LCR श्रेणी परिपथ क्या है?, प्रेरकत्व तथा प्रतिरोध द्वारा संधारित्र का विसर्जन ज्ञात कीजिए | LCR Series Circuit in Hindi

LCR श्रेणी परिपथ क्या है? – इस अध्याय में LCR श्रेणी परिपथ का विस्तार से सरल भाषा में अध्ययन किया गया है। तथा इसमें प्रेरकत्व तथा प्रतिरोध द्वारा संधारित्र का विसर्जन (या निरावेशन) एवं इसकी तीनों स्थितियों का भी वर्णन किया गया है। अर्थात् दोलनी निरावेशन की अवस्था तथा दोलनों की आवृत्ति का सूत्र सिद्ध किया गया है।

LCR श्रेणी परिपथ

माना कि एक LCR श्रेणी परिपथ में प्रेरकत्व L की एक कुंडली, धारिता C का एक संधारित्र तथा प्रतिरोध R का एक प्रतिरोधक श्रेणी क्रम में जुड़े हैं। तथा इसमें E विद्युत वाहक बल की एक बैटरी और कुंजी K भी लगी होती है। अब बैटरी को स्विच की सहायता से दबाते हैं, तो संधारित्र आवेशित हो जाता है। अर्थात् कुंजी को छोड़कर संधारित्र के आवेश को प्रेरकत्व तथा प्रतिरोध में से निरावेशित कराते हैं।

प्रेरकत्व तथा प्रतिरोध द्वारा संधारित्र का विसर्जन

चित्र-1 के अनुसार परिपथ बनाते हैं सर्वप्रथम कुंजी K को दबाकर संधारित्र C को आवेशित किया जाता है‌। अब कुंजी K को छोड़कर संधारित्र के आवेश को प्रेरकत्व L तथा प्रतिरोध R में से होकर विसर्जित किया जाता हैं।

LCR श्रेणी परिपथ

माना आवेशित संधारित्र C पर t = 0 पर आवेश q0 है। विसर्जन की क्रिया में किसी क्षण t पर संधारित्र पर आवेश q है विसर्जन धारा i है तथा धारा परिवर्तन की दर di/dt है। तब समय t पर संधारित्र की प्लेटों के बीच विभवांतर = q/C
अतः कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल = – L di/dt
चुंकि प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा प्लेटों के बीच विभवांतर के विपरीत है। अतः परिपथ में प्रभावी विद्युत वाहक बल = q/C – L di/dt
अब ओम के नियम के अनुसार, q/C – L di/dt = iR …(1)
परन्तु i = – dq/dt रखने पर,
चुंकि यहां (-) चिन्ह का अर्थ है कि समय t के साथ आवेश q घटता है} अतः
q/C – L d/dt(-dq/dt) = (-dq/dt) R
या L d2q/dt2 + R dq/dt + q/C = 0 …(2)
या d2q/dt2 + R/L dq/dt + q/LC = 0 …(3)
अब माना यहां R/L = 2K तथा 1/LC = ω02 , तब
d2q/dt2 + 2K dq/dt + ω02q = 0 …(4)
अतः समीकरण (4) द्वितीय कोटि का अवकल समीकरण है जो अवमन्दित सरल आवर्त गति को व्यक्त करता है तथा समीकरण (4) का हल निम्न है।
q = e-Kt (A1eβt + A2e-βt) …(5)
यहां β = \sqrt{K^2 - ω_0^2} तथा A1 व A2 स्वच्छंद नियतांक है। माना dq/dt = i , तब
i = – Ke-Kt (A1eβt + A2e-βt) + e-Kt (βA1eβt – βA2e-βt)
या i = e-Kt[(-K + β)A1eβt – (K + β)A2e-βt] …(6)
A1 व A2 के मान ज्ञात करने के लिए सीमांत प्रतिबंध लगाते हैं। प्रारंभ में t = 0 पर q = q0 तथा i = 0 तब,
अतः A1 + A2 = q0 …(7)
तथा – K(A1 + A2) + β(A1 – A2) = 0 …(8)
अर्थात् समीकरण (7) व (8) को हल करने पर,
A1 = q0/2 (1 + K/β); A2 = q0/2 (1 – K/β)
उपर्युक्त मान समीकरण (5) में रखने पर,
q = q0/2 e-Kt[(1 + K/β)eβt + (1 – K/β)e-βt] …(9)
“यही L-R परिपथ में संधारित्र के निरावेशन अथवा विसर्जन का समीकरण है।”

चूंकि β = \sqrt{K^2 - ω_0^2} है; अतः K व ω0 के आपेक्षिक मानों के अनुसार निम्न तीन स्थितियां संभव है।

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(1). जब K2 > ω02 या R2/4L2 > 1/LC

तब β एक वास्तविक राशि होगी। इस दशा में संधारित्र पर आवेश धीरे-धीरे घटकर शून्य हो जाएगा तथा संधारित्र का विसर्जन ‘रुध्ददोल’ होगा। जैसा कि चित्र-2 में एक वक्र को दिखाया गया है।

LCR श्रेणी परिपथ

(2). जब K2 = ω02 या R2/4L2 = 1/LC

तब β = 0, इस दशा में संधारित्र पर आवेश शीघ्रता से घटकर शून्य हो जाएगा। तथा संधारित्र का विसर्जन ‘ठीक रुध्ददोल’ होगा। यह एक क्रान्तिक अवमन्दन की स्थिति है।

(3). जब K2 < ω02 या R2/4L2 < 1/LC

इस स्थिति में R/2L < 1/LC या R < 2 \sqrt{(\frac{L}{C})} ; तब β एक काल्पनिक राशि होगी । इस दशा में समीकरण (9) का रूप निम्न होगा।
q = q0e-kt Cos(ωt + φ) …(10)
“यह दोलनी विसर्जन की अवस्था है।” इस अवस्था में आवेश अवमन्दित दोलन करता हुआ शून्य होगा।
अवमन्दित दोलनों की कोणीय आवृत्ति –
ω = \sqrt{ω_0^2 - K^2} = \sqrt{\frac{1}{LC} - \frac{R^2}{4L^2}} …(11)
दोलनों का आवर्तकाल –
T = \frac{2π}{ω} = 2π/ \sqrt{\frac{1}{LC} - \frac{R^2}{4L^2}} …(12)
तथा दोलनों की आवृत्ति –
f = \frac{ω}{2π} = \frac{1}{2π} \sqrt{\frac{1}{LC} - \frac{R^2}{4L^2}} …(13)

Note – LCR श्रेणी परिपथ से सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 LCR श्रेणी परिपथ में संधारित्र का विसर्जन का विश्लेषण कीजिए। दोलनीय स्थिति की विवेचना कीजिए।
Q.2 एक परिपथ में जिसमें एक प्रतिरोध R, प्रेरकत्व L तथा संधारित्र C श्रेणी क्रम में एक सेल से जुड़े हैं। प्रेरकत्व L तथा प्रतिरोध R से होकर संधारित्र के निरावेशन को समझाइए।

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