N-P-N ट्रांजिस्टर उभयनिष्ठ आधार प्रवर्धक की क्रियाविधि, परिपथ आरेख व कला संबंध समझाइए?

N-P-N ट्रांजिस्टर उभयनिष्ठ आधार प्रवर्धक के रूप में

जैसा कि N-P-N ट्रांजिस्टर प्रवर्धक का उभयनिष्ठ आधार परिपथ चित्र-1 में प्रदर्शित किया गया है। इसमें उत्सर्जक आधार (EB) परिपथ को अग्र अभिनत तथा संग्राहक आधार (CB) परिपथ को उत्क्रम अभिनत करने के लिए इन दोनों बैटरियों Veb तथा Vcc की ध्रुवतायें, P-N-P ट्रांजिस्टर उभयनिष्ठ आधार प्रवर्धक परिपथ के सापेक्ष विपरीत होती हैं।

नोट – N-P-N ट्रांजिस्टर परिपथ का मूल सिद्धांत तथा इसके लाभ वही होते हैं जो P-N-P ट्रांजिस्टर परिपथ के हैं।

N-P-N ट्रांजिस्टर उभयनिष्ठ आधार प्रवर्धक का परिपथ आरेख

चित्र-1 में उभयनिष्ठ-आधार N-P-N ट्रांजिस्टर प्रवर्धक के परिपथ आरेख को प्रदर्शित किया गया है।

इसे भी पढ़ें… ट्रांजिस्टर की परिभाषा, प्रकार, कार्यविधि, चित्र, उपयोग व अन्तर समझाइए।

N-P-N ट्रांजिस्टर उभयनिष्ठ आधार प्रवर्धक
N-P-N ट्रांजिस्टर उभयनिष्ठ आधार प्रवर्धक

अब N-P-N ट्रांजिस्टर उभयनिष्ठ आधार प्रवर्धक परिपथ में निवेशी तथा निर्गत वोल्टेज सिग्नल भी एक ही कला में होते हैं। अब हम इसके बारे में विस्तार से समझते हैं।

और पढ़ें.. ट्रांजिस्टर प्रवर्धक क्या है, P-N-P ट्रांजिस्टर उभयनिष्ठ आधार (CB) प्रवर्धक कैसे कार्य करता है

N-P-N ट्रांजिस्टर प्रवर्धक में निवेशी व निर्गत सिग्नलों में कला संबंध

माना निवेशी वोल्टेज सिग्नल का प्रथम अर्द्ध-चक्र ऋणात्मक है क्योंकि उत्सर्जक आधार (EB) के संगत यह ऋणात्मक होता है। अतः प्रथम अर्द्ध-चक्र के दौरान उत्सर्जक आधार परिपथ का अग्र अभिनत वोल्टेज घटता है, इससे उत्सर्जक धारा ie और इसी कारण संग्राहक धारा ic भी घटती है। अतः संग्राहक धारा ic के घटने से संग्राहक आधार वोल्टेज Vcb बढ़ता जाता है। क्योंकि
Vcb = Vcc – icRL

अब चूंकि संग्राहक C बैटरी Vcc के धनात्मक सिरे से जुड़ा है। अतः संग्राहक वोल्टेज के बढ़ने का अर्थ है कि संग्राहक अधिक धनात्मक हो जाता है। इस प्रकार, निवेशी ac वोल्टेज सिग्नल को धनात्मक अर्द्ध-चक्र के दौरान संग्राहक पर प्राप्त निर्गत वोल्टेज सिग्नल का अर्द्ध-चक्र भी धनात्मक होता है।

माना अब निवेशी वोल्टेज सिग्नल के ऋणात्मक अर्द्ध-चक्र के दौरान उत्सर्जक आधार (EB) परिपथ का अग्र अभिनत वोल्टेज बढ़ता है, इससे उत्सर्जक धारा ie और इसी कारण संग्रहण धारा ic बढ़ती जाती है। अतः संग्राहक धारा ic के बढ़ने से संग्राहक आधार वोल्टेज Vcb घटता है। अर्थात् संग्राहक कुछ कम धनात्मक हो जाता हैं।

इस प्रकार, निवेशी ac वोल्टेज सिग्नल के ऋणात्मक अर्द्ध-चक्र के दौरान संग्राहक पर प्राप्त निर्गत वोल्टेज सिग्नल का अर्द्ध-चक्र भी ऋणात्मक होता है।

Note – सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 N-P-N ट्रांजिस्टर उभयनिष्ठ आधार प्रवर्धक के रूप में कार्यविधि समझाइए आवश्यक परिपथ आरेख भी खींचिए।
Q.2 N-P-N ट्रांजिस्टर की क्रियाविधि दीजिए तथा समझाइए कि यह प्रवर्धक का कार्य कैसे करता हैं?
Q.3 N-P-N ट्रांजिस्टर उभयनिष्ठ आधार प्रवर्धक का परिपथ आरेख खींचकर। निवेशी व निर्गत वोल्टेज सिग्नलों में कला संबंध समझाइए।

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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