L-C परिपथ क्या है, स्प्रिंग के एक सिरे पर द्रव्यमान ज्ञात कीजिए | L-C Circuit in Hindi

L-C परिपथ क्या है

यान्त्रिक तंत्रों कि तरह विद्युत सर्किट में भी दोलन की प्रवृत्ति होती है। तथा जैसा कि L-C परिपथ दिखाया गया है।
माना कि L एक प्रेरकत्व की एक कुण्डली, C धारिता के संधारित्र से श्रेणी क्रम में जुड़ी हुई है। जैसा की चित्र-1 में दिखाया गया है।

L-C परिपथ
L-C परिपथ

यहां पर L-C सर्किट के प्रतिरोध को शून्य मान लिया गया है। प्रारंभ में एक बैटरी द्वारा संधारित्र को आवेशित किया गया है। यदि कुंजी की सहायता से बैटरी का संबंध सर्किट से तोड़ दिया जाता है। और संधारित्र का सीधा संबंध कुण्डली से कर दिया जाता है। तो संधारित्र से कुण्डली में होकर विसर्जन धारा गुजरती है। माना कि किसी समय पर विसर्जन धारा का तात्कालिक मान I है और उस क्षण पर संधारित्र पर आवेश का मान θ है। तथा उस क्षण पर संधारित्र के सिरों के बीच विभान्तर = Q/C होगा। और LQ के सिरों के बीच प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान – L \frac{dI}{dt} होगा। जिसमें \frac{dI}{dt} सर्किट में धारा परिवर्तन की दर है, क्योंकि बाह्य विद्युत वाहक बल का मान शून्य है।

\frac{Q}{C} = – L \frac{dI}{dt}

परन्तु I = आवेश परिवर्तन की दर = \frac{dQ}{dt}
इसलिए,

L \frac{d^2Q}{dt^2} + \frac{Q}{C} = 0
या \footnotesize \boxed{ \frac{d^2Q}{dt^2} + \frac{1}{LC} Q = 0 } ….(2)

अतः संधारित्र का विघटन सरल आवर्त गति का आवर्तकाल होता है

T = 2π \sqrt{LC} ….(3)
तथा आवृत्ति (n) –

n = \frac{1}{2π \sqrt{LC}} ….(4)

अतः समीकरण (2) से,

\footnotesize \boxed{ Q = Q_0 Sin(ωt + φ) } ….(5)

जिसमें, ω = \frac{1}{ \sqrt{LC}} तथा Q0 संधारित्र पर अधिकतम आवेश है।

अतः समीकरण (5) “संधारित्र के विघटन के सरल आवर्त गति का L-C परिपथ के लिए आवर्तकाल का व्यंजक (सूत्र) कहलाता है।”

और पढ़ें.. सरल आवर्त गति क्या है

स्प्रिंग के सिरे पर द्रव्यमान ज्ञात करना

माना एक m द्रव्यमान एक स्प्रिंग की सहायता से जुड़ा हुआ है। स्प्रिंग को खींचने पर यह सम्पीडित करने के लिए एक बल F द्रव्यमान m पर लगाया गया है। तथा द्रव्यमान को छोड़ने पर वह मध्यमान स्थिति के ऊपर नीचे दोनों और गति करने लगता है। यदि किसी समय t पर द्रव्यमान m का विस्थापन x हो, तो स्प्रिंग के द्वारा द्रव्यमान m पर लगाया प्रत्यानयन बल,
F = – Cx ….(1)

यहां C एक बल स्थिरंक (स्प्रिंग गुणांक) कहलाता है।
परन्तु F = m \frac{d^2x}{dt^2}
अतः गति का समीकरण है।

m \frac{d^2x}{dt^2} = – Cx
या m \frac{d^2x}{dt^2} + Cx = 0

\frac{d^2x}{dt^2} + \frac{C}{m} x = 0

अतः यह समीकरण एक सरल आवर्त गति को प्रदर्शित करता है। जिसका आवर्तकाल

\footnotesize \boxed{ T = 2π \sqrt{ \frac{m}{C}} } ….(2)

तथा इसका हल x = a Sin(ωt + φ) होगा ।

यदि m द्रव्यमान का एक स्प्रिंग की सहायता से ऊर्ध्वाधर लटका हुआ है, तो बल स्थिरांक और आवर्तकाल पर गुरूत्व का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। क्योंकि वस्तु के भार mg के कारण प्रारंभ में ही लंबाई में वृद्धि x0 इस प्रकार होती है।

स्प्रिंग के सिरे पर द्रव्यमान
स्प्रिंग के सिरे पर द्रव्यमान

माना कि mg – Cx0 = 0 यदि इस सन्तुलन की स्थिति x0 से द्रव्यमान m का विस्थापन x हो, तो उस पर सम्पूर्ण प्रत्यानयन बल mg – C(x – x0) होगा। अतः प्रभावकारी प्रत्यानयन बल mg – C(x – x0) = – Cx होगा।
अर्थात् इस स्थिति में भी गति का समीकरण m \frac{d^2x}{dt^2} = – Cx होगा। इसका अर्थ यह है। कि गुरुत्व का दोलनों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 स्प्रिंग के एक सिरे पर द्रव्यमान के लिए आवर्तकाल का व्यांजक ज्ञात कीजिए?
Q. 2 L-C परिपथ के लिए आवर्तकाल का सूत्र स्थापित कीजिए?
Q. 3 L-C सर्किट किसे कहते हैं इसका सूत्र ज्ञात कीजिए? तथा स्प्रिंग के एक सिरे पर द्रव्यमान के लिए आवर्तकाल का सूत्र ज्ञात कीजिए?

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *