प्लांक का विकिरण क्वांटम नियम क्या है, प्लांक की परिकल्पना | Planck’s Hypothesis in Hindi

कृष्णिका विकिरण में शून्य से अनन्त तक सभी तरंगदैर्ध्यों के विकिरण विधमान होते हैं। किसी निश्चित ताप पर, सम्पूर्ण विकिरण ऊर्जा विभिन्न तरंगदैर्ध्यों में वितरित रहती है। इस वितरण का प्रायोगिक अध्ययन ल्यूमर तथा प्रिंग्जहाइम ने किया था जैसा कि हम कृष्णिका विकिरण स्पेक्ट्रम में पढ़ा चुके हैं। परन्तु यान्त्रिकी तथा ऊष्मागतिकी के आधार पर कोई ऐसा सूत्र प्राप्त नहीं किया जा सका, जो किसी दिए गए ताप पर विकिरण-ऊर्जा के विभिन्न तरंगदैर्ध्यों में वितरण को व्यक्त कर सकें।

प्लांक की परिकल्पना

सन् 1900 में प्लांक ने एक क्रान्तिकारी विचार रखा कि, ” विकिरण का उत्सर्जन सतत् न होकर ऊर्जा की निश्चित मात्रा के छोटे-छोटे बण्डलों अथवा पैकिटों के रूप में होता है, जिन्हें ‘ क्वांटा ‘ कहते हैं। ” बाद में इन बण्डलों का नाम ‘ फोटाॅन ‘ रखा गया।
प्रत्येक फोटाॅन (क्वांटा) से सम्बद्ध ऊर्जा की मात्रा hν होती हैं, यहां ‘ν’ विकिरण की आवृत्ति तथा ‘h’ प्लांक-नियतांक है। इस प्रकार,
\footnotesize \boxed{ ε = hν }
माना कि दृश्य प्रकाश के किसी विकिरण की तरंगदैर्ध्य λ = 5000 \AA हैं। तथा सूत्र c = νλ (यहां c प्रकाश की चाल है) के अनुसार विकिरण की आवृत्ति
ν = \frac{c}{λ} = \frac{3.0×10^8 मीटर-सेकण्ड^-1}{5000×10^-10 मीटर}
ν = 6.0×1014 सेकण्ड-1
प्लांक की परिकल्पना के अनुसार, विकिरण के प्रत्येक बण्डल (फोटाॅन) की ऊर्जा
= hν = 6.6×10-34 जूल-सेकण्ड × 6.0×1014 सेकण्ड-1
= 4.0×10-19 जूल ।
अतः प्लांक की परिकल्पना के अनुसार, 5000 \AA तरंगदैर्ध्य के विकिरण द्वारा उर्जा का आदान-प्रदान केवल 4.0×10-19 जूल की पूर्ण-गुणित मात्राओं में ही सम्भव है ।
प्लांक ने अपनी इस परिकल्पना के आधार पर ऊर्जा-वितरण का सूत्र दिया जो कि ल्यूमर तथा प्रिंग्जहाइम के प्रायोगिक Eλ – λ वक्रों के पूरी तरह अनुरूप पाया गया ।

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प्लांक का नियम (Planck’s law in Hindi)

वैज्ञानिक मैक्स प्लांक ने क्वाण्टम सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। तथा माना कि कृष्णिका की दीवारों के अणु ‘दोलित्रों’ की तरह व्यवहार करते हैं। तथा प्रत्येक दोलित्र की अपनी अभिलाक्षणिक आवृत्ति होती है। यह दोलित्र कृष्णिका की गुहिका में विद्युत्-चुम्बकीय ऊर्जा का उत्सर्जन करते हैं और गुहिका से उर्जा का अवशोषण भी करते हैं। इस प्रकार एक सन्तुलन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। आण्विक दोलित्रों के संबंधों में मैक्स प्लांक ने निम्न परिकल्पनाएं प्रस्तुत की –

(1).दोलित्र की ऊर्जा ‘En‘ कुछ विविक्त मान ही रख सकती है, अर्थात्
\footnotesize \boxed{ E_n = nhν }
यहां n एक पूर्णांक है, जिसे “क्वाण्टम संख्या” कहते हैं। उपर्युक्त समीकरण से स्पष्ट है कि दोलित्रों की ऊर्जा hν, 2hν, 3hν, … इत्यादि ही हो सकती है, इनके बीच में नहीं हो सकती ।

(2).दोलित्र ऊर्जा का उत्सर्जन अथवा अवशोषण सतत् रूप से नहीं करते, बल्कि छोटे-छोटे बण्डलों के रूप में करते हैं। विकिरण के इन बण्डलों को ‘क्वाण्टा’ अथवा ‘फोटाॅन’ कहते हैं। प्रत्येक क्वाण्टा (फोटाॅन) में hν ऊर्जा होती है।

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प्लांक दोलित्र की औसत ऊर्जा

माना कि कृष्णिका कोष्ठ में प्लांक दोलित्रों की कुल संख्या N है। तथा उनकी कुल ऊर्जा E है। तब प्लांक दोलित्र की औसत ऊर्जा
\overline{E} = \frac{E}{N} ….(1)
मैक्सवेल-बोल्ट्जमैन के सूत्र में किसी दोलित्र की उर्जा hν होने की प्रायिकता e-hν/kT होती है। माना कृष्णिका की गुहिका में N0, N1, N2,… Nr,… उन दोलित्रों की संख्याएं हैं, जिनकी ऊर्जाएं क्रमशः 0, hν, 2hν,… rhν,…हैं। तब rhν ऊर्जा वाले दोलित्रों की संख्या Nr निम्न होगी ।
Nr = N0e-rhν/kT
तथा दोलित्रों की कुल संख्या N निम्नलिखित होगी –
N = N0 + N1 + N2 + …. + Nr + ….
N = N0 + N0e-hν/kT + N0e-2hν/kT + …. + N0e-rhν/kT + ….
अथवा
N = N0(1 + e-hν/kT + e-2hν/kT + …. + e-rhν/kT + ….)
या N = N0 \frac{1}{1 - e^{-hν/kT} } …(2)
{चूंकि 1 + x + x2 + … + xn + … = \frac{1}{1 - x} }

तथा इसी प्रकार, दोलित्रों की कुल संख्या E निम्न होगी –
E = N0 × 0 + N1 × hν + N2 × 2hν + …. + Nr × rhν + ….
E = N0 × 0 + N0e-hν/kT × hν + N0e-2hν/kT × 2hν + …. + N0e-rhν/kT × rhν + ….
अर्थात्
E = N0hνe-hν/kT (1 + 2e-hν/kT + …. + re-(r – 1)hν/kT + ….)
या E = N0hνe-hν/kT \frac{1}{(1 - e^{-hν/kT})^2} ….(3)
{चूंकि 1 + 2x + 3x2 + …. = \frac{1}{(1 - x)^2} }

अब समीकरण (3) को समीकरण (2) से भाग देने पर दोलित्र की औसत ऊर्जा,
\overline{E} = \frac{E}{N} = \frac{N_0hνe^{-hν/kT} }{(1 - e^{-hν/kT})^2} × \frac{(1 - e^{-hν/kT})}{N_0}
या \overline{E} = \frac{hνe^{-hν/kT}}{1 - e^{-hν/kT}}
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ \overline{E} = \frac{hν}{e^{hν/kT} - 1} } ….(4)
यही “आवृत्ति के पदों में, प्लांक दोलित्र की औसत ऊर्जा का व्यंजक” है।
अर्थात् चूंकि ν = \frac{c}{λ} जहां c विकिरण की चाल तथा λ तरंगदैर्ध्य हैं। अतः
\footnotesize \boxed{ \overline{E} = \frac{hc}{λ(e^{hν/kT} - 1)} } ….(5)
यही “तरंगदैर्ध्य के पदों में प्लांक दोलित्र की औसत ऊर्जा का व्यंजक” है।

प्लांक का विकिरण सूत्र

आवृत्ति परास ν व ν + dν के बीच विकिरण ऊर्जा का घनत्व Eν दोलित्र की औसत ऊर्जा से निम्न प्रकार सम्बन्धित होता है।

Eν.dν = ( \frac{8πν^2dν}{c^3} ) × \overline{E}
समीकरण (4) से \overline{E} का मान रखने पर,
Eν.dν = \frac{8πν^2}{c^3} × \frac{hν}{e^{hν/kT} - 1}

या Eν.dν = \frac{8πh}{c^3} × \frac{ν^3dν}{e^{hν/kT} - 1}
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ E_ν.dν = \frac{8πh}{c^3} . \frac{ν^3dν}{e^{hν/kT} - 1} } …(6)
यह “समीकरण आवृत्ति के पदों में प्लांक का विकिरण सूत्र” है।
अर्थात् अब यदि उपर्युक्त समीकरण में, ν = \frac{c}{λ} तथा = – \frac{c dλ}{λ^2} रखने पर,
Eλ.dλ = \frac{8πh( \frac{c}{λ} )^3( \frac{c}{λ^2} dλ)}{c^3(e^{hc/λkT} - 1)}
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ E_λ.dλ = \frac{8πhc}{λ^5} ( \frac{dλ}{e^{hc/λkT} - 1})} …(7)
यह “समीकरण तरंगदैर्ध्य के पदों में प्लांक का विकिरण सूत्र” है।
अतः ये सूत्र समस्त तरंगदैर्ध्य परिसर के लिए प्रायोगिक परिणामों से पूर्णतः सहमति प्रकट करते हैं।

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प्लांक के विकिरण सूत्र से वीन तथा रैले जीन्स के नियम प्राप्त करना

वीन तथा रैले-जीन्स के नियम प्लांक नियम के ही विशेष रूप हैं –
(1).लघु तरंगदैर्ध्यों के लिए – जब λ का मान कम होता है यदि जब राशि ehc/kT का मान 1 की तुलना में बहुत अधिक होगा। अतः
ehc/kT – 1 = ehc/kT
तब प्लांक के सूत्र को निम्न प्रकार लिखा जा सकता है।
Eλdλ = \frac{8πhc}{λ^5} \frac{dλ}{e^{hc/λkT} - 1}
या
\footnotesize \boxed{ E_λdλ = \frac{8πhc}{λ^5} e^{-hc/λkT} dλ }
यही वीन का नियम है ।

(2).दीर्घ तरंगदैर्ध्यों के लिए – जब λ का मान अधिक होता है तो जब राशि ehc/λkT को (1 + \frac{hc}{λkT} ) का मान कम लिया जा सकता है, अर्थात्
Eλdλ = \frac{8πhc}{λ^5} ( \frac{1}{1 + \frac{hc}{λkT} - 1} )dλ

या Eλdλ = \frac{8πhc}{λ^5} × \frac{1}{(hc/λkT)}

या \footnotesize \boxed{ E_λdλ = \frac{8πkT}{λ^5} dλ } ….(9)
यही रैले-जीन्स का नियम है।

Note – प्लांक के विकिरण नियम से सम्बन्धित प्रशन परिक्षाओं में इस प्रकार पूछा जाता है।
Q. 1 विकिरण के उत्सर्जन एवं अवशोषण हेतु प्लांक की परिकल्पना को समझाइए ? प्लांक दोलित्र की औसत ऊर्जा के लिए व्यंजक निगमित कीजिए तथा इसकी विवेचना कीजिए ?
Q. 2 प्लांक के विकिरण सूत्र का निगमन कीजिए ? दर्शाइए कि वीन का नियम तथा रैले जीन्स का नियम इससे प्राप्त किया जा सकता है ?
Q. 3 प्लांक का विकिरण नियम क्या है ? दर्शाइए कि वीन का नियम तथा रैले-जीन्स का नियम इसकी विशिष्ट अवस्थाएं हैं ?
Q. 4 प्लांक के विकिरण सूत्र Eν.dν = ( \frac{8πhν^3dν}{c^3} )( \frac{1}{e^{hν/kT} - 1} ) को व्युत्पन्न कीजिए तथा सिद्ध कीजिए कि वीन का नियम एवं रैले-जीन्स का नियम, प्लांक सूत्र की ही विशेष परिस्थितियां हैं ?

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  1. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  2. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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