लिसाजू आकृतियां क्या होती है, परिभाषा, सूत्र तथा उपयोग | Lissajous figures in Hindi

लिसाजू आकृति क्या है इसके बारे में हम पिछले अध्याय में पड़ चुके हैं । इसमें हम दो समान आवृत्ति की समकोणिक सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण के बारे में सरल भाषा तथा विस्तार से अध्ययन करेंगे।
ध्यान दें – लिसाजू आकृति या लिस्साजू आकृति दोनों एक ही बात है कहीं – कहीं कुछ प्रश्नों में लिस्साजू आकृति लिखा होता है तो कहीं लिसाजू या लिसाजस भी कहते हैं ।

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लिसाजू की आकृतियां क्या है

वैज्ञानिक एन्टोनी लिसाजस ने सन् 1857 में बताया, कि यदि कोई कण एक-साथ कार्य करती हुई दो समकोणिक सरल आवर्त गति के प्रभाव में कंपन गति कर रही है, तो कण की परिणामी गति को “लिसाजू की आकृतियां” कहते हैं। कण की गति की प्रकृति या उसके द्वारा अनुरेखित वक्र दोनों अवयवी गतियों के आयामों, आकृतियों तथा कालांतरों पर निर्भर करती है।

लिसाजू आकृति के उपयोग

  • लिसाजू आकृतियों का उपयोग C.R.O. द्वारा अज्ञात आवृत्तियों के मापन में किया जाता है ।
  • इनका उपयोग वस्त्र उद्योग में प्रिंटिंग हेतु सुंदर डिजाइन प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

दो समान आवृत्ति की सरल आवर्त गतियों का अध्यारोपण

माना समान आवृत्ति की दो सरल आवर्त गतियों x – अक्षों व y – अक्षों के अनुदिश कार्यरत है। किसी क्षण उनके विस्थापन के समीकरण –
x = a Sin(ωt + φ) ….(1)
y = b Sinωt …..(2)

जिसमें a व b अवयवी गतियों के आयाम हैं। प्रत्येक की आवृत्ति ω व दोनों गतियों में कलांतर φ है।
अतः समीकरण (1) से,
x = a [Sinωt Cosφ + Cosωt Sinφ]

अब समीकरण (2) से,
Sinωt = \frac{y}{b}
तथा Cosωt = \sqrt{ 1 - \frac{y^2}{b^2}}

\frac{x}{a} = \frac{y}{b} Cosφ + Sinφ \sqrt{ 1 - \frac{y^2}{b^2}}
या ( \frac{x}{a} \frac{y}{b} Cosφ) = Sin2φ( 1 – \frac{y^2}{b^2} )
अतः

\frac{x^2}{a^2} \frac{y^2}{b^2} Cos2φ – \frac{2xy}{ab} Cosφ = Sin2φ – Sin2φ \frac{y^2}{b^2}
अतः

\frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} (Cos2φ + Sin2φ) – \frac{2xy}{ab} Cosφ = Sin2φ
अर्थात्

\footnotesize \boxed{ \frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} - \frac{2xy}{ab} Cosφ = Sin^2φ } …..(3)

तथा यह समीकरण “निर्देशांक से झुके हुए ‘दीर्घवृत्त’ को दर्शाता है। तथा यही परिणामी गति का समीकरण कहलाता है।”

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लिसाजू आकृति की विशेष स्थितियाॅं

1.लिसाजू आकृति स्थिति (Case 1st) – जब φ = 0° अर्थात् जब दोनों गतियां एक ही कला में हैं, तब Sinφ = 0 व Cosφ = 1 ,

अतः समीकरण (3) से,

\frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} \frac{2xy}{ab} = 0
या ( \frac{x}{a} \frac{y}{b} )2 = 0
या ± ( \frac{x}{a} \frac{y}{b} ) = 0 ….(4)

± y = ± ( \frac{b}{a} x)

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लिसाजू आकृति
लिसाजू आकृति

उपर्युक्त समीकरण एक सरल रेखाएं y =( \frac{b}{a} ) x को प्रदर्शित करता है। यदि a = b तब y = x तब सरल रेखा दोनों अक्षों से 45° पर झुकी हुई होगी अतः x-अक्ष से सरल रेखा का झुकाव (θ),

θ = tan-1( \frac{b}{a} )

2. लिसाजू आकृति स्थिति (Case 2nd) – जब φ = \frac{π}{4} , तब Sinφ = Cosφ = \frac{1}{ \sqrt{2}} ,

अतः समीकरण (3) से,

\frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} \frac{ \sqrt{2}xy}{ab} = \frac{1}{2} ….(5)

लिसाजू आकृति
लिसाजू आकृति

अतः यह समीकरण तिर्यक दीर्घवृत्त को निरूपित करता है। जो कण का परिणामी पथ हैं।

3. लिसाजू आकृति स्थिति (Case 3rd) – जब φ = \frac{π}{2} , तब Sinφ = 1 तथा Cosφ = 0,

अतः समीकरण (3) से,

\frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} = 1 ….(6)

लिसाजू आकृति
लिसाजू आकृति

अतः यह समीकरण एक सममितीय दीर्घवृत्त को व्यक्त करता है। अब यदि a = b, तब x2 + y2 = a2 ; अर्थात् परिणामी पथ एक वृत्त होगा।

4. लिसाजू आकृति स्थिति (Case 4th) – जब φ = \frac{3π}{4} , तब Sinφ = \frac{1}{ \sqrt{2}} तथा Cosφ = – \frac{1}{ \sqrt{2}} ,

अतः समीकरण (3) से,

\frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} + \frac{\sqrt{2}xy}{ab} = \frac{1}{2} ….(7)

लिसाजू आकृति
लिसाजू आकृति

अतः पुनः यह समीकरण एक तिर्यक दीर्घवृत्त को निरूपित करता है जो कि द्वितीय व चतुर्थ पाद में है।

5. लिसाजू आकृति स्थिति (Case 5th) – जब φ = π , तब Sinφ = 0 व Cosφ = – 1 ,

अतः समीकरण (3) से,

\frac{x^2}{a^2} + \frac{y^2}{b^2} + \frac{2xy}{ab} = 0
या ( \frac{x}{a} + \frac{y}{b} )2 = 0
या ± ( \frac{x}{a} + \frac{y}{b} ) = 0 ….(8)

± y = ∓ ( \frac{x}{a} b)

लिसाजू आकृति
लिसाजू आकृति

उपर्युक्त समीकरण पुनः दो संपाती सरल रेखाएं y = – ( \frac{b}{a} ) x को प्रदर्शित करता है। जो कि मूल बिंदु से जाती हैं तथा पहले व पांचवें में स्थित है यदि a = b तब x = – y तब सरल रेखा x-अक्ष के साथ 135° का कोण बनाएगी। तथा

θ = tan-1(- \frac{b}{a} )

अतः ‘इसी तरह से लिसाजू या लिसाजस की आकृतियों को ज्ञात किया जाता हैं।’

Note – लिसाजू आकृति से सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 लिसाजू आकृति किसे कहते हैं? समान आवृतियां लेकिन भिन्न-भिन्न आयमों कि दो समकोणिक सरल आवृत्ति गतियों के संयोजन का उल्लेख कीजिए?
Q. 2 दो समान आवृत्ति की समकोणिक सरल आवर्त गतियों के विस्थापन निम्न हैं – x = a Sin(ωt + φ) तथा y = b Sinωt इनके अध्यारोपण से प्राप्त परिणामी दोलन के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। यदि φ = 0°, π/2 तथा π हो, तो परिणामी पथ क्या होगा?
Q. 3 लिसाजू आकृतियां क्या है? इनके दो उपयोग लिखिए?

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