मल्टीमीटर

मल्टीमीटर – परिभाषा, प्रकार, कार्य, विशेषताएं व अनुप्रयोग | Multimeter in Hindi

हेलो दोस्तों, इस आर्टिकल में हमनें “मल्टीमीटर” (Multimeter in Hindi) के बारे में जानकारी दी है। इसमें हमनें मल्टीमीटर की परिभाषा, प्रकार, कार्यविधि, विशेषताएं, अनुप्रयोग एवं उपयोग के बारे में विस्तार से सरल भाषा में समझाया है और डिजिटल व एनालॉग मल्टीमीटर क्या होते हैं? कि भी संपूर्ण जानकारी दी गई है, तो आप इस अध्याय को पूरा जरूर पढ़ें।

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मल्टीमीटर क्या है (multimeter in Hindi)

यह एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसके द्वारा प्रतिरोध, विभवान्तर (एसी व डीसी दोनों) तथा धारा (एसी व डीसी दोनों) को विभिन्न परास में मापा जा सकता है। इसे ‘AVO मीटर’ (एंपियर, वोल्ट तथा ओम मापने वाला उपकरण) भी कहते हैं।

यह एक बहुआयामी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है जो विभिन्न विद्युतीय मात्राओं को मापने के लिए प्रयुक्त होता है। इसमें अनेक मापन कार्यों को एक उपकरण में सम्मिलित किया जाता है जिसमें सामान्यतः वोल्टमीटर, एमीटर और ओममीटर शामिल होते हैं।

यह एक कीलकित चल कुंडली धारामापी यंत्र होता है जिसका केंद्र बिंदु शून्य पर न होकर बाॅंए सिरे की ओर होता है। इसकी कुंडली का प्रतिरोध सामान्यता 100Ω ओम होता है तथा यह 100µAmp धारा प्रवाहित करने पर पूर्ण स्केल विक्षेप देता है।

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मल्टीमीटर के प्रकार (types of multimeter in Hindi)

मल्टीमीटर के मुख्यतः दो प्रकार होते हैं जो इस प्रकार है –
(i). डिजिटल मल्टीमीटर (digital multimeter),
(ii). एनालॉग मल्टीमीटर (analog multimeter) ।

1. डिजिटल मल्टीमीटर क्या है (Digital multimeter in Hindi)

डिजिटल मल्टीमीटर एक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार की इलेक्ट्रिकल मापों को मापने और प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग आंशिक या पूर्ण संख्यात्मक मापों के रूप में वोल्टेज, धारा, प्रतिरोध, क्षमता और तापमान आदि के मापन के लिए किया जाता है।

डिजिटल मल्टीमीटर (DMM) इलेक्ट्रॉनिक कार्यालय, डिजिटल प्रोसेसिंग यूनिट, डिस्प्ले पैनल और बैटरी व विभिन्न प्रकार के संवेदको से मिलकर बना होता है। यह वास्तविक समय पर अधिक सुविधा प्रदान करने के लिए अनुक्रमिक ढंग से मापन करता है और मापदंडों के नतीजे इलेक्ट्रॉनिक रूप में डिस्प्ले पर प्रदर्शित करता है। इसके साथ-साथ डिजिटल मल्टीमीटर आमतौर पर अनुक्रमिक मोड, फ्रीक्वेंसी मापन, कैपेसिटेन्स मापन, प्रतिरोध मापन, तापमान, धारा और वोल्टेज मापन जैसी विशेषताओं के साथ आता है।

अब हम डिजिटल मल्टीमीटर (DMM) के कुछ प्रमुख कार्य एवं विशेषताओं के बारे में विस्तार से समझते हैं जो आमतौर पर एक डिजिटल मल्टीमीटर में पाई जाती है।

डिजिटल मल्टीमीटर के कार्य व विशेषताएं

(i). डिजिटल डिस्प्ले – डिजिटल मल्टीमीटर (DMM) में एक डिजिटल एलसीडी या एलईडी डिस्प्ले लगा होता है जो मापें गए मानों को सटीक रूप से दिखाता है। इसमें रीडिंग आमतौर पर दशमलव अंक या यूनिक प्रतीकों के साथ दिखाई जाती है।

(ii). वोल्टेज मापन – डिजिटल मल्टीमीटर से प्रत्यावर्ती धारा (AC) व दिष्ट धारा (DC) वोल्टेज दोनों को मापा जा सकता है। ये विभिन्न विद्युत परिपथों या घटकों में वोल्टेज स्तरों की सटीक रीडिंग प्राप्त करता है।

(iii). धारा मापन – डिजिटल मल्टीमीटर dc व ac दोनों धाराओं के मापन की अनुमति देता है। धारा स्तरों की एक विस्तृत श्रृंखला को समायोजित करने के लिए इसके पास अनेक धारा श्रेणियां होती हैं।

(iv). प्रतिरोध मापन – DMM प्रतिरोध को माप सकता है, आमतौर पर ओम (Ω) में। ये सुविधा तारों की निरंतरता का परीक्षण करने व प्रतिरोधों के प्रतिरोध की जांच करने और विद्युत परिपथों की समस्या का निर्धारण करने के लिए उपयोगी होता है।

2. एनालॉग मल्टीमीटर क्या है (Analog Multimeter in Hindi)

एक एनालॉग मल्टीमीटर जिसे एनालॉग ‘VOM मीटर’ (वोल्टमीटर-ओममीटर-मिलीमीटर) के रूप में भी जाना जाता है यह एक विद्युत माप उपकरण होता है जो मापदंडों को इंगित करने के लिए यांत्रिक या एनालॉग डिस्प्ले का उपयोग करता है।

एनालॉग मल्टीमीटर डिजिटल मल्टीमीटर (DMM) के विपरीत, जिसमें एक डिजिटल डिस्पले लगा होता है। परंतु एनालॉग मल्टीमीटर में एक सुई या सूचक का उपयोग करते हैं जो रीडिंग प्रदान करने के लिए एक पैमाने पर चलता है।

अब हम एक एनालॉग मल्टीमीटर के मुख्य कार्य और विशेषताओं को विस्तार से समझते हैं।

एनालॉग मल्टीमीटर के कार्य व विशेषताएं

(i). एनालॉग डिस्प्ले – एनालॉग मल्टीमीटर की सबसे विशिष्ट विशेषता इसका एनालॉग डिस्प्ले है। इसमें आमतौर पर एक डायल या स्केल लगा होता है जिसमें विभिन्न माप व मूल्यों को इंगित करने वाले चिन्ह लगे होते हैं। यह चलित कुंडली से जुड़ा एक सूचक या पैमाने पर माप को इंगित करता है।

(ii). वोल्टेज मापन – एनालॉग मल्टीमीटर दिष्ट धारा (DC) और प्रत्यावर्ती धारा (AC) दोनों वोल्टेजो को माप सकता है।

(iii). धारा मापन – एनालॉग मल्टीमीटर डायरेक्ट करंट dc व अल्टरनेटिव करंट ac धाराओं के मापन की अनुमति देता है। इसमें धारा को मापने के लिए मल्टीमीटर को श्रृंखला सर्किट में लगाने की आवश्यकता होती है।

(iv). प्रतिरोध मापन – एनालॉग मल्टीमीटर परीक्षण किए जा रहे घटक के माध्यम से एक छोटे से ज्ञात करंट को पास करके और वोल्टेज ड्राप को माप कर फिर प्रतिरोध को माप सकता है।

ध्यान देने योग्य है कि डिजिटल मल्टीमीटर की व्यापक उपलब्धता और सामर्थ्य के साथ एनालॉग मल्टीमीटर का उपयोग कम हो गया है, एनालॉग मल्टीमीटर की तुलना में डिजिटल मल्टीमीटर अधिक सटीकता और अधिक सुविधाएं प्रदान करता है।

मल्टीमीटर के अनुप्रयोग

मल्टीमीटर के अनुप्रयोग निम्नलिखित है जो इस प्रकार हैं –

मल्टीमीटर से प्रतिरोध मापन (measurement of resistance by multimeter in Hindi)

मल्टीमीटर से प्रतिरोध मापने की कार्यविधि को चित्र-1 में दिखाया गया है।

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मल्टीमीटर से प्रतिरोध मापन
चित्र-1. मल्टीमीटर द्वारा प्रतिरोध मापन (ओम मीटर)

चित्र के अनुसार धारामापी के साथ श्रेणी क्रम में एक बैटरी b एक उचित मान का प्रतिरोध R तथा एक परिवर्ती प्रतिरोध r जोड़ा जाता है। तथा प्रतिरोध R का मान इसके द्वारा प्रतिरोध मापन की परास तय करता है। यदि परिवर्ती प्रतिरोध r का प्रयोग शून्य समंजन के लिए करते हैं, तो मापें जाने वाले प्रतिरोध को टर्मिनल x व y के बीच जोड़ा जाता है। इसका स्केल ओम में प्रदर्शित होता है तथा इसका शून्य दाएं सिरे की ओर होता है।

अब यदि x व y सिरों को परस्पर मिलाने पर अर्थात् दोनों सिरों के बीच शून्य प्रतिरोध होने पर धारामापी में पूर्ण स्केल विक्षेप प्राप्त होना चाहिए। इसे r के मान द्वारा सेट करके प्राप्त करते हैं। अब मापे जाने वाले प्रतिरोध को दोनों सिरों x तथा y के बीज लगाते हैं जिससे परिपथ में धारा घटने के कारण संकेत बाईं और चले जाते हैं।
अब यदि स्केल पर प्राप्त विक्षेप प्रतिरोध की माप देता है तो हर बार प्रतिरोध मापन से पूर्व ‘शून्य समंजन’ आवश्यक होता है।

मल्टीमीटर से विभवान्तर मापन (measurement of voltage by multimeter in Hindi)

मल्टीमीटर से दिष्ट धारा DC विभव मापने की कार्यविधि को चित्र-2 में दिखाया गया है।

मल्टीमीटर से विभवान्तर मापन
चित्र-2. मल्टीमीटर द्वारा विभवान्तर मापन (डीसी वोल्टमीटर)

चित्र के अनुसार धारामापी के साथ श्रेणी क्रम में उचित मान का एक उच्च प्रतिरोध R जोड़ा गया है। माना धारामापी का प्रतिरोध G है तथा पूर्ण स्केल विक्षेप के लिए आवश्यक धारा ig है तब वोल्टेज परास v के लिए श्रेणी क्रम में जोड़े जाने वाले प्रतिरोध का मान होगा।
R = \frac{v}{i_g} – G …(1)
यदि वोल्टमीटर की परास जितनी अधिक होती है धारामापी के साथ उतना ही अधिक प्रतिरोध r श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है। स्विच s के द्वारा विभिन्न मान के प्रतिरोध जोड़कर वोल्टमीटर की परास बदली जा सकती है।

माना यदि मल्टीमीटर से एसी वोल्टेज मापने के लिए एसी विभव को प्रथम सेतु दिष्टकारी का प्रयोग करके डीसी विभव में बदला जाता है तब इसके बाद पूर्व की भांति मापा जाता है। इस प्रकार प्राप्त मान को एसी विभव का वर्ग-माध्य-मूल-मान rms मान होता हैं।

मल्टीमीटर से धारा मापन (measurement of current by multimeter in Hindi)

मल्टीमीटर से धारा मापने की कार्यविधि को चित्र-3 में दर्शाया गया है।

मल्टीमीटर से धारा मापन
चित्र-3. मल्टीमीटर द्वारा धारा मापन (डीसी एमीटर)

चित्र-3 की भांति धारामापी के साथ समांतर क्रम में उचित मान का प्रतिरोध s शण्ट के रूप में लगाते हैं। माना शण्ट प्रतिरोध का मान एमीटर परास पर निर्भर करता है जिसे स्विच पर सेट किया जा सकता है।
अब माना धारामापी का प्रतिरोध G पूर्ण स्केल विक्षेप के लिए धारामापी में धारा का मान ig तथा धारा मापन की परास i है,तब आवश्यक शण्ट प्रतिरोध होगा –
S = \frac{i_g.G}{i - i_g} …(2)
अतः इस प्रकार जैसे-जैसे एमीटर मापन की परास बढ़ती है वैसे-वैसे शण्ट प्रतिरोध घटता जाता है। अब माना मल्टीमीटर से एसी धारा मापने के लिए एसी धारा को ब्रिज रेक्टिफायर में प्रयुक्त करके डीसी धारा में बदला जा सकता है। तत्पश्चात इसे पहले की भांति मापा जाता है। इस प्रकार के प्राप्त मान को एसी धारा का वर्ग-माध्य-मूल-मान rms मान होता हैं।

मल्टीमीटर के उपयोग

मल्टीमीटर एक बहुपयोगी युक्ति है जिसका उपयोग वैधुत व इलेक्ट्रोनिक परिपथ में विभिन्न प्रकार के परीक्षण मापन में किया जाता है। इसका प्रयोग निम्न प्रकार किया जाता है –
(1). परिपथ की नियमितता के परीक्षण के लिए जब मल्टीमीटर का प्रयोग करते हैं तो ओम मीटर को प्रयुक्त करते हैं तथा जिस परिपथ या उपकरण का परीक्षण करते हैं उसमें धाराप्रवाह बंद रखते हैं।
(2). परिपथ के लघु पथित या खुला रहने के परीक्षण के लिए।
(3). दिष्ट व प्रत्यावर्ती वोल्टेज अथवा धारा के मापने के लिए।

Note – संबन्धित प्रशन –
Q.1 मल्टीमीटर से आप क्या समझते हैं? इसकी परिभाषा एवं प्रकारों को विस्तार से समझाइए। तथा इसके अनुप्रयोगों का भी वर्णन कीजिए।
Q.2 मल्टीमीटर क्या है? इससे प्रतिरोध विभवान्तर तथा धारा मापन का सिद्धांत समझाइए।
Q.3 मल्टीमीटर किसे कहते हैं? डिजिटल व एनालॉग मल्टीमीटर क्या होते हैं? इनके कार्य और विशेषताएं लिखिए तथा मल्टीमीटर के अनुप्रयोग एवं उपयोगों का भी उल्लेख कीजिए।

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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