भौतिक नियमों की प्रकृति क्या है, भौतिक वैज्ञानिक उनके कार्य | Natural of Physical Laws in Hindi

भौतिक नियमों की प्रकृति

भौतिक विज्ञान में विश्व के अति अल्प आकार के कण जैसे- परमाणु, नाभिक तथा अति दीर्घ आकार के कण जैसे- तारे, आकाश गंगा आदि का अध्ययन करते हैं। इनके अध्ययन की विधियां तथा उपकरण भिन्न होते हैं। प्रयोगों तथा प्रेक्षणों के आधार पर इन तथ्यों की खोज के साथ-साथ उन नियमों को भी खोजने का प्रयास किया जाता है जो लघु एवं दीर्घ आकार के कण का पालन करते हैं।
भौतिक प्रक्रम विभिन्न प्रकार के बलों से नियंत्रित होते हैं अतः प्रक्रम में कुछ भौतिक राशियां समय के साथ बदलती रहती हैं। कुछ निश्चित शर्तों के अंतर्गत दिए गए प्रक्रम में कुछ भौतिक राशियां समय के साथ नियत रहती हैं। वे राशियां जो नियत रहती है, वह संरक्षित राशियां कहलाती हैं। अर्थात् यह कथन संरक्षण नियम कहलाता है।
इस प्रकार, संरक्षण नियम वह है जो यह प्रदर्शित करें कि कौन-सी भौतिक राशि किस शर्त के अन्तर्गत संरक्षित है। संरक्षण के कुछ नियम निम्न प्रकार से व्यक्त किए गए हैं।

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1.ऊर्जा संरक्षण नियम – किसी वस्तु पर कार्य करने वाला बल संरक्षी हो तो निकाय की कुल यांत्रिक ऊर्जा नियत रहती है। यह यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण का नियम है। गुरुत्व केन्द्र के अंतर्गत किसी पिंड का मुक्त पतन इसका उदाहरण है। यदि बल संरक्षी नहीं है तो विश्व की कुल ऊर्जा नियत रहती है। यह ऊर्जा संरक्षण का व्यापक नियम है।
इस प्रकार, ऊर्जा संरक्षण का नियम सभी बलों तथा सभी प्रकार की ऊर्जा रूपांतरणों के लिए सत्य है।

2.रेखीय संवेग संरक्षण नियम – यदि कणों के किसी निकाय पर कार्य करने वाला बाह्य बल शून्य हो तो निकाय का रेखीय संवेग संरक्षित रहता है। यह रेखीय संवेग संरक्षण का नियम है।

3.कोणीय संवेग संरक्षण नियम – यदि कणों के किसी निकाय पर कार्य करने वाला बाह्य बल-आघूर्ण शून्य हो तो निकाय का कोणीय संवेग संरक्षित रहता है। यह कोणीय संवेग संरक्षण का नियम है।

4.द्रव्यमान ऊर्जा संरक्षण नियम – आइन्स्टीन के नियमानुसार, द्रव्यमान तथा ऊर्जा पृथक-पृथक अस्तित्व वाली भौतिक राशियां नहीं है बल्कि यह एक ही राशि के दो रूप हैं। द्रव्यमान को ऊर्जा में तथा ऊर्जा को द्रव्यमान में बदला जा सकता है। द्रव्यमान तथा ऊर्जा के बीच तुल्य संबंध E = mc2 है। यहां E ऊर्जा तथा m द्रव्यमान है। अर्थात् इसके अनुसार, यदि ऊर्जा E विलुप्त हो जाए तो द्रव्यमान m बढ़ जाता है। और यदि द्रव्यमान m नष्ट हो जाए तो इसके समतुल्य ऊर्जा E उत्पन्न हो जाती है।

5.आवेश संरक्षण नियम – इस नियम के अनुसार, एक विलगित निकाय का कुल आवेश संरक्षित रहता है।
इन नियमों के अतिरिक्त सूक्ष्म निकायों जैसे नाभिकीय क्रियाओं में कुछ अन्य संरक्षण नियम भी लागू होते हैं।

भौतिक नियमों का उपयोग

भौतिक नियमों की प्रकृति के संरक्षण नियम अत्यधिक सरल एवं व्यापक होने के साथ-साथ व्यवहार में भी अत्यन्त उपयोगी होते हैं।
उदाहरण के लिए – दो कणों की टक्कर में अत्यन्त जटिल बल कार्य करते हैं, तथापि संवेग संरक्षण के नियम इस जटिलता में न पड़कर टक्कर के बाद कणों की गति के बारे में यथासंभव जानकारी देते हैं। नाभिकीय तथा मूल कणों से संबंधित घटनाओं में भी संरक्षण नियम अत्यन्त उपयोगी है। जैसे, ऊर्जा तथा संवेग संरक्षण नियमों का उपयोग करके वुल्फगेंग पाउली ने सन् 1931 में बीटा-क्षय में एक नये कण (न्यूट्रीनों) के उत्पन्न होने का सही अनुमान लगाया था।
प्रकृति की सममितियों का संरक्षण नियमों से घनिष्ठ संबंध है। यदि किसी निकाय का समय के साथ स्थानान्तरण सममित रहता है तो निकाय की ऊर्जा संरक्षित रहती है। अतः यदि किसी निकाय के दिक् स्थान का रेखीय स्थानान्तरण सममित है तो निकाय का रेखीय संवेग संरक्षित रहता है। इसी कारण यदि किसी निकाय का दिक् स्थान समदैशिक हो, तो निकाय का कोणीय संवेग संरक्षित रहता है।
इस प्रकार, भौतिक नियमों की प्रकृति में सममिति के संरक्षण नियमों तथा सिद्धांतों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

भौतिकी का प्रयोजन

भौतिकी में अनेक प्रकार की भौतिक घटनाओं का अध्ययन किया जाता है। भौतिकी के प्रयोजन को समझने के लिए इसके विभिन्न उपविषयों पर दृष्टि डालना आवश्यक है। मूल रूप से इसके दो भाग होते हैं।

  • स्थूल भाग ।
  • सूक्ष्म भाग ।

1.भौतिकी के स्थूल भाग के अन्तर्गत

भौतिकी के स्थूल भाग के अन्तर्गत पार्थिव तथा खगोलीय स्तर की परिघटनाएं सम्मिलित है जबकि सूक्ष्म भौतिकी में परमाण्विक, आण्विक तथा नाभिकीय परिघटनाएं सम्मिलित होती हैं।
स्थूल परिघटनाओं की व्याख्या के लिए चिरसम्मत् यांत्रिकी के सिद्धांतों का प्रयोग किया जाता है जबकि सूक्ष्म परिघटनाओं के लिए क्वांटम यांत्रिकी का प्रयोग किया जाता है। चिरसम्मत् यांत्रिकी की शाखाएं निम्न है।

(1).यांत्रिकी – इसमें द्रव्य के नियमों का अध्ययन किया जाता है। यांत्रिकी न्यूटन के गति के नियमों तथा गुरुत्वाकर्षण के नियम पर आधारित है। इसमें रॉकेट नोदन पिंडों की साम्यवस्था एवं उनकी गति का अध्ययन किया जाता है। इसी शाखा में द्रव्यमान, जड़त्व, ऊर्जा, शक्ति तथा बल-आघूर्ण आदि भौतिक राशियों की अभिधारणा की व्याख्या की जाती है।

(2).ऊष्मागतिकी – इस शाखा के निकायों के ऊष्मीय संतुलन के नियमों, ऊष्मा प्रवाह की दिशा, ऊष्मा का कार्य में रूपान्तरण एवं ऊष्मा स्थानान्तरण के कारण निकाय की आन्तरिक ऊर्जा, ताप एवं एन्ट्रॉपी आदि में परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है। ऊष्मा इंजन की खोज ऊष्मा के कार्य में रूपान्तरण का परिणाम है। तथा प्रशीतक की कार्यविधि की व्याख्या भी ऊष्मागतिकी के अन्तर्गत ही की जाती है।

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2.भौतिकी के सूक्ष्म भाग के अन्तर्गत

इस भाग के अन्तर्गत परमाणुओं एवं नाभिकों से संबंधित परिघटनाओं की व्याख्या की जाती है। इन परिघटनाओं की व्याख्या चिरसम्मत् भौतिकी के नियमों से नहीं की जा सकती है, इसलिए आधुनिक क्वांटम यांत्रिकी का प्रयोग किया जाता है। इस शाखा में द्रव्य के संघटन एवं संरचना मूल कणों के अभिलक्षणों एवं उनकी पारस्परिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।
“वास्तव में भौतिक विज्ञान मूल तथा उत्तेजक विज्ञान है तथा सभी विज्ञान की शाखाओं का आधार है।” भौतिक विज्ञान में एक और तो अनेक सूक्ष्म कणों जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, परमाणु तथा अणु आदि का अध्ययन किया जाता है जबकि दूसरी और विशालकाय आकाशीय पिंड जैसे ग्रह, सूर्य तथा गैलेक्सी आदि का अध्ययन किया जाता है। भौतिक विज्ञान सूक्ष्म परमाणु से विशालकाय ब्रह्मांड में फैली प्राकृतिक घटनाओं की व्याख्या कुछ मूल तथ्यों के आधार पर होती है। इसके अतिरिक्त यह प्रकृति में छिपी आभासी जटिलता में सममिति तथा सरलता प्रदर्शित करता है। इस प्रकार भौतिक विज्ञान, विज्ञान की सर्वाधिक उत्तेजक तथा चुनौतीपूर्ण शाखा है।

कुछ महान भौतिक विज्ञानी और उनके कार्य

यदि हम भौतिक विज्ञान के महान वैज्ञानिकों तथा उनके कार्यों का परिचय न दें तो भौतिक विज्ञान का परिचय अपूर्ण रहेगा। निम्न तालिका में उनका संक्षिप्त विवरण है।

भौतिक विज्ञानी कार्य
1.गैलीलियोजड़त्व का नियम, गैलीलियो रूपांतरण
2.अल्बर्ट आइंस्टीनप्रकाश वैद्युत प्रभाव, आपेक्षिकता का सिद्धांत
3.चंद्रशेखर वेंकट रमनअणुओं द्वारा प्रकीर्णन, रमन प्रभाव
4.सर आइज़क न्यूटनन्यूटन के नियम, गुरुत्वाकर्षण का नियम
5.जोसेफ जॉन थॉमसनपरमाणु का नाभिक मॉडल, तत्वों का इलेक्ट्रॉन तथा धन किरणों का e/m निर्धारण
6.डैनियल बरनौलीद्रवों के प्रवाह की बरनौली प्रमेय, गैसों का गतिक सिद्धांत
7.क्रिश्चियन हाइगैन्सप्रकाश का तरंग सिद्धांत
8.नील्स हेनरी डेविड बोरहाइड्रोजन का परमाणु मॉडल
9.ऐम्पियरवैद्युत धारा तथा चुंबकतत्व
10.फैराडेविद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम
11.एस. कार्नोंआदर्श ऊष्मा इंजन
12.रोबर्ट बॉयलबॉयल का नियम
13.केल्विनऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम, परम स्केल
14.लुई विक्टर डी-ब्रोगलीपदार्थ कणों की तरंग प्रकृति
15.विल्हेल्म कोनराॅड रन्टजनX-किरणों की खोज
16.पाॅल एड्रियन मौरिस डिराकइलेक्ट्रॉन का आपेक्षिकीय सिद्धांत, क्वांटम सांखिकी
17.थॉमस यंगप्रकाश का व्यतिकरण
18.जेम्स क्लर्क मैक्सवेलप्रकाश का विद्युत-चुंबकीय सिद्धांत
19.फ्रेनलप्रकाश का विवर्तन
20.राॅबर्ट एंड्रयूज मिलीकनआवेश का क्वांटीकरण, इलेक्ट्रॉनिक आवेश ज्ञात करना
21.अर्नेस्ट रदरफोर्डप्रोटॉन की खोज, सर्वप्रथम कृत्रिम रूपांतरण
22.मैक्स प्लांकविकिरण का क्वांटम सिद्धांत
23.हिदेकी यूकावानाभिकीय बलों की उत्पत्ति
24.वर्नर कार्ल हाइजेनबर्गअनिश्चितता का सिद्धांत
25.हेनरी बेकुरलरेडियोऐक्टिवता की खोज
26.श्रोडिंगरतरंग यांत्रिकी का विकास
27.हेस्सअन्तरिक्ष किरणें
28.होमी जहांगीर भाभाअन्तरिक्ष किरण शावर
29.सत्येन्द्र नाथ बोसक्वांटम सांख्यिकी

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  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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