उभयनिष्ठ आधार (CB) विन्यास में PNP ट्रांजिस्टर के निवेशी व निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र खींचिए।

उभयनिष्ठ आधार (CB) विन्यास में PNP ट्रांजिस्टर के अभिलाक्षणिक वक्र

PNP ट्रांजिस्टर में विभव तथा धारा के बीच ग्राफ खींचने पर प्राप्त वक्र ‘P-N-P ट्रांजिस्टर के निवेशी व निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र’ कहलाते हैं। जैसा कि चित्र-1 में उभयनिष्ठ आधार (CB) विन्यास में PNP ट्रांजिस्टर का अभिलाक्षणिक वक्र दिखाया गया है।

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उभयनिष्ठ आधार (CB) विन्यास में PNP ट्रांजिस्टर
उभयनिष्ठ आधार (CB) विन्यास में PNP ट्रांजिस्टर

अतः चित्र-1 की सहायता से हम विभिन्न अभिलाक्षणिक वक्रों को खींच सकते हैं। अर्थात् वोल्टता के सापेक्ष धारा के परिवर्तन को यही अभिलाक्षणिक वक्र व्यक्त करते हैं।

अब हम उभयनिष्ठ आधार (CB) विन्यास में PNP ट्रांजिस्टर के निवेशी व निर्गत परिपथों के अभिलाक्षणिक वक्रों को विस्तार से सरल भाषा में अध्ययन करते हैं।

निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र

ट्रांजिस्टर में उत्सर्जक वोल्टता VE के सापेक्ष उत्सर्जक धारा IE में परिवर्तन को व्यक्त करने वाले वक्रों को ‘निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र’ कहते हैं। अतः इन वक्रों को खींचने के लिए हम संग्राहक वोल्टता VC को VC = 0 से तथा संग्राहक वोल्टता VC = 30 वोल्ट आदि पर स्थित करके रखते हैं। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

उभयनिष्ठ आधार (CB) विन्यास में PNP ट्रांजिस्टर
निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र

अब उत्सर्जक वोल्टता VBE को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं। तथा उत्सर्जक धारा IE को पढ़ते जाते हैं और आधार-उत्सर्जक वोल्टता VBE व उत्सर्जक धारा IE के बीच ग्राफ खींचते हैं। अतः इस प्रकार, प्राप्त वक्रों को ही निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र कहते हैं, जोकि चित्र-3 में प्रदर्शित है।

अर्थात् इन वक्रों से स्पष्ट होता है कि उत्सर्जक धारा IE एवं आधार-संग्राहक वोल्टता VCB पर अधिक निर्भर नहीं करती है। तथा निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र में प्रतिरोध का मान बहुत कम होता है।

निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र

निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने के लिए उत्सर्जक धारा IE के विभिन्न निश्चित मानों (1mA, 2mA, 3mA, …) पर संग्राहक-आधार वोल्टता VCB को परिवर्तित करके संग्राहक धारा IC का मान पढ़ लेते हैं। फिर इनके मध्य ग्राफ खींचते हैं जिसे चित्र-3 में दिखाया गया है।

उभयनिष्ठ आधार (CB) विन्यास में PNP ट्रांजिस्टर
निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र

अब चित्र-3 के अनुसार, संग्राहक वोल्टता VC को VC = 0.5 वोल्ट पर नियत करके उत्सर्जक धारा IE को परिवर्तित करके संग्राहक धारा IC पढ़ते जाते हैं। तथा इनके बीच ग्राफ खींचते हैं।

अतः चित्र-3 से स्पष्ट है कि संग्राहक धारा IC का मान मुख्य रूप से उत्सर्जक धारा IE पर निर्भर करता है एवं संग्राहक वोल्टता VC पर निर्भर नहीं करता है। अब जैसे ही संग्राहक वोल्टता VC की ध्रुवणता ऋणात्मक से धनात्मक होती है। इसका मान भी शीघ्रता से शून्य हो जाता है।

परन्तु यदि संग्राहक वोल्टता VC को और अधिक धनात्मक वोल्टता दे दी जाए। तब संग्राहक धारा IC की दिशा विपरीत हो जाती है तथा इसका मान भी बढ़ता जाता है।

यदि संग्राहक धारा IC का मान बहुत अधिक हो जाता है, तो ट्रांजिस्टर को नुकसान भी पहुंच सकता है।

धारा लाभ α का मान ज्ञात करना

हम चित्र-3 के अनुसार धारा लाभ का मान ज्ञात कर सकते हैं।
α = ( \frac{∆I_C}{∆I_E} )VC = नियत …(1)
अर्थात् संग्राहक धारा IC व उत्सर्जक धारा IE, (IC – IE) वक्र की प्रवणता ज्ञात करके α का मान ज्ञात कर सकते हैं।

नोट – विद्यार्थी ध्यान दें कि तीनों प्रकार के ट्रांजिस्टर परिपथों में से उभयनिष्ठ-आधार परिपथ की क्षमता सबसे अधिक होती है।

α तथा β में संबंध

हम जानते हैं कि –
α = \frac{∆I_C}{∆I_E} तथा β = \frac{∆I_C}{∆I_B}
परन्तु ∆IE = ∆IC + ∆IB
यह मान समीकरण (1) में रखने पर,
α = \frac{∆I_C}{(∆I_B + ∆I_C)}
α = \frac{∆I_C/∆I_B}{1 + ∆I_C/∆I_B}
अब \frac{∆I_C}{∆I_B} = β रखने पर, तब
अर्थात् \footnotesize \boxed{ α = \frac{β}{1 + β} }

संबन्धित प्रशन –
Q.1 उभयनिष्ठ आधार (CB) विन्यास में PNP ट्रांजिस्टर के अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने की विधि का वर्णन कीजिए परिपथ आरेख बनाइए। तथा निवेशी व निर्गत अभिलाक्षणिक वक्रों को भी समझाइए।
Q.1 P-N-P ट्रांजिस्टर में उभयनिष्ठ आधार अथवा भू-सम्पर्कित आधार विन्यास के लिए परिपथ बनाइए तथा अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने की विधि का वर्णन कीजिए। आप धारा लाभ α का मान इन वक्रों से किस प्रकार प्राप्त करोगें।

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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