फिल्टर परिपथ क्या हैं किन्ही चार फिल्टरों और उनके उपयोगों की व्याख्या करें? | Filter Circuits in Hindi

फिल्टर परिपथ से आप क्या समझते हैं? – इस अध्याय में हम फिल्टर परिपथ के बारे में विस्तार से सरल भाषा में अध्ययन करेंगे। और इसमें हम फिल्टर परिपथ के प्रकारों के बारे में भी विस्तार से समझेंगे।

इसे भी पढ़ें… दिष्टकारी क्या है? अर्ध तरंग दिष्टकारी की कार्यविधि, दक्षता व ऊर्मिका गुणांक की गणना कीजिए।

फिल्टर परिपथ क्या है

किसी दिष्टकारी के निर्गत से प्राप्त वोल्टेज (अथवा धारा) एक ही दिशा में होता है, परन्तु यह सीधा न होकर उतार-चढ़ाव लिए स्पन्द मान भी होता है। अतः इसे प्रत्यावर्ती घटकों से अध्यारोपित दिष्टधारा वोल्टेज माना जा सकता है। इन प्रत्यावर्ती घटकों को ऊर्मिका कहा जाता है। अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में शुद्ध दिष्टधारा की आवश्यकता होती है जो कि ऊर्मिकाओं से मुक्त हो। अतः इसे दिष्टकारी व लोड प्रतिरोध R के मध्य एक अतिरिक्त वैद्युत परिपथ जोड़कर इस उद्देश्य को प्राप्त किया जाता है। यह अतिरिक्त परिपथ ‘फिल्टर’ (filter in Hindi) कहलाता है।

अर्थात् “एक ऐसा परिपथ जो दिष्टकारी के निर्गत वोल्टेज (अथवा धारा) से ऊर्मिकाओं को न्यूनतम करता है, ‘फिल्टर परिपथ’ (filter circuits in Hindi) कहलाता है।” स्पष्टतः फिल्टर परिपथ ऊर्मिकाओं को दिष्टधारा से पृथक् कर देता है और इस प्रकार, निर्गत प्रत्यावर्ती घटक न्यूनतम रह जाते हैं तथा लगभग स्थिर दिष्टधारा वोल्टेज प्राप्त हो जाता है।

पढ़ें… पूर्ण तरंग दिष्टकारी की कार्यविधि, दक्षता व ऊर्मिका गुणांक की गणना कीजिए?

फिल्टर परिपथ के प्रकार

निर्गत प्रत्यावर्ती धारा (अथवा वोल्टेज) में ऊर्मिकाओं को कम करने के लिए अनेक प्रकार के फिल्टर परिपथों का प्रयोग किया जाता है। इसमें मुख्यतः निम्नलिखित चार प्रकार के फिल्टर परिपथ उपयोग में लाए जाते हैं-
(1). श्रेणी-प्रेरकत्व फिल्टर (series inductor filter),
(2). शण्ट-संधारित्र फिल्टर (shunt capacitor filter),
(3). L-सेक्शन फिल्टर (L-section filter) तथा
(4). π-सेक्शन फिल्टर (π-section filter) ।

1. श्रेणी प्रेरकत्व फिल्टर क्या है

किसी दिष्टकारी अथवा लोड प्रतिरोध R के श्रेणी-क्रम में एक प्रेरकत्व L को मिलाकर भी ऊर्मिकाओं को कम कर सकते हैं। जैसा कि चित्र-1 में दिखाया गया है।

और पढ़ें… LCR श्रेणी परिपथ क्या है?, प्रेरकत्व तथा प्रतिरोध द्वारा संधारित्र का विसर्जन ज्ञात कीजिए।

श्रेणी प्रेरकत्व फिल्टर
चित्र-1. श्रेणी प्रेरकत्व फिल्टर

एक श्रेणी प्रेरकत्व फिल्टर का कार्य प्रेरकत्व के इस साधारण गुणों पर भी निर्भर करता है जो ये स्वयं से बहने वाली धारा में किसी भी परिवर्तन का विरोध करता है। यदि जब धारा अपने औसत मान की ओर बढ़ती है, तो प्रेरकत्व L अपने चुम्बकीय क्षेत्र में ऊर्जा का चालन करता है और जब धारा अपने औसत मान से नीचे की ओर गिरती है तब यह परिपथ को ऊर्जा प्रदान करता है। अतः इस प्रकार यह दिष्टकारी की निर्गत धारा के स्पन्द को कम कर देता है।

2. शण्ट संधारित्र फिल्टर क्या है

ये सबसे आसान फिल्टर है इसको एक संधारित्र से दिष्टकारी के निर्गत धारा अथवा लोड प्रतिरोध R के मध्य समान्तर क्रम में जोड़कर प्राप्त किया जा सकता है। जैसा कि चित्र-2 में दिखाया गया है।

शण्ट संधारित्र फिल्टर
चित्र-2. शण्ट संधारित्र फिल्टर

ये विधि दिष्टकारी के निर्गत में प्रत्यावर्ती घटकों को कम करने की एक प्रभावी विधि मानी जाती है। अर्थात् जिसकी प्रत्यावर्ती धारा परिपथ आवृत्ति पर प्रतिघात 1/ωC, लोड प्रतिरोध R की तुलना में बहुत कम हो, तो प्रत्यावर्ती घटक संधारित्र से होकर प्रतिघात का शण्ट (या पार्श्व) पथ प्राप्त कर लेता है और इससे होकर गुजर जाता है। अतः इस प्रकार लोड प्रतिरोध R से बहने वाले प्रत्यावर्ती घटक अथवा ऊर्मिकाएं कम हो जाती हैं। अर्थात् निर्गत से ऊर्मिकाएं फिल्टर हो जाती हैं।

नोट – चित्र-1 में संधारित्र की अनुपस्थिति में स्पन्दित निर्गत वोल्टेज को प्रदर्शित करता है और चित्र-2 संधारित्र की फिल्टर क्रियाओं को प्रदर्शित करता है।

3. L-सेक्शन फिल्टर या प्रेरकत्व निवेशी फिल्टर क्या है

विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक सर्किटों में न तो शण्ट संधारित्र फिल्टर और न ही श्रेणी प्रेरकत्व फिल्टर कम मात्रा में ऊर्मिका गुणांक की आवश्यकता को पूरा नहीं कर पाते हैं। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए श्रेणी प्रेरकत्व तथा शण्ट संधारित्र को एक-साथ प्रयोग में लाया जाता है। अतः इसे “L-खण्ड फिल्टर या प्रेरकत्व (अथवा चोक) निवेशी फिल्टर” कहते हैं। इसका परिपथ आरेख चित्र-3 में दर्शाया गया है।

L-सेक्शन फिल्टर
चित्र-3. L-सेक्शन फिल्टर

अतः इसमें श्रेणी प्रेरकत्व (L) दिष्टकारी के निर्गत धारा से दिष्ट अवयव को आसानी से जाने देता है लेकिन प्रत्यवर्ती अवयवों के मार्ग में उच्च प्रतिबाधा (XL = ωL) उत्पन्न होने के कारण रोक देता है। यदि प्रत्यावर्ती घटकों का आंशिक भाग जो घटक L से होकर गुजरने के पश्चात भी शेष रह जाते है, तो वह संधारित्र C के उपमार्ग द्वारा वापस हो जाते है। अर्थात् वे लोड प्रतिरोध R में नहीं जा पाते हैं। क्योंकि संधारित्र प्रत्यावर्ती धारा अवयवों के लिए बहुत ही निम्न प्रतिबाधा (XC = 1/ωC) उत्पन्न करता है जबकि दिष्टधारा अवयवों को अपने में से होकर गुजरने नहीं देता है।

अतः इस प्रकार लोड प्रतिरोध R में जाने वाली धारा में प्रत्यावर्ती अवयवों की मात्रा बहुत निम्न अर्थात् ऊर्मिका गुणांक भी निम्न होता है। तथा यह धारा लगभग स्थिर होती है। अर्थात् अधिकतम वोल्टेज-पतन को छोड़कर प्रेरकत्व (या चोक) निवेशी फिल्टर से प्राप्त दिष्ट वोल्टेज लोड प्रतिरोध में प्रत्यावर्ती धारा के अनेक मानों के लिए एक-समान रहती है।
इस प्रकार, “L-सेक्शन फिल्टर का वोल्टेज नियन्त्रण काफी अधिक अच्छा होता है।”

4. π-सेक्शन फिल्टर या संधारित्र निवेशी फिल्टर क्या है

यदि जब उच्च लोड प्रतिरोध R पर उच्च निर्गत वोल्टेज की आवश्यकता होती है तो L-सेक्शन फिल्टर के निवेशों में एक संधारित्र लगाया जाता है जिससे π-सेक्शन फिल्टर का निर्माण होता है। π-फिल्टर दो संधारित्रों C1 व C2 से बना होता है जिनके बीच एक प्रेरकत्व L जुड़ा होता है। जैसा कि चित्र-4 में दिखाया गया है।

π-सेक्शन फिल्टर
चित्र-4. π-सेक्शन फिल्टर

चित्र ग्रीक अक्षर π जैसी आकृति होने के कारण इसे “π-सेक्शन फिल्टर” कहते हैं। चूॅंकि इसमें दिष्टकारी संधारित्र को सीधे भरण करता है अतः इसे ‘संधारित्र निवेशी फिल्टर’ भी कहते हैं। अर्थात् प्रत्येक चालन अन्तराल में संधारित्र C1 लगभग दिष्ट निर्गत विभव के शिखर मान तक आवेशित होता है जो दो उत्तरोत्तर आवेशन प्रक्रियाओं के मध्य संधारित्र C1, L-फिल्टर तथा लोड प्रतिरोध R से चरघातांकी रूप से शिखर मान के लगभग निकट विभव तक विसर्जित होता है। प्रेरकत्व L के अतिरिक्त उच्च वचनों का विरोध करता है। शेष उच्च वचन संधारित्र C2 द्वारा भूसम्पर्कित कर दिये जाते हैं।

इस प्रकार π-सेक्शन फिल्टर लोड प्रतिरोध R पर नगण्य ऊर्मिका युक्त दिष्ट विभव प्रदान करता है। π-फिल्टर में ऊर्मिका गुणांक लोड प्रतिरोध R के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात् निम्न लोड प्रतिरोध पर ऊर्मिका गुणांक का मान अधिक होता है। ऊर्मिका गुणांक को निम्न करने के लिए एक से अधिक π-सेक्शन फिल्टर भी प्रयुक्त किए जा सकते हैं।

नोट – विद्यार्थी ध्यान दें कि L-सेक्शन फिल्टर में वोल्टेज-नियन्त्रण, π-सेक्शन फिल्टर की तुलना में श्रेष्ठ होता है। अतः L-सेक्शन फिल्टर अधिक उपयोगी है।

Note – फिल्टर परिपथ से सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 फिल्टर परिपथ क्या है? इसके प्रकार लिखिए। π-सेक्शन फिल्टर की तुलना में L-सेक्शन फिल्टर किस प्रकार अच्छा होता है?
Q.2 π-सेक्शन फिल्टर या संधारित्र निवेशी फिल्टर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए?
Q.3 L-सेक्शन फिल्टर या चोक निवेशी फिल्टर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए?

Read More –

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *