P-N संधि डायोड समीकरण क्या है, परिभाषा, सूत्र तथा इसका निगमन कीजिए | P-N Junction Diode Equation in Hindi

प्रशन-1 P-N संधि डायोड समीकरण का निगमन कीजिए तथा दिष्टकारी निष्पत्ति को परिभाषित कीजिए?

P-N संधि डायोड समीकरण

चूॅंकि हम जानते हैं कि अर्द्धचालक में इलेक्ट्रॉनों के अनुगमन के कारण धारा घनत्व jn = peµnE तथा होलों के अनुगमन के कारण धारा घनत्व jp = peµpE होता है। अतः अर्धचालक में बाह्य विद्युत् क्षेत्र की अनुपस्थिति में इलेक्ट्रॉन ऊष्मीय प्रक्षोभों के कारण उच्च इलेक्ट्रॉन घनत्व से निम्न इलेक्ट्रॉन घनत्व की और विसरण करते हैं इसके फलस्वरूप विसरण से धारा घनत्व का मान इलेक्ट्रॉन घनत्व प्रवणता dn/dx पर निर्भर करता है तथा इसे निम्नलिखित समीकरण द्वारा व्यक्त कर सकते हैं-
je = eDn( \frac{dn}{dx} ) …(1)
यहां Dn इलेक्ट्रॉन विसरण नियतांक है।
अतः संधि डायोड का कुल धारा घनत्व
j = e∆NpVn + e∆PnVp
तब सन्धि पर धारा, i = jA, यहां A सन्धि का क्षेत्रफल है।
अतः i = Ae(NpVn + PnVp)e-eVn/kT(eeV/ηkT – 1) …(2)

अब चूंकि is = Ae(NpVn + PnVp)e-eVn/kT होता है, तो समीकरण (2) में Ae(NpVn + PnVp)e-eVn/kT = is रखने पर,
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ i = i_s[e^{(eV/ηkT)} - 1] } …(3)
यहां i = संधि डायोड धारा, is = पश्च संतृप्त धारा, e = इलेक्ट्रॉन आवेश, k = वोल्टेजमैन नियतांक, T = संधि का परम ताप, η = एक नियतांक तथा V = संधि पर आरोपित विभवान्तर है।
“उपरोक्त समीकरण (3) ही ‘P-N संधि डायोड समीकरण’ कहलाता है।”

दिष्टकारी निष्पत्ति

चूॅंकि P-N संधि डायोड समीकरण के अनुसार सन्धि पर धारा i = is(eeV/ηkT – 1) से स्पष्ट होता है कि यदि V धनात्मक है तो धारा तेजी से बढ़ती है और यदि V ऋणात्मक है तो धारा तेजी से घटती है और अन्त में (- is) हो जाती है। अतः किसी दिए गए विभव पर अग्र धारा व पश्च धारा की निष्पत्ति को ही दिष्टकारी निष्पत्ति कहते हैं।

प्रशन-2 डायोड धारा पर ताप के प्रभाव का वर्णन कीजिए तथा P-N संधि डायोड समीकरण को संक्षेप में समझाइए?

डायोड धारा पर ताप का प्रभाव

पश्च संतृप्त धारा is ताप पर बहुत अधिक निर्भर करती है। यह प्रत्येक 10°C ताप वृद्धि पर लगभग दोगुनी हो जाती है एक नियत वोल्टेज पर धारा प्रवाह भी ताप के बढ़ने पर बढ़ती है, परन्तु इसमें वृद्धि पश्च संतृप्त धारा की अपेक्षा नगण्य ही होती है।

P-N संधि डायोड समीकरण का संक्षिप्त विवरण

माना P-N संधि डायोड में धारा i व विभव V के मध्य निम्न संबंध होता है-
i = is(eV/ηVT – 1) …(1)
यहां is ताप T पर पश्च संतृप्त धारा है, η का मान जर्मेनियम (Ge) के लिए 1 तथा सिलिकॉन (Si) के लिए 2 है। VT ताप के वोल्ट समतुल्य तापमान को दर्शाता है। तथा
VT = \frac{T}{11600} …(2) {T = डायोड संधि का ताप}
कमरे के ताप 17°C पर, T = 273 + 17 = 290 या T = 290k
तब VT = \frac{290}{11600} = 0.025 वोल्ट
अतः जर्मेनियम (η = 1) के लिए समीकरण (1) से,
i = is(e40V – 1) …(3)
तथा सिलिकॉन (η = 2) के लिए समीकरण (1) से,
i = is(e20V – 1) …(4)
अतः समीकरण (1), (3) व (4) से स्पष्ट है कि जब V धनात्मक है या i का मान धनात्मक है, तो डायोड ‘अग्र अभिनति’ होता है। तथा जब V ऋणात्मक है या i का मान ऋणात्मक है तो डायोड ‘पश्च अभिनति’ होता है।

और पढ़ें.. P-N संधि डायोड में अग्र एवं पश्च अभिनति को समझाकर धारा प्रवाह हेतु अभिलक्षणिक वक्र खींचिए?

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