प्रयोगशाला फ्रेम, द्रव्यमान केन्द्र निर्देशांक निकाय क्या है | Laboratory frame in Hindi

प्रयोगशाला फ्रेम क्या है

यदि जब किसी केंद्रीय बलों के अंतर्गत दो कणों के निकाय की गति का अध्ययन करते है, तो इनमें से भारी कण को स्थिर मूल बिंदु मानकर इससे दूसरे कण के स्थिति वेक्टर पर निकाय के समानीत द्रव्यमान µ के कण की गति प्राप्त करते हैं। तो इसे निर्देशांक निकाय को ‘प्रयोगशाला फ्रेम (Laboratory frame in Hindi)कहते हैं।

द्रव्यमान केंद्र फ्रेम क्या है

द्रव्यमान केन्द्र से सम्बन्ध निर्देश तन्त्र में द्रव्यमान केन्द्र का वेग शून्य होता है। तथा द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष कणों के निकाय का कुल रेखीय संवेग भी शून्य होता है, तो इस तंत्र को ‘द्रव्यमान केंद्र का निर्देश फ्रेम (Center of Mass Frame in Hindi) कहते हैं।

पढ़ें.. केन्द्रीय बल क्या है

प्रयोगशाला तथा द्रव्यमान केन्द्र निर्देशांक निकाय

माना m1 व m2 द्रव्यमान के दो कणों के स्थिति वेक्टर किसी मूल बिन्दु O में क्रमशः \overrightarrow{r_1} \overrightarrow{r_2} है। यदि m2 के सापेक्ष m1 का स्थिति वेक्टर \overrightarrow{r} है। तो प्रयोगशाला फ्रेम में हम निकाय की गति को द्रव्यमान m2 से स्थिति वेक्टर \overrightarrow{r} = – \overrightarrow{r_2} तो, उस पर समानीत द्रव्यमान µ की गति द्वारा दिखाया जाता है।

जहां µ = \frac{(m_1m_2)}{(m_1 + m_2)} तथा गति का समीकरण

\frac{d^2 \overrightarrow{r}}{dt^2} = \frac{1}{µ} \overrightarrow{F} ….(1)

जहां \overrightarrow{F} द्रव्यमान कण m1 पर लगने वाला केंद्रीय बल है। अतः समीकरण (1) को \overrightarrow{r} के लिए \overrightarrow{r_1} \overrightarrow{r_2} के मान निकालते हैं।
तो m1 व m2 के द्रव्यमान केन्द्र C का बिन्दु O के सापेक्ष स्थिति सदिश-

और पढ़ें.. द्रव्यमान केंद्र क्या है ? बाह्य बलों की अनुपस्थिति में द्रव्यमान केंद्र का वेग स्थिर रहता है।

प्रयोगशाला तथा द्रव्यमान केन्द्र निर्देशांक निकाय
प्रयोगशाला तथा द्रव्यमान केन्द्र निर्देशांक निकाय

\overrightarrow{R} = \frac{m_1 \overrightarrow{r_1} + m_2 \overrightarrow{r_2}}{(m_1 + m_2)} ….(2)

तथा \overrightarrow{r_1} \overrightarrow{r_2} = \overrightarrow{r} ….(3)

तब समीकरण (2) एंव (3) को ज्ञात करने पर,

\overrightarrow{r_1} = \overrightarrow{R} + \frac{m_2 \overrightarrow{r}}{(m_1 + m_2)}
तथा
\overrightarrow{r_2} = \overrightarrow{R} \frac{m_1 \overrightarrow{r}}{(m_1 + m_2)}

माना यदि C को मूल बिंदु माना जाए (अर्थात द्रव्यमान निर्देश फ्रेम में) तो द्रव्यमान केंद्र के सापेक्ष द्रव्यमान कण m1 का स्थिति सदिश-

प्रयोगशाला तथा द्रव्यमान केन्द्र निर्देशांक निकाय
द्रव्यमान केन्द्र

\overrightarrow{r_1} = \overrightarrow{r_1} \overrightarrow{R}

\overrightarrow{r_1} = \frac{m_2 \overrightarrow{r}}{(m_1 + m_2)}

\overrightarrow{r_1} = \frac{µ}{m_1} \overrightarrow{r} …..(4)

तथा द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष द्रव्यमान कण m2 का स्थिति सदिश

\overrightarrow{r_2} = \overrightarrow{r_2} \overrightarrow{R}

\overrightarrow{r_2} = – \frac{m_1 \overrightarrow{r}}{(m_1 + m_2)}

\overrightarrow{r_2} = – \frac{µ}{m_2} \overrightarrow{r} ….(5)

चूंकि दोनों कणों के बीच केवल केन्द्रीय बल कार्यरत है। अतः इन कणों का द्रव्यमान केन्द्र नियत वेग से गति करता है। तथा द्रव्यमान केन्द्र फ्रेम में इनका संवेग सदैव शून्य रहता है। घूर्णन गति में दोनों कण एक ही कोणीय वेग से द्रव्यमान केन्द्र के चारों ओर घूमते रहते हैं।

और पढ़ें.. द्वि-पिण्ड समस्या का एक पिण्ड समस्या में लघुकरण

Note – सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं –
Q 1 प्रयोगशाला एंव द्रव्यमान केन्द्र के निर्देशांक निकाय पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो?
Q.2 प्रयोगशाला तंत्र तथा द्रव्यमान केन्द्र तंत्र किसे कहते हैं? परिभाषा, सूत्र द्वारा समझाइए?

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