गतिपालक चक्र क्या है, सूत्र का निगमन कीजिए | Fly Wheel in Hindi

गतिपालक चक्र का जड़त्व आघूर्ण

गति पालक चक्र F धातु की एक भारी बेलनाकार डिस्क होती है। तथा चक्र के केंद्र से एक धातु की दृढ़ धुरी गुजरती है। जिस पर बाॅल बेरिंग की सहायता से चक्र, घूर्णन गति करता है। धुरी पर एक पैग P होता है। जिसकी सहायता से धुरी पर धागा लपेटा जाता हैं।

गतिपालक चक्र
गतिपालक चक्र

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गतिपालक चक्र का व्यंजक

किसी h लंबाई के धागे के एक सिरे पर M मात्रा का बाॅट बाॅधकर उसे गति पालक चक्र की धुरी पर लपेट दिया जाता है। जिससे स्वतंत्र अवस्था में बाॅट के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में गिरने से चक्र घूमना प्रारंभ कर देता है। इस प्रकार चक्र की स्थितिज ऊर्जा Mgh निम्न कारणों में खर्च हो जाती है।

A. गतिपालक चक्र को \frac{1}{2} 2 गतिज ऊर्जा देने में

B. गिरते हुए बाॅट को \frac{1}{2} MV2 गतिज ऊर्जा देने में और,

C. चक्र और बाॅल बेरिंग के मध्य लगने वाले घर्षण के विरुद्ध कार्य n1E करने में, अतः

Mgh = \frac{1}{2} 2 + \frac{1}{2} MV2 + n1E ….(1)

जहां ω चक्र का कोणीय वेग, V बाॅट का वेग, I गति पालक चक्र का जड़त्व आघूर्ण, n1 बाॅट के धुरी को छोड़ने से पहले चक्र द्वारा लगाए गए चक्करों की संख्या तथा E घर्षण के कारण चक्र के एक चक्कर के लिए ऊर्जा का ह्रास है। तथा चक्र गतिज ऊर्जा \frac{1}{2} 2 घर्षण के विरोध में कार्य करने में खर्च हो जाती है। अतः,

\frac{1}{2} 2 = n2E ….(2)

E = \frac{1}{2} \frac{Iω^2}{n_2}
तथा
ω = \frac{V}{R} ….(3)

जहां R धुरी की त्रिज्या है। अतः समीकरण (1), (2) तथा (3) की सहायता से,

Mgh = \frac{1}{2} 2 + \frac{1}{2} MR2ω2 + \frac{1}{2} \frac{n_1}{n_2} 2 ….(4)
या Mgh = \frac{1}{2} MR2ω2 + \frac{1}{2} 2 (1 + \frac{n_1}{n_2})

2Mgh = MR2ω2 + Iω2(1 + \frac{n_1}{n_2} )

अथवा
I = \frac{2Mgh - MR^2ω^2}{ω^2(1 + \frac{n_1}{n_2})} ….(5)

I = \frac{M(2gh/ω^2 - R^2)}{(1 + \frac{n_1}{n_2})} ….(6)

बाॅट जब धुरी से अलग होता है। उस समय चक्र में कोणीय वेग होता है। परन्तु n2 चक्कर लगाने के पश्चात् घर्षण के कारण यह वेग शून्य हो जाता है।

अतः t सेकण्ड में चक्र का मध्यमान कोणीय वेग,

= \frac{ω + 0}{2}

= \frac{2πn_2}{t}

ω = \frac{4πn_2}{t}
अतः

I = \frac{M(ght^2/8π^2n^2_2 - R2)}{(1 + \frac{n_1}{n_2})} ….(7)

इस सूत्र की सहायता से गतिपालक चक्र का जड़त्व आघूर्ण को ज्ञात किया जा सकता हैं। अतः “यही गतिपालक चक्र का मूल समीकरण कहलाता है।”

Note – गति पालक चक्र से संबंधित प्रश्न –
Q.1 गतिपालक चक्र का जड़त्व आघूर्ण किस प्रकार ज्ञात करेंगे? तथा इसके सूत्र का निगमन कीजिए?
Q.2 गति पालक चक्र क्या है। सूत्र का निगमन कीजिए?

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