मॉडुलन की परिभाषा, प्रकार, आवश्यकता व आयाम मॉडुलेशन व्यंजक | Modulation in Hindi

इसे भी पढ़ें… ट्रांजिस्टर बायसिंग – परिभाषा, प्रकार, विधियां, चित्र एवं लाभ व हानियां लिखिए?

हैलो दोस्तों, इस आर्टिकल में हमनें “मॉडुलन” (Modulation in Hindi) के बारे में जानकारी दी है इसमें हमनें मॉडुलन की परिभाषा, प्रकार, आवश्यकता, चित्र आरेख व आयाम मॉडुलन के समीकरणों को विस्तार से सरल भाषा में समझाया है, तो आप इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें।

नोट – विद्यार्थी ध्यान दें कि कहीं-कहीं कुछ प्रशनों में ‘मॉडुलन’ को ‘मॉडुलेशन’ भी लिखते हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मॉडुलन को अंग्रेजी में ‘माॅडुलेशन’ (Modulation) कहा जाता है अतः यह दोनों एक ही शब्द हैं।

मॉडुलन (या माॅडुलेशन) किसे कहते हैं

“श्रव्य आवृत्ति की तरंगों के साथ रेडियो आवृत्ति की वाहक तरंगों का अध्यारोपण ‘मॉडुलन’ या ‘माॅडुलेशन’ (modulation in Hindi) कहलाता है। तथा अध्यारोपण से प्राप्त परिणामी तरंग ‘माॅडुलित तरंग’ (modulated wave in Hindi) कहलाती है।” अर्थात्

मॉडुलन या माॅडुलेशन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों के गुणों को निम्न आवृत्ति की श्रव्य तरंगों (जिन्हें माॅडुलेशन तरंगे भी कहा जाता है) के क्षणिक मान के संगत बदला जाता है।

पढ़ें… ट्रांजिस्टर का आयाम माॅडुलेटर के रूप में उपयोग क्यों किया जाता है?

मॉडुलन के प्रकार (types of modulation in Hindi)

मॉडुलन या माॅडुलेशन को दो प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है।
(i). वाहक तरंग का आयाम बदलकर अर्थात् आयाम मॉडुलन, तथा
(ii). वाहक तरंग का कुल कला कोण बदलकर अर्थात् कोणीय माॅडुलन ।
उदाहरण-1 के लिए ⇒ कोणीय माॅडुलन को दो वर्गों में बांटा जा सकता है – (क). आवृत्ति मॉडुलन, तथा (ख). कला मॉडुलन ।

उदाहरण-2⇒ माना कि वाहक तरंग निम्न समीकरण द्वारा व्यक्त की जाती है।
ec = Ecsin(ωct + φ)
यहां पर Ec = आयाम, ωc = कोणीय आवृत्ति तथा φ = कला कोण है, तो इस प्रकार इन तीनों पैरामीटरों के आधार पर निम्न तीन प्रकार के माॅडुलन संभव है –

  • आयाम मॉडुलन (amplitude modulation)
  • आवृत्ति मॉडुलन (frequency modulation)
  • कला मॉडुलन (phase modulation) ।

मॉडुलन के प्रकारों के आप दिए गए चित्र की सहायता से भी समझ सकते हैं।

और पढ़ें… मॉडुलन की गहराई से क्या तात्पर्य है? इसका व्यंजक व सूचकांक ज्ञात करो (Depth of Modulation in Hindi)

मॉडुलन

अब हम मॉडुलन के तीनों प्रकारों को विस्तार से सरल भाषा में समझते हैं।

1. आयाम मॉडुलन (amplitude modulation in Hindi)

इस माॅडुलेशन में माॅडुलक तरंगों को वाहक तरंगों के साथ इस प्रकार अध्यारोपित किया जाता है कि माॅडुलित तरंगों का आयाम, मॉडुलक तरंग के आयाम का रैखिक फलन हो, लेकिन माॅडुलित तरंग की आवृत्ति और कला को स्थिर रखकर तरंग का आयाम, मॉडुलक सिग्नल के अनुसार परिवर्तित होता है। इस प्रकार के माॅडुलेशन को ‘आयाम मॉडुलन’ कहते हैं।

पढ़ें… आयाम मॉडुलन का सिद्धांत क्या है? इसका व्यंजक व दोष लिखिए।

2. आवृत्ति मॉडुलन (frequency modulation in Hindi)

इस माॅडुलेशन में माॅडुलक तरंगों को वाहक तरंगों के साथ इस प्रकार अध्यारोपित किया जाता है कि माॅडुलित तरंगों की आवृत्ति, मॉडुलक तरंग के आयाम का रैखिक फलन हो, लेकिन माॅडुलित तरंग का आयाम और कला को स्थिर रखकर तरंग की आवृत्ति, मॉडुलक सिग्नल के अनुसार परिवर्तित होती है। इस प्रकार के मॉडुलेशन को ‘आवृत्ति मॉडुलन’ कहते हैं।

3. कला मॉडुलन (phase modulation in Hindi)

इस माॅडुलेशन में मॉडुलक तरंगों का वाहक तरंगों के साथ अध्यारोपण इस प्रकार किया जाता है कि मॉडुलित तरंगों की कला, मॉडुलक तरंग के आयाम का रैखिक फलन है, लेकिन मॉडुलित तरंग की आवृत्ति और आयाम को स्थिर रखकर तरंग का कला, माॅडुलक सिग्नल के अनुसार परिवर्तित होती है। इस प्रकार के मॉडुलेशन को ‘कला मॉडुलन’ कहते हैं।

मॉडुलन की आवश्यकता (need for modulation in Hindi)

मॉडुलन की आवश्यकता क्यों होती है, संचार व्यवस्था में मॉडुलन की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है –
(i). पारस्परिक व्यतिकरण ⇒ यदि इन अल्प आवृत्ति सिग्नलों को सीधे संचरित करें, तो वायुमंडल में एक साथ अरबों-खरबों सिग्नल मौजूद होंगे तथा पारस्परिक व्यतिकरण के कारण उन्हें एक-दूसरे से पृथक-पृथक नहीं पहचाना जा सकता है।

(ii). अल्प परास ⇒ श्रव्य तरंगें अल्प आवृत्ति रखने के कारण बहुत कम ऊर्जा रखती हैं अतः इनकी परास कम होती है। अर्थात् यदि श्रव्य तरंगों को सीधे स्पेस में विकसित किया जाए तो ये अधिक दूरी तक नहीं जा सकती हैं।

(iii). तुच्छ दक्षता ⇒ अल्प आवृत्ति परास में विकिरण की दक्षता काफी कम होने के कारण श्रव्य आवृत्ति सिग्नलों के विकिरण को आकाश में सीधे संचारित करना व्यावहारिक नहीं होता है।

(iv). अव्यावहारिक ऐन्टिना का आकार ⇒ यदि श्रव्य तरंगों को सीधे आकाश में संचरित करते हैं तो दक्ष विकिरण हेतु आवश्यक एन्टिना का आकार बहुत अधिक होता है, जैसे- 20kHz आवृत्ति के लिए 15 किमी लम्बा एन्टिना चाहिए। स्पष्टतः एन्टिना का यह आकार अव्यावहारिक है, परन्तु यदि 1MHz तरंग संचरित करते हैं, तो आवश्यक एन्टिना का आकार 300 मीटर चाहिए, जो व्यावहारिक व संभव है।

(v). एन्टिना द्वारा प्रभावी शक्ति विकिरण ⇒ जब किसी लंबाई के रेखीय एन्टिना द्वारा विकिरित शक्ति, तरंगदैर्ध्य के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है। अतः निम्न आवृत्ति के सिग्नल का उच्च आवृत्ति की तरंगों के साथ मॉडुलन करना आवश्यक होता है।

उपर्युक्त कारणों से वैद्युत श्रव्य सिग्नल को एक उच्च रेडियो आवृत्ति तरंग पर अध्यारोपित व संचरित करते हैं तो इस प्रक्रिया को मॉडुलन कहते हैं। रेडियो आवृत्ति तरंग को ‘वाहक तरंग’ तथा परिणामी तरंगों को ‘माॅडुलित तरंग’ कहते हैं।
इस प्रकार “मॉडुलन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा वैद्युत श्रव्य आवृत्ति तरंग रेडियो तरंग पर अध्यारोपित की जाती है।”

अब हम आयाम मॉडुलन से संबंधित कुछ समीकरणों व व्यंजनों को हल करते हैं।

आयाम मॉडुलन के लिए व्यंजक – माना मॉडुलक सिग्नल निम्न है।
em = Emsinωmt …(1)
यहां Em व ωm क्रमशः माॅडुलक सिग्नल का आयाम व कोणीय आवृत्ति है।
यदि φ = 0 लें, तब समीकरण (ec = Ecsinωct) से वाहक तरंग के लिए
ec = Ecsinωct …(2)

माॅडुलित तरंग का तात्क्षणिक मान निम्न प्रकार से निरूपित कर सकते हैं –
e = [Ec + kaEmsinωmt]sinωct …(3)
या e = Ec[1 + ( \frac{k_aE_m}{E_c} )sinωmt]sinωct
चूंकि यहां ma = \frac{k_aE_m}{E_c} = मॉडुलन सूचकांक है, तब
e = Ec[1 + masinωmt]sinωct …(4)

आयाम मॉडुलन में पाशर्व बैण्ड – अब समीकरण (4) को निम्न रूप में लिख सकते हैं।
e = Ecsinωct + maEcsinωmtsinωct
या e = Ecsinωct + \frac{m_aE_c}{2} cos(ωc – ωm)t – \frac{m_aE_c}{2} cos(ωc + ωm)t …(5)

अतः स्पष्ट है कि आयाम मॉडुलित तरंग में तीन पद हैं। प्रथम पद Ecsinωct अमाॅडुलित तरंग को व्यक्त करता है। दूसरे व तीसरे पद ‘पाशर्व बैण्ड’ कहलाते हैं। द्वितीय पद की आवृत्ति ωc – ωm है तथा इसे ‘निचला ‘पाशर्व बैण्ड’ कहते हैं। तृतीय पद की आवृत्ति ωc + ωm है। तथा इसे ‘ऊपरी पाशर्व बैण्ड’ कहते हैं। दोनों ही पाशर्व बैण्ड के आयाम \frac{m_aE_c}{2} हैं।

और पढ़ें… आयाम मॉडुलित तरंगों में शक्ति का व्यंजक, माॅडुलेशन में पाशर्व बैण्ड क्या है?

आयाम मॉडुलित तरंग में शक्ति – माना समीकरण (5) के अनुसार आयाम मॉडुलित तरंग के विभिन्न अवयवों के आयाम निम्न है –
Ec, \frac{m_aE_c}{2} , \frac{m_aE_c}{2}
जिनकी rms वैल्यू होगी –
\frac{E_c}{\sqrt{2}} , \frac{m_aE_c}{\sqrt{2}} , \frac{m_aE_c}{\sqrt{2}}

अतः आयाम मॉडुलित तरंग द्वारा संचरित कुल शक्ति –
Pt = \frac{1}{R} [( \frac{E_c}{\sqrt{2}} )2 + ( \frac{m_aE_c}{\sqrt{2}} )2 + \frac{m_aE_c}{\sqrt{2}} )2]
या Pt = \frac{1}{R} [ \frac{E_c^2}{\sqrt{2}} + \frac{m_a^2E_c^2}{8} + \frac{m_a^2E_c^2}{8} ]
या Pt = \frac{E_c^2}{2R} [1 + \frac{m_a^2}{2} ] …(6)

यहां \frac{E_c^2}{2R} = वाहक तरंग की शक्ति = Pc, तब
अतः Pt = Pc[1 + \frac{m_a^2}{2} ] …(7)
पाशर्व बैण्डों द्वारा संचरित शक्ति -
Pपाशर्व बैण्ड = \frac{m_a^2E_c^2}{8R} + \frac{m_a^2E_c^2}{8R}
या Pपाशर्व बैण्ड = \frac{m_a^2E_c^2}{4R} = \frac{m_a^2}{2} .Pc
अतः \frac{P_पाशर्व बैण्ड}{P_t} = \frac{m_a^2/2.Pc}{(1 + m_a^2/2).Pc}
या \frac{P_पाशर्व बैण्ड}{P_t} = \frac{m_a^2}{2 + m_a^2} …(8)
अतः यही पाशर्व बैण्डों द्वारा लें जाई गई कुल शक्ति के अंश के लिए आवश्यक व्यंजक है।

Note - सम्बन्धित प्रशन परीक्षाओं में पूछें जाते हैं -
Q.1 मॉडुलन को परिभाषित कीजिए। विभिन्न प्रकार के मॉडुलन समझाइए। सूक्ष्म संचरण में मॉडुलन क्यों प्रयुक्त होता है? ज्यावक्रीय मॉडुलन से आयाम मॉडुलित तरंग के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। पाशर्व बैण्ड समझाइए। पाशर्व बैण्डों द्वारा संचरित कुल शक्ति के अंश के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Q.2 मॉडुलन क्या है? यह कितने प्रकार का होता है‌। चित्र की सहायता से समझाइए।
Q.3 मॉडुलन को परिभाषित करें इसके प्रकारों को लिखें? मॉडुलन की आवश्यकता क्यों होती है? समझाइए।

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *