केप्लर के ग्रहों की गति के नियम लिखिए एवं सिद्ध कीजिए | Kepler’s Laws of planetary motion in Hindi

केप्लर के नियम क्या है

केप्लर ने ग्रहों की गति के नियमों के बारे में निम्नलिखलि तीन नियम दिये जो इस प्रकार हैं।

प्रथम नियम – दीर्घवृत्तीय कक्षाओं का नियम

“प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घ वृत्ताकार कक्षा में घूमता है। जिसके एक फोकस पर सूर्य केन्द्रित रहता है। अर्थात् ग्रह की कक्षा एक तल में होती है।”

द्वितीय नियम – क्षेत्रफलीय नियम

“किसी भी ग्रह को सूर्य से मिलाने वाली रेखा समान समयान्तरालों में समान क्षेत्रफल पार करती है। अर्थात् ग्रह की क्षेत्रीय चाल हमेशा नियत रहती है। ग्रह की गति स्थिर नहीं होती। जब ग्रह सूर्य के नजदीक होता है। तो उसकी गति अधिकतम होती है। तथा जब दूर होता है। तो उसकी गति न्यूनतम होती है।”

तृतीय नियम – आवर्त नियम

“सूर्य के चारों और किसी ग्रह का परिक्रमण काल का वर्ग, दीर्घवृत्त की अर्ध्ददीर्घ अक्ष की तृतीय घात के समानुपाती होता है।”

न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम से केप्लर के नियमों का निगमन

केप्लर का द्वितीय नियम

माना इसके लिए पहले हम किसी के लिए अवकल समीकरण प्राप्त करेंगे। जो कि केन्द्रीय आकर्षण बल के अन्तर्गत गति कर रहा है।

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केप्लर के नियम
केप्लर के नियम

माना कि कोई m द्रव्यमान का कण उपर्युक्त कक्षा में गति कर रहा है। उसकी यह गति M द्रव्यमान के एक दूसरे कण द्वारा उस पर लगाए गए बल से नियंत्रित होती है। जो O पर स्थित है। कण का O के सापेक्ष स्थिति वेक्टर r है। चूंकि बल F बिन्दु O की तरफ कार्यरत है। अतः इसका O के सापेक्ष आघूर्ण शून्य होगा।
अतः इसका बिन्दु O के सापेक्ष कोणीय संवेग
J = mvr = mωr2 = m( \frac{dθ}{dt} )r2

{चूंकि ω = \frac{dθ}{dt} }
या J = नियतांक

यदि प्रति एकांक द्रव्यमान का कोणीय संवेग को h से प्रदर्शित करें, तब

h = \frac{J}{m} या h = r2 ( \frac{dθ}{dt} ) = (नियतांक) ….(1)

यहां r व θ, कण m के केप्लर निर्देशांक हैं।

यदि स्थिति वेक्टर ‘r’ को dθ गति करवाएं, तो dt समय में यह ds = ( \frac{1}{2} r2dθ) क्षेत्रफल पार करेगा।
अतः द्रव्यमान m की क्षेत्रीय चाल

\frac{ds}{dt} = \frac{1}{2} r2 \frac{dθ}{dt} ….(2)

{चूंकि r2( \frac{dθ}{dt} ) = h} अतः
m द्रव्यमान के कण की क्षेत्रीय चाल = \frac{h}{2}

अतः इससे यह सिद्ध होता है। कि “केन्द्रीय बलों के अन्तर्गत गति करते हुए कण की क्षेत्रीय चाल नियत रहती है। जो कि ‘केप्लर का द्वितीय नियम’ कहलाता है।”

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केप्लर का प्रथम नियम

अब समीकरण (1) से,
\frac{dθ}{dt} = \frac{h}{r^2}

यदि इसमें \frac{1}{r} = u रखें, तो

\frac{dθ}{dt} = hu2
अतः \frac{dr}{dt} = \frac{d}{dt} ( \frac{1}{u} ) = – \frac{1}{u^2} \frac{du}{dt}

या \frac{dr}{dt} = – \frac{1}{u^2} ( \frac{du}{dθ} . \frac{dθ}{dt} ) = – \frac{1}{u^2} \frac{du}{dθ} ht

या \frac{dr}{dt} = – h \frac{du}{dθ} …(3)

अतः \frac{d^2r}{dt} = – h ( \frac{d^2u}{dθ^2} . \frac{dθ}{dt} )

\frac{d^2r}{dt} = – h2u2 \frac{d^2u}{dθ^2} …(4)

अतः कण m पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल
F = – µ ( \frac{d^2r}{dt^2} ) – r( \frac{dθ}{dt} )2)

यहां (-) चिन्ह यह दर्शाता है कि बल आकर्षण है। अतः µ = m तो,
F = – m ( \frac{d^2r}{dt^2} ) – r( \frac{dθ}{dt} )2 )

या F = – m [- h2u2 \frac{d^2u}{dθ^2} – rh2u4]
या F = m [h2u2 \frac{d^2u}{dθ^2} + \frac{1}{u} h2u4]
या F = mh2u2 ( \frac{d^2u}{dθ^2} + u)
तथा
\frac{d^2u}{dθ^2} + u = \frac{F}{mh^2u^2} ….(5)

तो माना \frac{F}{m} प्रति एकांक द्रव्यमान पर लगने वाला बल है। तब,
\frac{F}{m} = P

अतः समीकरण (5) से, \frac{F}{m} का मान रखने पर,

\frac{d^2u}{dθ^2} + u = \frac{P}{h^2u^2} …(6)

अतः ग्रहीय गति के सम्बन्ध में,
P = \frac{K}{r^2} तथा K = MG

जहां – r = ग्रह से सूर्य की दूरी, K = नियतांक, M = सूर्य का द्रव्यमान तथा G = गुरुत्वाकर्षण नियतांक हैं।

अतः समीकरण (6) से,
\frac{d^2u}{dθ^2} + u = \frac{GM}{h^2}

क्योंकि \frac{GM}{h^2} कोण θ पर निर्भर नहीं करता है। समीकरण एक मानक अवकल समीकरण है। जिसका हल करने पर,
u – \frac{GM}{h^2} = A Cosθ
या u = \frac{GM}{h^2} + A Cosθ
या \frac{h^2/GM}{r} = 1 + \frac{h^2A}{GM} Cosθ ….(7)

यदि \frac{h^2A}{GM} = e और \frac{h^2}{GM} = l रखने पर,

\footnotesize \boxed{ \frac{l}{r} = 1 + e cosθ} ….(8)

‘यह समीकरण एक दीर्घवृत्त को प्रदर्शित करता है। जबकि उत्केन्द्रता e या h2/GM का मान 1 से कम है।’

अतः “यह न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम से ‘केप्लर का प्रथम नियम’ कहलाता है।”

पढ़े… निर्देश फ्रेम क्या है? जड़त्वीय तथा अजड़त्वीय निर्देश तन्त्र को समझाइए।

केप्लर का तृतीय नियम

किसी वस्तु का परिक्रमण स्थल (जो दूसरी वस्तु के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षाओं में चक्कर लगा रही हो)

T = \frac{πab}{(h/2)} = \frac{2πab}{h}
या T2 = \frac{4π^2a^2b^2}{h^2} …(9)
पुनः
l = \frac{h^2}{K} = \frac{h^2}{MG}
तथा l = \frac{b^2}{a} रखने पर,
\frac{b^2}{a} = \frac{h^2}{MG} या b2 = \frac{h^2a}{MG}

यह मान समीकरण (9) में रखने पर,

T2 = \frac{4π^2a^2}{h^2} \frac{h^2a}{MG} या T2 = \frac{4π^2a^3}{MG}

{चूंकि \frac{4π^2}{MG} = नियतांक} अर्थात्

\footnotesize \boxed{T^2 ∝ a^3} ….(10)

अतः ‘क्योंकि 4π2/MG स्थिर रहता है। इससे केप्लर के तृतीय नियम की पुष्टि होती है। अर्थात् सूर्य के चारों ओर किसी ग्रह का परिक्रमण काल का वर्ग दीर्घ वृत्त की अर्ध्ददीर्घ अक्ष के तृतीय घात के समानुपाती होता है।’ “यही ‘केप्लर का तृतीय नियम’ कहलाता है।”

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Note – ग्रहों की गति सम्बन्धी कैपलर के नियमों से न्यूटन के निष्कर्ष निकालिए।

कैपलर के नियमों से न्यूटन के निष्कर्ष

न्यूटन ने पाया कि अधिकांश ग्रह (बुध व प्लूटो को छोड़कर) सूर्य के चारों ओर की कक्षाएं लगभग वृत्ताकार हैं। कैपलर के दूसरे नियम के अनुसार, किसी ग्रह की क्षेत्रीय चाल नियत रहती है अतः वृत्ताकार कक्षा में ग्रह की रेखीय चाल v नियत होगी । चूंकि ग्रह वृत्ताकार पथ पर चल रहा है अतः ग्रह पर केन्द्र (सूर्य) की और अभिकेंद्रीय बल F लगता है। तथा
F = \frac{mv^2}{r}
यहां m ग्रह का द्रव्यमान, v ग्रह की रेखीय चाल तथा r वृत्ताकार कक्षा की त्रिज्या है। यदि ग्रह का परिक्रमण काल T है, तो
v = एक चक्कर में तय की गई रेखीय दूरी/परिक्रमण काल या v = \frac{2πr}{T}
अतः F = \frac{m}{r} ( \frac{2πr}{T} )2 या F = \frac{4π^2mr}{T^2}
परन्तु वृत्तीय कक्षा के लिए, कैपलर के तीसरे नियम के अनुसार, T2 = Kr3, यहां K एक नियतांक है।
F = \frac{4π^2mr}{Kr^3} = \frac{4π^2}{K} ( \frac{m}{r^2} )
अथवा
\footnotesize \boxed{ F ∝ \frac{m}{r^2} }

इस प्रकार, कैपलर के नियमों के आधार पर न्यूटन ने निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले –

  • ग्रह पर एक अभिकेन्द्र बल F कार्य करता है जिसकी दिशा सूर्य की और होती है।
  • यह बल ग्रह की सूर्य से औसत दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है (F ∝ \frac{1}{r^2} ) ।
  • यह बल ग्रह के द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती होता है (F ∝ m)।

इस प्रकार, इन निष्कर्षों के आधार पर न्यूटन ने यह बताया कि कैपलर के नियम केवल सूर्य एवं ग्रह के बीच ही सत्य नहीं है अपितु ब्रह्मांड में स्थित किन्हीं दो पिण्डों के लिए भी सत्य हैं।

Note – केप्लर के ग्रहों की गति के नियम से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं –
Q.1 ग्रहीय गति के केप्लर के नियमों को परिभाषित कीजिए? तथा न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम से इन नियमों का निगमन कीजिए?
Q.2 ग्रहीय गति के केप्लर के नियम क्या हैं? इनका गणितीय निगमन कीजिए?
Q.3 केप्लर के ग्रहीय गति के नियमों का वर्णन कीजिए? पलायन वेग तथा कक्षीय वेग के व्यंजक स्थापित कीजिए?
Q.4 कैपलर के ग्रहों की गति के नियम लिखिए ? इनसे न्यूटन ने क्या निष्कर्ष प्राप्त किए सिद्ध कीजिए ।

“आशा करते हैं यह लेख आपको पसन्द आया होगा तो इसे अपने दोस्तों में शेयर करें और यदि कोई सवाल या क्योरी हो, तो आप हमें कमेंट्स के माध्यम से बता सकते हैं। हम जल्द ही उसका हल दें देंगे।”

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