आदर्श P-N संधि डायोड क्या है, इसके प्रतिरोधों को परिभाषित कीजिए | Ideal P-N Junction Diode in Hindi

आदर्श P-N संधि डायोड

यह एक ऐसी युक्ति है जो अग्र अभिनति में पूर्ण सुचालक तथा पश्च अभिनति में पूर्ण कुचालक की भाॅंति व्यवहार करती है, तो यह “आदर्श P-N संधि डायोड (ideal p-n junction diode in Hindi)” कहलाती है। स्पष्टतः आदर्श P-N संधि डायोड में धारा एक दिशा में प्रवाहित होती है इसलिए इसे एक-दिशात्मक युक्ति भी कहते हैं।

आदर्श P-N संधि डायोड के प्रतिरोध

आदर्श P-N संधि डायोड के प्रतिरोधों को निम्न दो भागों में परिभाषित किया जा सकता है।

डायोड का स्थैतिक अथवा D.C. प्रतिरोध

अग्र अभिनति में सन्धि डायोड पर आरोपित विभव तथा उसके संगत प्राप्त धारा की निष्पत्ति को उसका स्थैतिक या D.C. प्रतिरोध कहते हैं। अर्थात्
RDC = \frac{v}{i}
स्पष्टतः स्थैतिक प्रतिरोध RDC का मान v तथा i के साथ शीघ्रता से बदलता है।

और पढ़ें.. P-N संधि डायोड समीकरण क्या है?, परिभाषा, सूत्र तथा इसका निगमन कीजिए।

डायोड का गतिज अथवा A.C. प्रतिरोध

अग्र अभिनति में डायोड के अभिलाक्षणिक वक्र के ढाल के व्युत्क्रम को डायोड का गतिज या A.C. प्रतिरोध कहते हैं। अर्थात्
RAC = \frac{dv}{di}
क्योंकि सामान्य ताप पर T = 300k पर, i = is[e(39V/η) – 1]
और अग्र अभिनति में, e(39V/η) >> 1
अतः इस स्थिति में डायोड धारा i = ise(39V/η) तो
RAC = \frac{dv}{di}
या RAC = \frac{η}{39i}

यदि धारा i मिली-ऐम्पियर में तथा A.C. प्रतिरोध RAC ओम में हो, तो
RAC = \frac{η × 10^3}{39i} ओम।

Note – आदर्श P-N संधि डायोड से सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 आदर्श P-N संधि डायोड से आप क्या समझते हैं? इसके कितने प्रकार होते हैं उन्हें सिद्ध कीजिए।
Q.2 आदर्श P-N संधि डायोड की परिभाषा दीजिए? तथा इसके प्रतिरोधों को भी परिभाषित कीजिए।

और पढ़ें.. P-N संधि डायोड में अग्र एवं पश्च अभिनति को समझाकर धारा प्रवाह हेतु अभिलक्षणिक वक्र खींचिए?

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