निर्देश फ्रेम क्या है, जड़त्वीय तथा अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र | Frame of Reference in Hindi

निर्देश फ्रेम की परिभाषा

हम जानते हैं कि यदि हम किसी वस्तु की गति के बारे में बताना चाहे तो हमे यह ज्ञात होना चाहिए कि यह गति किसके सापेक्ष मापी गयी है।
अतः वह तंत्र जिसके सापेक्ष हम किसी वस्तु की गति का वर्णन करते हैं तो वह उस वस्तु का “निर्देश तंत्र या निर्देश फ्रेम” कहलाता है।
निर्देश फ्रेम को किसी दृढ़ वस्तु से जुड़ा हुआ मान सकते हैं। और तब उसके सापेक्ष अन्य वस्तुओं की स्थिति का पता लगाते हैं। वस्तुओं की स्थिति निश्चित करने के लिए किसी उचित बिंदु से स्थिति सदिश खींचे जाते हैं। इस बिंदु को निर्देश फ्रेम का मूलबिंदु कहते हैं।

निर्देश फ्रेम
निर्देश फ्रेम

सबसे सरल निर्देश फ्रेम कार्तिय निर्देशांक तंत्र होता हैं। इस फ्रेम में कण की स्थिति उसके पथ के किसी बिंदु पर निर्देशांक (x, y, z) द्वारा या स्थिति सदिश \overrightarrow{r} द्वारा प्रदर्शित की जाती हैं। बिंदु O(x = y = z = 0) पर किसी समय t पर कण p की स्थिति निम्न प्रकार दी जाती हैं। –
\overrightarrow{r} = \widehat{i} x + \widehat{j} y + \widehat{k} z

स्थिति सदिश \overrightarrow{r} समय t के फंक्शन के रूप में व्यक्त की जाती है-
अतः कण का वेग \overrightarrow{V} = \frac{d\overrightarrow{r}}{dt} और त्वरण \overrightarrow{a} = \frac{d\overrightarrow{v}}{dt} = \frac{d^2\overrightarrow{r}}{dt^2}
किसी घटना की स्थिति का पता लगाने के लिए हमें उसकी स्थिति और घटना के घटने का समय के ज्ञान की आवश्यकता होती है। अतः इस काम के लिए चार निर्देशांकों (x, y, z, t) को प्रयोग में लाया जाता है। इस निर्देशांक तंत्र को दिक् काल निर्देश तंत्र कहते हैं।

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निर्देश तन्त्र के प्रकार

जड़त्व के नियम अथवा न्यूटन के गति के प्रथम नियम के आधार पर निर्देश फ्रेम (तंत्र) निम्न दो प्रकार के होते है।

  1. जङत्वीय निर्देश तंत्र
  2. अजङत्वीय निर्देश तंत्र

जङत्वीय निर्देश तंत्र

जो निर्देश तंत्र न्यूटन के पहले और दूसरे नियमों का पालन करते हैं वे निर्देश फ्रेम जड़त्वीय निर्देश तंत्र (Inertial Frames of Reference in Hindi) कहलाते हैं। इस तंत्र के फ्रेमों में यदि किसी वस्तु पर कोई बाहरी बल कार्य ना कर रहा हो तो वह या तो स्थिर रहती है। अथवा समान गति से एक सरल रेखा में गति करती रहती है। यह जड़त्व का नियम है। और इसी कारण इस प्रकार के निर्देश फ्रेमों को जङत्वीय निर्देश फ्रेम कहा जाता है।
माना कि किसी वस्तु पर बाह्य बल कार्य नहीं कर रहा है, तब
\small \overrightarrow{F} = m \overrightarrow{a} = 0
अर्थात् त्वरण \overrightarrow{a} = \frac{d^2\overrightarrow{r}}{dt^2} = 0

कार्तीय निर्देशांको में \frac{dx^2}{dt^2} = 0
\frac{dy^2}{dt^2} = 0
\frac{dz^2}{dt^2} = 0
अर्थात् \frac{dx}{dt} = ux (नियतांक)
\frac{dy}{dt} = uy (नियतांक)
\frac{dz}{dt} = uz (नियतांक)
अतः इस प्रकार के फ्रेमों में किसी वस्तु का वेग स्थिर रहता है। क्योंकि जड़त्व के नियम को सर्वप्रथम गैलीलियों ने बताया था। इसलिए इसे गैलीलियो के निर्देश तंत्र (Galilean Frames of Reference in Hindi) भी कहते हैं।

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जङत्वीय निर्देश तंत्र उदाहरण

स्थिर निर्देश फ्रेम, कार्तीय निर्देशांक निकाय, गोलीय ध्रुवीय निर्देशांक निकाय, दूर स्थित तारे आदि।

अजङत्वीय निर्देश तंत्र

जिन निर्देश फ्रेमों में न्यूटन के प्रथम तथा द्वितीय नियम लागू नहीं होते, उन्हें अजड़त्वीय निर्देश तंत्र (Non Inertial Frames of Reference in Hindi) कहते हैं। सभी त्वरित वा घूमते हुए निर्देश फ्रेम अजङत्वीय निर्देश फ्रेम होते हैं।

अजङत्वीय निर्देश तंत्र
अजङत्वीय निर्देश तंत्र

माना कि N एक जङत्वीय निर्देश फ्रेम है तथा N’ एक त्वरित फ्रेम है तथा फ्रेम N’ फ्रेम N के सापेक्ष \overrightarrow{a} त्वरण से चल रहा है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

अजङत्वीय निर्देश तंत्र के उदाहरण

त्वरित निर्देश फ्रेम, घूर्णी निर्देश फ्रेम, सूर्य, पृथ्वी, आकाश, गंगा आदि।

और पढ़ें.. आभासीय छद्म बल क्या हैं, व्याख्या तथा उदाहरण

Note – क्या पृथ्वी एक जड़त्वीय निर्देश तन्त्र हैं ? कारण सहित बताइए ।

पृथ्वी कौन-सा निर्देश तंत्र है

पृथ्वी एक निर्देश फ्रेम है। इसमें दो प्रकार की कोणीय गतियाॅं होती है अतः दो प्रकार के त्वरण कार्य करते हैं। इसलिए पृथ्वी जड़त्वीय निर्देश फ्रेम नहीं है। “पृथ्वी एक अजड़त्वीय निर्देश फ्रेम” (Earth a Non-inertial Frames of Reference in Hindi) हैं।
अर्थात् पृथ्वी अपनी अक्ष के परितः घूमने वाला एक गोला है और घूर्णन के कारण इसमें अभिकेन्द्रीय त्वरण होता है। इस प्रकार पृथ्वी से जुड़ा कोई भी निर्देश तन्त्र एक अजङत्वीय निर्देश तन्त्र होगा ।

अजड़त्वीय तन्त्र होने का “कारण (Reasons in Hindi)”

पृथ्वी में निम्न दो प्रकार की कोणीय गतियाॅं होती हैं।
(1).चक्रण गति – पृथ्वी अपनी अक्ष के परितः चक्रण गति करती है। और 24 घण्टे में एक पूरा चक्कर लगाती है।
T = 24 घण्टे = 24 × 60 × 60 सेकण्ड = 86400 सेकण्ड
अतः पृथ्वी की त्रिज्या R = 6400 किमी.
या R = 64 × 105 मीटर
तब
अभिकेन्द्र त्वरण a1 = \frac{v^2}{R} = \frac{(Rω)^2}{R}
या a1 = ω2R = ( \frac{2π}{T} )2 [/latex] R
या a1 = \frac{4π^2R}{T^2}
a1 = \frac{4×(3.14)^2×64×10^5}{(86400)^2}
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ a_1 = 3.4 × 10^{-2} } मी/से2.

(2).कक्षीय गति – पृथ्वी, सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है और लगभग 365 दिन में एक चक्कर पूर्ण करती है। इसकी कक्षा की औसत त्रिज्या 1.5 × 104 होती है। अतः
अभिकेन्द्र त्वरण a2 = \frac{4π^2r}{T^2}
या a2 = \frac{4×(3.14)^2×1.5×10^4}{(365×24×60×60)^2}
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ a_2 = 4.4 × 10^{-3} } मी/से2.

अर्थात् स्पष्ट है कि पृथ्वी त्वरित निर्देश फ्रेम है। अतः पृथ्वी अजड़त्वीय निर्देश फ्रेम है।

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Note – निर्देश फ्रेम सम्बन्धित प्रश्न

Q.1 निर्देश फ्रेम से आप क्या समझते हैं? जड़त्वीय तथा अजड़त्वीय निर्देश फ्रेम को समझाइए।
Q.2 निर्देश तंत्र से आप क्या समझते हैं? जङत्वीय तथा अजड़त्वीय निर्देश फ्रेम को उदाहरण सहित समझाइए?
Q.3 निर्देश फ्रेम से आप क्या समझते हैं? इनका वर्गीकरण कीजिए?

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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