व्युत्क्रम वर्ग बल क्या हैं, बलों के अन्तर्गत कणों की गति ज्ञात करों | Inverse Square force in Hindi

व्युत्क्रम वर्ग बल क्या है

यदि दो कणों के बीच लगने वाला वह बल जो उन दोनों कणों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। व्युत्क्रम वर्ग बल (Inverse Square force in Hindi) कहलाता है। इसे K से दर्शाया जाता हैं।

व्युत्क्रम वर्ग बल के अन्तर्गत कणों की गति

यदि दो कणों के बीच की दूरी F(r) है तो व्युत्क्रम वर्ग बल

F(r) \frac{1}{r^2} या F(r) = \frac{K}{r^2}

यदि एक कण के सापेक्ष दूसरे कण का स्थिति सदिश \overrightarrow{r} है, तो

\overrightarrow{F} (r) = \frac{K}{r^2} \widehat{r} ….(1)

यदि K धनात्मक है, तो \overrightarrow{F} (r) प्रतिकर्षणात्मक होगा।

अर्थात् यदि K ऋणात्मक है तो \overrightarrow{F} आकर्षणात्मक होगा । अतः यह गुरुत्वीय बल तथा स्थिर-वैद्युत बल व्युत्क्रम वर्ग बल के उदाहरण है।

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यदि दो कणों के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल Fg = – \frac{Gm_1m_2}{r^2} \widehat{r} तथा दो बिन्दु आवेशों के मध्य लगने वाला वैद्युत बल

Fe = \frac{1}{4π \epsilon _0} \frac{q_1q_2}{r^2} \widehat{r}

अतः गुरुत्वाकर्षण बल के लिए, K = – Gm1m2 तथा वैद्युत बल के लिए, K = \frac{1}{4π \epsilon_0} q1q2 होता है।

Fg व Fe सदैव आकर्षण व प्रतिकर्षण दोनों प्रकृति के होते हैं।

व्युत्क्रम वर्ग बल के अन्तर्गत कणों के निकाय की स्थितिज ऊर्जा,

U = – \int^r_∞ \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r}

U = – \int^r_∞ \frac{K}{r^2} \widehat{r} .d \overrightarrow{r}

U = – \int^r_∞ \frac{K}{r^2} dr

U = \frac{K}{r} ….(2)

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गति का समीकरण से,
µ = \frac{d^2 \overrightarrow{r}}{dt^2} = \overrightarrow{F} (r) …(3)

समीकरण (1) व (3) से,
µ × \frac{d^2 \overrightarrow{r}}{dt^2} = \frac{K}{r^2} \widehat{r}

या \frac{d^2 \overrightarrow{r}}{dt^2} = \frac{K}{µr^2} \widehat{r} ….(4)

समीकरण (4) में दोनों और \overrightarrow{r} से गुणा करने पर,

\overrightarrow{r} × \frac{d^2 \overrightarrow{r}}{dt^2} = \frac{K}{µr^2} \overrightarrow{r} × \widehat{r}

= \frac{K}{µr^2} \overrightarrow{r} × ( \frac{ \overrightarrow{r}}{r} ) = 0

\frac{d}{dt} ( \overrightarrow{r} × \frac{d \overrightarrow{r}}{dt} ) = 0

[चूंकि \overrightarrow{r} × \frac{d^2 \overrightarrow{r}}{dt^2} = \frac{d}{dt} ( \overrightarrow{r} × \frac{d \overrightarrow{r}}{dt} ) – \frac{d \overrightarrow{r}}{dt} × \frac{d \overrightarrow{r}}{dt} = \frac{d}{dt} ( \overrightarrow{r} × \frac{d \overrightarrow{r}}{dt} )]

या \overrightarrow{r} × \frac{d \overrightarrow{r}}{dt} = नियतांक

{क्योंकि \frac{d \overrightarrow{r}}{dt} × \frac{d \overrightarrow{r}}{dt} = 0}

या \overrightarrow{r} × \overrightarrow{v} = नियतांक

या \footnotesize \boxed{\overrightarrow{l} = नियतांक}

जहां \overrightarrow{l} निकाय का कोणीय संवेग है।

अतः “इस प्रकार निकाय की गति कोणीय संवेग वेक्टर के लम्बवत् तल में होती है। तथा कोणीय संवेग परिमाण व दिशा में नियत रहता है। निकाय की गति का मार्ग एक शांकव परिच्छेद होता है।”

Note – व्युत्क्रम वर्ग सम्बन्धित प्रश्न –
Q.1 व्युत्क्रम वर्ग बल के अन्तर्गत कणों की गति कैसी होती हैं। समझाइए?
Q.2 व्युत्क्रम वर्ग बल का नियम क्या है परिभाषा, उदाहरण तथा सूत्र दीजिए?
Q.3 व्युत्क्रम वर्ग बल का नियम लिखिए। तथा व्युत्क्रम वर्ग बलों के अन्तर्गत कणों की गति ज्ञात कीजिए?

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