}} …(5)

सामान्य तापों पर, Ec – EF >> kT
\frac{E_c - E_F}{kT} >> 1
या e(Ec – EF)/kT >> 1
अतः स्पष्ट है कि , 1 + e(Ec – EF)/kT ≈ e(Ec – EF)/kT
तथा इसी प्रकार, Ev – EF << kT
\frac{E_v - E_F}{kT} << 1
या e(Ev – EF)/kT << 1
स्पष्टतः 1 + e(Ev – EF)/kT ≈ 1
तब समीकरण (5) से,
\frac{1}{e^{(E_c - E_F)/kT}} ≈ e(Ev – EF)/kT
या \frac{E_c - E_F}{kT} \frac{E_v - E_F}{kT}
या Ec – EF = Ev – EF
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ E_F = \frac{E_v - E_F}{2} } …(6)
यदि Ev को शून्य ऊर्जा स्तर मानें तो EF = \frac{1}{2} Eg ,
अतः “शुद्ध अर्द्ध-चालक में फर्मी ऊर्जा स्तर EF, चालन बैण्ड Ec व संयोजी बैण्ड Ev अथवा वर्जित ऊर्जा अन्तराल Eg के ठीक मध्य में होता है।”

नोट – विद्यार्थी ध्यान दें कि फर्मी ऊर्जा तथा फर्मी स्तर ये दोनों अलग-अलग होते हैं तथा इनकी परिभाषांए इस प्रकार हैं।

फर्मी ऊर्जा (Fermi Energy in Hindi)

परम शून्य ताप (T = 0k) पर किसी अर्द्ध-चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम ऊर्जा को फर्मी ऊर्जा कहते हैं।

फर्मी स्तर (Fermi Level in Hindi)

यह चालन बैण्ड व संयोजकता बैण्ड के मध्य का ऊर्जा स्तर है जहां इलेक्ट्रॉन के पाये जाने की सम्भावना 50% हो, फर्मी स्तर कहते हैं। अर्थात् फर्मी स्तर वह ऊर्जा स्तर है जिसके ऊपर चालन बैण्ड तथा जिसके नीचे संयोजी बैण्ड होता है।

Read More –

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *