छड़ों में अनुदैर्ध्य तरंगें क्या हैं, छड़ों में तरंग का वेग | Longitudinal Waves in Rods in Hindi

छड़ों में अनुदैर्ध्य तरंगें क्या है

माना जब किसी ठोस छड़ में अनुदैर्ध्य कम्पन उत्पन्न किए जाते हैं। तो छड़ की प्रत्येक परत अपनी-अपनी माध्य स्थितियों के इधर-उधर छड़ की अक्ष के अनुदिश कम्पन करने लगती हैं। जबकि छड़ की लम्बाई उसके व्यास की तुलना में बहुत अधिक है। यदि किसी ठोस छड़ में अनुदैर्ध्य तरंगों के संचरण के कारण यंग प्रत्यास्थता गुणांक Y कार्य करता है।

छड़ों में अनुदैर्ध्य तरंग का वेग

माना किसी ठोस छड़ में अनुदैर्ध्य तरंगों का वेग ज्ञात करने के लिए हमें चित्र के अनुसार, किसी प्रत्यास्थ छड़ के अनुदिश तरंगों के संचरण की कल्पना करते हैं। माना की छड़ के लम्बवत् उसके दोलन MN तथा RS छड़ के सिरे से क्रमशः x व x + δx दूरी पर है।

छड़ों में अनुदैर्ध्य तरंगें
छड़ों में अनुदैर्ध्य तरंगें

माना कि छड़ के तलों में MN व RS की स्थितियां क्रमशः M’N’ व R’S’ है। तब छड़ की इन तलों के अपनी माध्य स्थितियों से विस्थापन क्रमशः NN’ = y तथा SS’ = y + δy
अतः छड़ के तलों के बीच प्रारंभिक लंबाई
NS = x + δx – x = δx

अनुदैर्ध्य तरंग के संचरण के कारण लंबाई में परिवर्तन
= [(x + δx) + (y + δy) – (x + y)] – δx
= δy ….(1)

अतः अनुदैर्ध्य तरंग के संचरण के कारण MN में उत्पन्न अनुदैर्ध्य विकृति
= लंबाई में परिवर्तन / प्रारंभिक लंबाई
= \frac{δy}{δx} या \frac{dy}{dx} ..…(2)

यदि छड़ का परिच्छेद क्षेत्रफल α तथा उसके पदार्थ का यंग प्रत्यास्थता गुणांक Y है, तब
प्रतिबल = Y × \frac{dy}{dx}
या \frac{f}{α} = Y \frac{dy}{dx}

अतः MN तल पर लगने वाला बल
Fm = α Y \frac{dy}{dx}

तथा इसी प्रकार RS तल पर लगने वाला बल
Fr = Fm + δ(Fm)
Fr = Fm + \frac{d}{dx} (Fm) δx
या Fr = α Y \frac{dy}{dx} + α Y \frac{d^2y}{dx^2} δx

अतः छड़ के तल MN पर लगने वाला बल
Fmn = α Y \frac{d^2y}{dx^2} δx …(3)

यदि छड़ के पदार्थ का घनत्व ρ है, तो छड़ के इस MN भाग का द्रव्यमान
= ρα δx

अतः छड़ के MN भाग पर लगने वाले बल के कारण यदि त्वरण \frac{d^2y}{dx^2} हो, तो न्यूटन के गति के नियम अनुसार,

ρα δx \frac{d^2y}{dx^2} = αY δx \frac{d^2y}{dx^2}

या \footnotesize \boxed{ \frac{d^2y}{dx^2} = \frac{Y}{ρ} \frac{d^2y}{dx^2}} ….(4)

अर्थात् “यही ठोस छड़ में चलने वाली अनुदैर्ध्य तरंग का अवकल समीकरण कहलाता है।”
चूंकि किसी माध्यम में किसी प्रगामी तरंग का अवकल समीकरण निम्न होता है, तो

\frac{d^2y}{dx^2} = v2 \frac{d^2y}{dx^2} ….(5)

अतः यहां ‘v’ तरंग का वेग है। तथा समीकरण (4) व (5) की तुलना करने पर,
v2 = \frac{Y}{ρ}

या \footnotesize \boxed{v = \sqrt{ \frac{Y}{ρ}}}

और पढ़ें.. लाप्लास संशोधन, गैसों में ध्वनि का वेग, तरल माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंग का वेग

सिद्ध करो P = – E (dy/dx)

न्यूटन ने किसी गैसीय माध्यम में अनुदैर्ध्य ध्वनि तरंगों के वेग के लिए व्यंजक स्थापित किया ।
न्यूटन के अनुसार, किसी माध्यम में अनुदैर्ध्य ध्वनि तरंगों का वेग –
v = \sqrt{ \frac{प्रत्यास्थता}{घनत्व} }
या
v = \sqrt{ \frac{E}{ρ} }

ध्वनि तरंग के कारण माध्यम में दाब
ध्वनि तरंग के कारण माध्यम में दाब

माना कि MN तथा RS तल ट्यूब की अक्ष के अभिलम्बवत् तल में है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है। और उनकी मूल बिंदु O से X-अक्ष के अनुदिश दूरियां क्रमशः x तथा x + δx हैं।
माना यदि ट्यूब के अंदर की गैस में उसकी अक्ष की दिशा में एक अनुदैर्ध्य तरंग बायीं से दायीं और (X-अक्ष की दिशा में) चलती है। तो अभिलम्बवत् तल अपनी अवस्थाओं से विस्थापित हो जाते हैं।
माना तल MN की विस्थापित स्थिति M’N’ और RS कि विस्थापित स्थिति R’S’ है। तथा माना MN का विस्थापन y है। तब दूरी x के सापेक्ष तल के विस्थापन की दर \frac{dy}{dx} । अतः RS तल का अपनी स्थिति से विस्थापन y + \frac{dy}{dx} δx । अतः MN तथा RS कि विस्थापित स्थितियां M’N’ तथा R’S’ की मूल बिंदु से x-अक्ष के अनुदेश दूरियां क्रमशः x + y और x + δx + y – \frac{dy}{dx} होंगी।
अब तलों की विस्थापित स्थितियों M’N’ तथा R’S’ के बीच की दूरी
= δx + \frac{dy}{dx}

तलों MN तथा RS की प्रारंभिक स्थितियों के बीच गैस का आयतन
= तलों के बीच की दूरी × ट्यूब के परिच्छेद का क्षेत्रफल
= δx × α

तथा तलों की नवीन विस्थापित परिस्थितियों M’N’ व R’S’ के बीच गैस का आयतन
= ( δx + \frac{dy}{dx} δx ) × α

अब यदि ट्यूब में भरी गैस में अनुदैर्ध्य तरंग के चलने के परिणाम स्वरूप तलों के विस्थापन से तलों के बीच गैस के आयतन में वृद्धि
= विस्थापन के पश्चात तलों के बीच गैस का आयतन

तथा विस्थापन के पूर्व तलों के बीच गैस का आयतन
= ( δx + \frac{dy}{dx} + δx )α – αδx
= \frac{dy}{dx} δx × α

अतः गैस में अनुदैर्ध्य तरंग के गमन के कारण तलों के बीच गैस में उत्पन्न आयतन विकृति
= आयतन में वृद्धि / प्रारंभिक आयतन

विकृति = \frac{ \frac{dy}{dx} δx × α}{δx × α} = \frac{dy}{dx}

गैसों में अनुदैर्ध्य तरंग के चलने से गैस में आयतन विकृति होती है। अतः गैस का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक कार्यकारी होता है। यदि गैसीय माध्यम का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक E है, तब हुक के नियम के अनुसार,
E = दाब प्रतिबल / आयतन विकृति

E = \frac{- p}{dy/dx}

यहां (-) चिन्ह यह बताता है। कि दाब बढ़ाने से आयतन घटता है। तथा दाब घटाने से आयतन बढ़ता है। अतः

\footnotesize \boxed{ P = - E \frac{dy}{dx} }

यहां E = गैसीय माध्यम का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक तथा P = गैसीय माध्यम में दाब हैं।

Note – सम्बन्धित प्रश्न
Q.1 सिद्ध करो कि किसी छड़ में तरंग वेग उसके पदार्थ के यंग प्रत्यास्थता गुणांक और घनत्व पर निर्भर करता है ?
Q.2 सिद्ध करो कि एक ध्वनि तरंग के कारण किसी माध्यम में दाब के होने वाले परिवर्तन निम्नलिखित से दिए जाते हैं –
P = – E dy/dx जिनके पदों का सामान्य अर्थ है?

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