भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, NCERT सार संग्रह | Indian National Congress in Hindi

हेलो दोस्तों, आज के इस लेख में हम आपको संक्षिप्त इतिहास NCERT सार संग्रह “महेश कुमार वर्णवाल” Book का अध्याय “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस” (Indian National Congress in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। इसमें हम आपको भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब हुई थी इसके क्या उद्देश्य थे एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की विचारधारा को विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाएंगे, तो आप इस आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़ें।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना, एक अवकाश प्राप्त अंग्रेज आई.सी.एस. अधिकारी एलेन ऑक्टेवियन ह्यूम (ए.ओ. ह्यूम) द्वारा दिसम्बर, 1885 में की गई थी।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन का आयोजन पुणे में प्रस्तावित किया गया परन्तु, उस समय पुणे में प्लेग रोग फैल जाने के कारण यह अधिवेशन बंबई में आयोजित किया गया।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन 28 दिसम्बर, 1885 को बंबई के ग्वालिया टैंक में स्थित गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कालेज में सम्मन्न हुआ।
  • प्रारम्भ में इसका नाम भारतीय राष्ट्रीय संघ रखा गया था, परन्तु कुछ समय पश्चात् दादाभाई नौरोजी के सुझाव पर इसका नाम बदलकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस कर दिया गया।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के समय भारत का वायसराय लॉर्ड डफरिन था।
  • कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी, काशीनाथ त्र्यंबक तैलंग, फिरोजशाह मेहता, एच. सुब्रह्मण्यम अय्यर, पी. आनंद चारलू, दिनशा वाचा, गोपाल गणेश आगरकर, जी. सुब्रह्मण्यम अय्यर, एम. बीरराघवाचारी, एन. जी. चंदावरकर, रहमतुल्ला एम. सयानी और व्योमेशचंद्र बनर्जी आदि प्रमुख भारतीय नेता थे।
  • कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष व्योमेशचंद्र बनर्जी थे। उनके द्वारा घोषित कांग्रेस का उद्देश्य देश के विभिन्न भागों के नेताओं को एकजुट करना, जाति, धर्म एवं क्षेत्र से सम्बंधित सभी विद्वेषों को समाप्त करना था।
  • अधिवेशन के समाप्त होने के एक सप्ताह बाद कलकत्ता के समाचारपत्र व इंडियन मिरर ने लिखा, बम्बई में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय कांग्रेस भारत में ब्रिटिश शासन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ती है।

🔺कांग्रेस के सम्बंध में वक्तव्य

1. बिपिन चन्द्र पालकांग्रेस एक प्रकार की याचना करने वाली संस्था है।
2. तिलकयदि वर्ष में एक बार मेढ़क की तरह टर्रायेंगे, तो कुछ नहीं मिलेगा।
3. पट्टाभि सीतारमैय्याकांग्रेस के स्थापना सम्बन्धी कारकों पर पर्दा पड़ा है।
4. लॉर्ड डफरिनकांग्रेस संभ्रांत लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन है।
5. वायसराय कर्जनकांग्रेस लड़खड़ाकर गिर रही है, भारत में रहते हुए मेरी इच्छा है कि, मैं इसके शांतिपूर्ण अवसान में अपना सहयोग दे सकूं।
6. लाला लाजपत रायकांग्रेस लाॅर्ड डफरिन के दिमाग की उपज है।
7. अश्वनी कुमार दत्तकांग्रेस के सम्मेलन तीन दिनों का तमाशा हैं।
8. बंकिम चन्द्र चटर्जीकांग्रेस के लोग पदों के भूखें हैं।

🔘 विशेष : स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) संगठन को समाप्त करने का सुझाव दिया था।

  • कांग्रेस का प्रमुख कार्य था- देश के सम्मुख उपस्थित प्रमुख समस्याओं पर विचार-विमर्श करना और निर्णय करना कि भारतीय नेताओं को कौन-से कदम उठाने चाहिए। कांग्रेस में पास हुए नौ प्रस्तावों में ब्रिटिश नीति में परिवर्तन करने और प्रशासन में सुधार करने की माँग की गई।
    🔺लाला लाजपत राय ने ह्यूम के बारे में लिखा कि, ह्यूम स्वतंत्रता के पुजारी थे और उनका हृदय भारत की दुर्दशा पर रोता था।

🔰 कांग्रेस की स्थापना से पूर्व राजनीतिक संस्थाएँ

संस्थासंस्थापकस्थापनामुख्यालय
1.लैंडहोल्डर्स सोसायटी (जमींदारी संघ)द्वारिकानाथ टैगोर1838कलकत्ता
2.ब्रिटिश इंडिया सोसाइटीविलियम एडम्स1839कलकत्ता
3.बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटीजाॅर्ज थाॅमसन1843कलकत्ता
4.ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन (लैंडहोल्डर्स सोसाइटी व बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी)देवेन्द्रनाथ टैगोर1851कलकत्ता
5.बॉम्बे एसोसिएसन (वर्तमान नाम: बम्बई प्रेसीडेंसी एसोसिएशन)दादाभाई नौरोजी1852बम्बई
6.मद्रास नेटिव एसोसिएशनगजुलू नरसुचेट्टी1852मद्रास
7.ईस्ट इंडिया एसोसिएशन (लंदन इंडिया कमेटी व लंदन इंडिया सोसाइटी)दादाभाई नौरोजी1866लंदन
8.पूना सार्वजनिक सभागणेश वासुदेव जोशी व एम.जी. रानाडे1870पूना
9.इंडिया सोसाइटीआनंदमोहन बोस1872लंदन
10.इंडियन एसोसिएशनआनंद मोहन बोस व सुरेंद्रनाथ बनर्जी1876कलकत्ता
11.नेटिव प्रेस एसोसिएशनसुरेन्द्रनाथ बनर्जी1877दिल्ली
12.मद्रास महाजन सभापी. आनंद चारलू व वीर राघवाचारी1884मद्रास
13.बाॅम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशनबदरुद्दीन तैय्यबजी व फिरोजशाह मेहता1885बम्बई

🔰 कांग्रेस की स्थापना के बाद संगठन

वर्षसंगठनसंस्थापकमुख्यालय
1888 ई.यूनाइटेड इंडियन पैट्रियाॅटिक एसोसिएशनसर सैय्यद अहमद खांअलीगढ
1905 ई.सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसायटीगोपालकृष्ण गोखलेबम्बई
1916 ई.होमरूल लीगएनी बेसेंट व तिलकपुणे
1918 ई.नेशनल लिबरल फेडरेशनएस. एन. बनर्जीकलकत्ता
1918 ई.उत्तर प्रदेश किसान सभामदन मोहन मालवीय, गौरी शंकर व इन्दु नारायणलखनऊ
1918 ई.अहमदाबाद टेक्स्टाइल लेबर एसोसिएशनमहात्मा गांधीअहमदाबाद
1920 ई.इंडियन कम्युनिस्ट पार्टीएम. एन. रायताशकंद
1920 ई.भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेसएन.एम. जोशी (संस्थापक), लाला लाजपत राय (अध्यक्ष)लखनऊ
1920 ई.सर्वेंट्स ऑफ पीपुल्स सोसाइटीलाला लाजपत रायलाहौर
1920 ई.अवध किसान सभाबाबा रामचन्द्र, गौरी शंकर, जवाहरलाल नेहरूप्रतापगढ़
1921 ई.कम्युनिस्ट ग्रुप ऑफ इंडियानलिनी गुप्ताकलकत्ता
1923 ई.स्वराज पार्टीसी. आर. दास व मोतीलाल नेहरूकलकत्ता
1924 ई.अखिल भारतीय साम्यवादी दलसत्य भगतकानपुर
1925 ई.राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघके. वी. हेडगेवार_
1927 ई.ऑल इंडिया वीमेंस काॅन्फ्रेंसलेडी सदाशिव अय्यरमद्रास
1928 ई.श्रमिक स्वराज पार्टीकाजी नजरुल इस्लाम_
1929 ई.खुदाई खिदमतगारखान अब्दुल गफ्फार खांपेशावर
1934 ई.कांग्रेस समाजवादी पार्टीजयप्रकाश नारायण एवं आचार्य नरेन्द्र देव_
1936 ई.अखिल भारतीय किसान सभासहजानन्द व एन. जी. रंगालखनऊ
1936 ई.प्रगतिशील लेखक संघमुंशी प्रेमचन्दलखनऊ
1936 ई.अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्मीनू मसानी, डॉ. के. अशरफ व अशोक मेहता_
1939 ई.फाॅरवर्ड ब्लाॅकसुभाषचन्द्र बोसकलकत्ता
1939 ई.भारतीय बोल्शेविक दलएन. डी. मजूमदारकलकत्ता
1940 ई.रेडिकल डेमोक्रेटिक दलएम. एन. रायकलकत्ता
1941 ई.भारतीय बोल्शेविक (लेनिन) दलअजीत राय व इन्द्रसेनकलकत्ता
1942 ई.क्रांतिकारी समाजवादी दलसौम्येन्द्र नाथ टैगोरकलकत्ता

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस : आरंभिक दौर

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • कांग्रेस का दूसरा अधिवेशन 1886 ई. में कलकत्ता में सम्पन्न हुआ, जिसमें करीब 450 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
  • सुरेंद्रनाथ बनर्जी और इंडियन एसोसिएशन के अन्य नेता कांग्रेस के इस अधिवेशन में शामिल हुए। कांग्रेस के दूसरे अधिवेशन के अध्यक्ष दादाभाई नौरोजी थे। वे बीस से भी अधिक वर्षों तक कांग्रेस के एक अग्रणी नेता रहे।
  • अपने प्रवास काल में दादा भाई नौरोजी ने इग्लैण्ड में ईस्ट इण्डिया एसोसिएशन (1867) नामक एक संगठन बनाया जिसका उद्देश्य, भारतीय जनता की माँगों के लिए ब्रिटिश नेताओं और वहाँ की जनता का समर्थन प्राप्त करना था। वे तीन बार कांग्रेस के अध्यक्ष बने।
  • ब्रिटेन ने दादा भाई नौरोजी की अध्यक्षता में भारतीय सुधार समिति (Indian Reforms Committee) की स्थापना की।
  • वे ब्रिटिश पार्लियामेंट के भी सदस्य चुने गए जहाँ इन्होंने भारत के हितों के लिए आवाज उठाई। वे एक ऐसे प्रारंभिक नेता थे, जिनका मत था कि, भारतीय जनता का दारिद्र्य अंग्रेजों द्वारा भारत के शोषण और भारत के धन को इंग्लैण्ड ले जाने का परिणाम है।
  • नरमपंथी नेता दादा भाई नौरोजी को ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया के नाम से भी जाना जाता है।
  • 1887 ई. में कांग्रेस की अध्यक्षता करने वाले प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष बदरुद्दीन तैय्यब जी थे।
  • 1888 ई. के इलाहाबाद अधिवेशन में लगभग 1300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिसकी अध्यक्षता जॉर्ज यूले (प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष) ने की थी।
  • 1888 ई. में विलियम डिग्बी की अध्यक्षता में लंदन में ब्रिटिश कमेटी ऑफ इंडिया की स्थापना की गई।
  • कांग्रेस के अध्यक्ष बनने वाले अन्य अंग्रेज विलियम वेडरबर्न, अल्फ्रेड वेब और हेनरी कॉटन थे।
  • कांग्रेस के आरंभिक बीस वर्ष (1885-1905) सामान्य रूप से नरम दौर के नाम से जाने जाते हैं।
  • इस काल में कांग्रेस ने धीरे-धीरे सुधार लागू करने तथा सरकार एवं प्रशासन में भारतीयों को अधिकाधिक स्थान देने की माँग की।
  • कांग्रेस ने विधानसभाओं को ज्यादा अधिकार देने तथा इन सभाओं के सदस्यों को निर्वाचित कर विधानसभाओं को प्रतिनिधि संस्थाएँ बनाने की माँग उठाई। इसने माँग की कि, भारतीयों को उच्च सरकारी पदों पर भर्ती किया जाये।
  • सिविल सर्विस की परीक्षाएँ भारत में भी आयोजित कराने के लिए मांग की ताकि योग्य भारतीय इन सेवाओं के लिए आयोजित परीक्षाओं में भाग ले सकें।
  • इन्होंने यह माँग भी की कि, भू-राजस्व में कमी की जाए तथा भारतीय उद्योगों के विकास के लिए सरकार की आर्थिक नीतियों में परिवर्तन किए जाएं।
  • इन्होंने प्रशासन और सेना पर होने वाले अत्यधिक खर्च तथा भारतीय धन के विदेश में जाने का विरोध किया।
  • भाषण एवं बोलने की आजादी, लोक कल्याण की योजनाओं का विस्तार और शिक्षा का प्रसार, इत्यादि अन्य प्रमुख माँगे थीं। ये सभी सरल माँगे थीं। इस दौर के कांग्रेसी नेता भारतीय समाज के उच्च वर्गों के थे। वे अंग्रेजी में शिक्षित थे और सोचते थे कि सरकार उनकी सभी माँगें स्वीकार कर लेगी।
  • उनका दृष्टिकोण ब्रिटिश विरोधी नहीं था। उनका विश्वास था कि, उनकी न्यायोचित माँगों पर सोचने और उन्हें स्वीकार करने के लिए सरकार विवश होगी।
  • ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस की माँगों पर ध्यान नहीं दिया।
  • प्रारम्भ में ब्रिटिश शासकों ने कांग्रेस के प्रति कुछ सहानुभूति दिखाई थी परन्तु, जल्दी ही उन्होंने विरोधी रवैया अपना लिया।
  • अफसरों के कांग्रेस अधिवेशनों में भाग लेने पर रोक लगा दी गई तथा कांग्रेस को एक राजद्रोही संगठन समझा जाने लगा।

कांग्रेस में नई प्रवृत्तियों का उदय

  • उन्नीसवीं सदी के अंत से सरकार की दमनात्मक की कार्रवाइयों में वृद्धि हो गयी।
  • लॉर्ड कर्जन ने खुली घोषणा की कि, भारतीय महत्वपूर्ण पदों को संभालने के लिए योग्य नहीं है। उसने कांग्रेस को नष्ट करने के अपने लक्ष्य की घोषणा की। इसके लिए उसने फूट डालो और शासन करो, की नोति अपनाई। इस दिशा में उठाया गया सबसे महत्वपूर्ण कदम बंगाल का विभाजन (1905 ई.) था।
  • उन्नीसवीं सदी के अंतिम दशक में राष्ट्रीय आंदोलन में नई प्रवृत्तियों को नेतृत्व प्रदान करने वाले प्रमुख नेताओं में बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और विपिनचंद्र पाल प्रमुख नेता थे। इन नए नेताओं ने कांग्रेस की नीतियों को नरम कहकर उसकी आलोचना की।
  • उन्होंने कहा कि, प्रशासन में सुधारों की माँग करना पर्याप्त नहीं है तथा भारतीय जनता का उद्देश्य, स्वराज प्राप्त करना होना चाहिए।
    🔺तिलक ने प्रसिद्ध नारा दिया- स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे प्राप्त करके रहूंगा।
  • इन नेताओं ने जनता की देशभक्ति को जगाया तथा उन्हें देशहित के लिए बलिदान देने को प्रेरित किया। तिलक का केसरी पत्र राष्ट्रवादियों के इस नए समूह का प्रवक्ता बना।
  • इन राष्ट्रवादियों ने जनता को राजनीतिक दृष्टि से जाग्रत करने के लिए लोकप्रिय धार्मिक हिन्दू उत्सवों, गणेश पूजा एवं शिवाजी जयंती जैसे उत्सवों का भी उपयोग किया।
  • उन्होंने हड़तालों और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार जैसे राजनीतिक आंदोलन के नए तरीके भी अपनाए।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)

वर्षअध्यक्षस्थानवर्षअध्यक्षस्थान
1885 ई.व्योमेश चन्द्र बनर्जी (ए.ओ. ह्यूम के सचिव)बम्बई1915 ई.एस.पी. सिन्हाबम्बई
1886 ई.दादाभाई नौरोजी (प्रथम पारसी अध्यक्ष)कलकत्ता1916 ई.अम्बिका चरण मजूमदारलखनऊ
1887 ई.बदरुद्दीन तैय्यब जी (प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष)मद्रास1917 ई.एनी बेसेंट (प्रथम विदेशी महिला अध्यक्ष)कलकत्ता
1888 ई.जाॅर्ज यूले (प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष)इलाहाबाद1918 ई.पं. मदनमोहन मालवीयदिल्ली
1889 ई.विलियम वेडरबर्न (ह्यूम के जीवनीकार)बम्बई1918 ई.सैय्यद हसन इमामबम्बई (विशेष अधि.)
1890 ई.फिरोजशाह मेहताकलकत्ता1919 ई.पं. मोतीलाल नेहरूअमृतसर
1891 ई.पी. आनंद चारलूनागपुर1920 ई.वीर राघवाचारीनागपुर
1892 ई.व्योमेश चन्द्र बनर्जीइलाहाबाद1920 ई.लाला लाजपत रायकलकत्ता (विशेष अधि.)
1893 ई. दादाभाई नौरोजीलाहौर1921 ई.हकीम अजमल खाॅं (प्रथम कार्यकारी अध्यक्ष)अहमदाबाद (गुजरात)
1894 ई.अल्फ्रेड बेबमद्रास1922 ई.चितरंजन दासगया (बिहार)
1895 ई.सुरेन्द्र नाथ बनर्जीपूना (महाराष्ट्र)1923 ई.मुहम्मद अली जौहरकाकीनाडा
1896 ई.रहमतुल्ला सयानीकलकत्ता1923 ई.मौलाना अबुल कलाम आजाददिल्ली (विशेष अधि.)
1897 ई.सी. शंकरन नायर केरल के प्रथम कांग्रेस अध्यक्षअमरावती (महाराष्ट्र)_(युवा अध्यक्ष)_
1898 ई.आनन्द मोहन बोसमद्रास1924 ई.महात्मा गांधीबेलगाॅंव (कर्नाटक)
1899 ई.रमेशचन्द्र दत्तलखनऊ1925 ई.सरोजिनी नायडू (प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष)कानपुर
1900 ई.एन.सी. चन्दावरकरलाहौर1926 ई.श्रीनिवास आयंगरगुवाहाटी
1901 ई.दिनशाॅ ई. वाचाकलकत्ता1927 ई.डाॅ. एम.ए. अंसारीमद्रास
1902 ई.सुरेन्द्र नाथ बनर्जीअहमदाबाद1928 ई.मोतीलाल नेहरूकलकत्ता
1903 ई.लालमोहन घोषमद्रास1929 ई.पं. जवाहरलाल नेहरूलाहौर
1904 ई.सर हेनरी काटनबम्बई1931 ई.बल्लभ भाई पटेलकरांची
1905 ई.गोपालकृष्ण गोखलेबनारस1932 ई.अमृत रणछोड़ दास सेठदिल्ली
1906 ई.दादाभाई नौरोजीकलकत्ता1933 ई.नलिनी सेन गुप्ता (भारतीय मूल की विदेशी महिला अध्यक्ष)कलकत्ता
1907 ई.डाॅ. रासबिहारी घोषसूरत (गुजरात)1934 ई.डाॅ. राजेन्द्र प्रसादबम्बई
1908 ई.डाॅ. रासबिहारी घोषमद्रास1936 ई.पं. जवाहरलाल नेहरूलखनऊ
1909 ई.मदनमोहन मालवीयलाहौर1937 ई.पं. जवाहरलाल नेहरूफैजपुर (महाराष्ट्र)
1910 ई.सर विलियम वेडरबर्नइलाहाबाद1938 ई.सुभाषचन्द्र बोसहरिपुरा
1911 ई.पं. विशन नारायण दरकलकत्ता1939 ई.सुभाषचन्द्र बोसत्रिपुरा (मध्यप्रदेश)
1912 ई.रंगनाथ नरसिंह मुधोलकरबाॅंकीपुर (पटना)1940 ई.मौलाना अबुल कलाम आजादआजाद रामगढ़ (महाराष्ट्र)
1913 ई.नवाब सैय्यद मुहम्मद बहादुरकरांची (पाकिस्तान)1946 ई.जे.बी. कृपलानी स्वतंत्रता के समय अध्यक्ष (अंग्रेजी पत्रिका जन्मभूमि के संपादन कर्ता)मेरठ (उत्तर प्रदेश)
1914 ई.भूपेन्द्र नाथ बसुमद्रास1948 ई.डाॅ. पट्टाभि सीतारमैय्याजयपुर (राजस्थान)

⭕ नोट – विद्यार्थी ध्यान दे कि, 1940-45 तक कांग्रेस के अधिवेशन नहीं हुए अबुल कलाम आजाद लगातार 6 वर्षों तक अध्यक्ष बने रहे।

स्वतंत्रता के बाद कांग्रेसी अध्यक्ष

अध्यक्षअवधि
1.पट्टाभि सीतारमैय्या1948-49
2.जवाहरलाल नेहरू1951-54
3.यू.एन. ढेबर1955-59
4.इंदिरा गांधी1959-59
5.नीलम संजीव रेड्डी1960-63
6.के. कामराज1964-67
7.एस. निजलिंगप्पा1968-68
8.पी. मेहुल1969-69
9.जगजीवन राम1970-71
10.शंकर दयाल शर्मा1972-74
11.देवकांत बरुआ1975-77
12.इंदिरा गांधी1978-84
13.राजीव गांधी1985-91
14.नरसिम्हा राव1992-96
15.सीताराम केसरी1997-98
16.सोनिया गांधी1998-2017
17.राहुल गांधी2017-अब तक
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