नाॅर्टन प्रमेय क्या है, परिभाषा, सूत्र, उपयोग तथा इसे सिद्ध कीजिए | Norton’s Theorem in Hindi

नॉर्टन प्रमेय का सिद्धांत

यह थेवेनिन प्रमेय का ही दूसरा रूप है तथा इस प्रमेय के अनुसार, “अनेक जनरेटरों अथवा विद्युत वाहक बल स्त्रोतों तथा रेखीय प्रतिबाधाओं से बने नेटवर्क के दो टर्मिनलों के बीच लोड प्रतिबाधा अकेले उस धारा स्त्रोत से जोड़ने पर प्राप्त होगी, जो जनित्र द्वारा धारा परिपथ के टर्मिनलों को लघु परिपथ करने पर प्राप्त होगी तथा जिसे उस प्रतिबाधा के साथ समान्तर क्रम में जुड़ा हुआ मानते हैं जो मूल नेटवर्क में सभी जनरेटरों को उनकी आन्तरिक प्रतिबाधाओं से प्रतिस्थापित करने पर टर्मिनलों के बीच कार्य करती है।

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नाॅर्टन प्रमेय का सत्यापन

नाॅर्टन प्रमेय का सत्यापन करने के लिए, रेखीय प्रतिबाधाओं तथा जनरेटरों से निर्मित दो टर्मिनलों वाले रेखीय नेटवर्क को एक समतुल्य परिपथ से प्रतिस्थापित किया जा सकता है जिसमें एक धारा स्त्रोत I तथा उसके समान्तर क्रम में एक प्रतिबाधा Zeq जुड़ी है, जबकि I “समतुल्य धारा स्त्रोत” है जिसे नेटवर्क टर्मिनलों को लघु पथित करके नापा जाता है। तथा Zeq टर्मिनलों पर प्रतिबाधा है जबकि नेटवर्क के सभी आन्तरिक स्त्रोतों को शून्य मान लिया गया है। अर्थात् स्पष्ट है कि थेवेनिन प्रतिबाधा एवं नाॅर्टन प्रतिबाधा समरूप है।

नॉर्टन प्रमेय को समझने के लिए निम्न चित्रों पर विचार करते हैं

जैसा कि चित्र में अनेक जनरेटरों या विद्युत वाहक बल स्त्रोतों तथा रेखीय प्रतिबाधाओं से निर्मित एक नेटवर्क है जिसके आउटपुट टर्मिनल M व N है। जैसा कि चित्र-1 में दिखाया गया है।

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नाॅर्टन प्रमेय

माना MN को शॉर्ट सर्किट करने पर उसमें धारा I तथा Zeq उस नेटवर्क की उस समय प्रतिबाधा है जबकि सारे विद्युत वाहक बल स्त्रोतों के स्थान पर उनकी आन्तरिक प्रतिबाधाओं से प्रतिस्थापित किया गया है। अर्थात् उनके विद्युत वाहक बल शून्य व आन्तरिक प्रतिबाधाएं ली गई हैं।

नाॅर्टन प्रमेय की ‘उपपत्ति’

नाॅर्टन की प्रमेय के अनुसार, यह नेटवर्क M व N के बीच जुड़ी एक बाहरी लोड प्रतिबाधा Zeq में वही धारा उत्पन्न करता है जोकि एक I धारा उत्पन्न करने वाला जनरेटर जिसे Zeq प्रतिबाधा के समान्तर क्रम में जोड़ा गया है।
इस प्रकार, “नाॅर्टन समतुल्य नेटवर्क को थेवेनिन समतुल्य नेटवर्क से ही प्राप्त किया जा सकता है।” यदि नेटवर्क के टर्मिनलों M व N के बीच खुला परिपथ वोल्टेज V है तब निम्न चित्र-2(a) में नेटवर्क का थेवेनिन समतुल्य परिपथ दिखाया गया है।

नाॅर्टन प्रमेय

माना शॉर्ट सर्किट धारा का मान M व N को शॉर्ट सर्किट करके प्राप्त किया जा सकता है। अतः I = \frac{V}{Z_{eq}} इस धारा को नॉर्टन नेटवर्क चित्र-2(b) में प्रतिस्थापित करने के लिए हम वोल्टेज जनरेटर V के स्थान पर धारा जनरेटर I = ( \frac{V}{Z_{eq}} ) मानते हैं तथा श्रेणी प्रतिबाधा Zeq के स्थान पर उसी के बराबर समान्तर प्रतिबाधा Zeq मानते हैं। हम देख सकते हैं कि दोनों समतुल्य परिपथ लोड प्रतिवाधा में समान धारा उत्पन्न करते हैं। अतः माना बाहरी लोड प्रतिबाधा Zeq है जोकि M व N के बीच जुड़ी है। अर्थात्
थेवेनिन प्रमेय समतुल्य परिपथ चित्र-2(a) के अनुसार लोड प्रतिबाधा Zeq में धारा,
IL = \frac{V}{Z_{eq} + Z_R} …(1)
तथा नाॅर्टन समतुल्य नेटवर्क चित्र-2(b) के अनुसार M व N टर्मिनलों के बीच जुड़ी लोड प्रतिबाधा Zeq में धारा,
IL = \frac{Z_{eq}}{Z_{eq} + Z_R} .I
या IL = \frac{Z_{eq}}{Z_{eq} + Z_R} × \frac{V}{Z_{eq}}
अर्थात्
IL = \frac{V}{Z_{eq} + Z_R} …(2)
अतः नेटवर्क (N1) के समतुल्य थेवेनिन परिपथ तथा नाॅर्टन परिपथ दोनों में लोड प्रतिबाधाएं समान है।
अर्थात् इस प्रकार, दोनों परिपथों से एक ही परिणाम निकलता है। अतः “नाॅर्टन प्रमेय, थेवेनिन प्रमेय का ही दूसरा रूप है। अर्थात् नाॅर्टन प्रमेय सत्य है।

नाॅर्टन प्रमेय के उपयोग

यदि किसी दिए गए नेटवर्क के समतुल्य थेवेनिन या नाॅर्टन समतुल्य परिपथों में से कौन-सा सुविधाजनक होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम टर्मिनलों M व N के बीच वोल्टेज V नापते हैं या धारा I नापते हैं। उच्च आन्तरिक प्रतिबाधाओं के जनरेटरों के लिए नाॅर्टन प्रमेय अधिक उपयुक्त मानी जाती है।

Note – नाॅर्टन प्रमेय से सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 नाॅर्टन प्रमेय का उल्लेख कीजिए? तथा सिद्ध कीजिए कि थेवेनिन प्रमेय द्वारा नॉर्टन समतुल्य परिपथ प्राप्त किया जा सकता है।
Q.2 नॉर्टन नेटवर्क प्रमेय को समझाइये?
Q.3 नाॅर्टन प्रमेय लिखिए तथा इसे सिद्ध कीजिए?

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
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