p-n संधि डायोड क्या है, pn संधि क्या है, p-n संधि डायोड के उपयोग | p-n Junction Diode in Hindi

p-n संधि डायोड क्या है? – इस अध्याय में हमनें p-n संधि डायोड का सरल भाषा में अध्ययन किया है। तथा इसमें p-n संधि डायोड के उपयोग और p-n संधि डायोड का चित्र आरेख को भी प्रदर्शित किया गया है अतः इसमें p-n संधि डायोड की विधियां भी लिखी गई है।

p-n संधि डायोड (p-n Junction Diode in Hindi)

जब p-प्रकार के अर्द्धचालक तथा n-प्रकार के अर्द्धचालक को किसी विशेष विधि के द्वारा इस प्रकार जोड़ें की दोनों के बीच सन्धि-स्थल पर क्रिस्टल संरचना संतत् रहे, तो इस प्रकार प्राप्त सन्धि को “p-n संधि” कहते हैं तथा इस संयोजन को “p-n संधि डायोड” कहते हैं। p-n संधि डायोड का चित्र आरेख प्रदर्शित है।

p-n संधि डायोड
p-n संधि डायोड

p-n संधि डायोड एक मूल अर्द्ध-चालक युक्ति होती है जिसके एक क्षेत्र में ग्राही अपद्रव्यों की अधिकता तथा दूसरे क्षेत्र में दाता अपद्रव्यों की अधिकता होती है। इन क्षेत्रों को क्रमशः p-क्षेत्र तथा n-क्षेत्र कहते हैं।

और पढ़ें.. p-n संधि डायोड के अवक्षय परत में क्या होते हैं?, अवक्षय परत की मोटाई क्या होती है।

p-n संधि डायोड के उपयोग

p-n संधि प्राप्त करने के लिए विशेष विधि का उपयोग किया जाता है। इस विधि के आधार पर ये सन्धि निम्न तीन प्रकार की होती है –
(1). संवृद्ध सन्धि (Grown Junction)
(2). संगलित या मिश्रधातु सन्धि (Fused or Alley Junction)
(3). विसरण सन्धि (Diffused Junction)

p-n संधि डायोड

अर्थात् शुद्ध या नैज अर्धचालक और बाह्य अर्धचालक द्विपार्श्विक होते हैं, जबकि p-n संधि डायोड एक पार्श्विक होता है। इस प्रकार p-n संधि डायोड एक वाल्व की भांति कार्य करता है।

p-n सन्धि पर अपद्रव्य सान्द्रता का अकस्मात् असांतत्य

जब किसी शुद्ध अर्द्ध-चालक में अल्प मात्रा में अशुद्धि मिलायी जाती है तो अर्द्ध-चालक में अशुद्ध परमाणुओं का घनत्व लगभग एक समान रहता है जिसके फलस्वरूप अशुद्ध अर्द्ध-चालक के अन्दर आवेश घनत्व भी एक समान होता है, क्योंकि एक अशुद्ध परमाणु से एक आवेश वाहक ही प्राप्त होता है। यदि एक शुद्ध अर्द्ध-चालक क्रिस्टल के एक और से दाता अशुद्धि (जैसे- As, P, Sb आदि) तथा दूसरी ओर से ग्राही अशुद्धि (जैसे- Al, Ga, In आदि) का अपमिश्रण किया जाता है।

p-n संधि डायोड

चित्र-3 से स्पष्ट है कि सन्धि-स्थल से पूर्व एक और बिन्दु M1 एक दाता अशुद्धि की सान्द्रता लगभग एक समान रहती है लेकिन एक और बिन्दु M1 से सन्धि M3 की ओर दाता अशुद्धि की सान्द्रता तथा दूसरी और बिन्दु M2 से सन्धि M3 की और ग्राही अशुद्धि की सान्द्रता तेजी से घटती है और सन्धि M3 पर यह अशुद्धि की सान्द्रता लगभग शून्य हो जाती है।
इस प्रकार, क्रिस्टल के एक ओर से बिन्दु M1 तक दाता अशुद्धि की सान्द्रता सांतत्य रहती है। तथा दूसरी ओर से बिन्दु M2 तक ग्राही अशुद्धि की सान्द्रता सांतत्य रहती है लेकिन M1 व M2 के बीच अशुद्धि सान्द्रता अकस्मात् असांतत्य होकर लगभग शून्य हो जाती है। जिसे चित्र-3 में प्रदर्शित किया गया है।

Note – p-n संधि डायोड से सम्बन्धित प्रशन पूछें जाते हैं।
Q.1 p-n संधि डायोड से आप क्या समझते हैं? चित्र की सहायता से इसे सिद्ध कीजिए।
Q.2 p-n संधि डायोड क्या है? इसकी परिभाषा तथा उपयोग लिखिए।

Read More –

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *