विशेषता गुणांक क्या है, परिभाषा एवं सूत्र दीजिए | Quality Factor Q in Hindi

विशेषता गुणांक क्या है?

अवमन्दित दोलनी वैधुत परिपथ का विशेषता गुणांक (या गुणता कारक) परिपथ में किसी क्षण संचित ऊर्जा तथा एक आवर्तकाल में क्षय हुई ऊर्जा की निष्पत्ति का 2π गुना होता है। अर्थात् विशेषता गुणांक
Q = 2π × एकत्रित ऊर्जा/एक चक्र में क्षय ऊर्जा …(1)
चूंकि संधारित्र में संचित ऊर्जा q2 के अनुक्रमानुपाती होती है (U2 = \frac{q^2}{2C} ), अतः किसी क्षण t पर ऊर्जा U = U0e-2bt (चूंकि आवेश q का आयाम e-bt के अनुक्रमानुपाती है) तथा एक चक्र बाद ऊर्जा U’ = U0e-2b(t + T) अतः यहां T = आवर्तकाल है, इसलिए
Q = 2π × \frac{U_0e^{-2bt}}{U_0e^{-2bt} - U_0e^{-2b(t - T)}}
या Q = 2π × \frac{e^{-2bt}}{e^{-2bt} - e^{-2b(t - T)}} = 2π × \frac{1}{(1 - e^{-2bt})}
या Q = \frac{2π}{[1 - (1 - 2bt)]}
या Q = \frac{2π}{2bT} या Q = \frac{π}{bT}
चूंकि यहां b अति अल्प है, अतः b के उच्च पद छोड़ दिए गए हैं। परन्तु
T = \frac{2π}{ω} तथा b = \frac{R}{2L} इसलिए,
Q = \frac{π}{(R/2L) × (2π/ω)}
अर्थात्
Q = \frac{ωL}{R} …(2)
अतः स्पष्ट है कि Q का मान ωL/R के बराबर है तथा गुणता कारक एक विमाहीन राशि है।

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विशेषता गुणांक (Quality Factor Q in Hindi)

इसका उपयोग किसी दोलन तंत्र की दक्षता को प्रदर्शित करने के लिए प्रयोग किया जाता है इसलिए इसको “विशेषता गुणांक या दक्षतांक” कहते हैं इसे Q या φ से प्रदर्शित करते हैं। तथा,

विशेषता गुणांक φ = \frac{2πE}{P × T}

{चूंकि \frac{T}{2π} = \frac{1}{ω} } अतः

φ = \frac{E}{P / ω}

यदि अवमन्दन कम है तो, हम जानते हैं कि ;
P = 2KE

विशेषता गुणांक φ = \frac{E}{2KE / ω}

φ = \frac{ω}{2K} = ωι

स्पष्ट है कि यह एक विमाहीन राशि है।

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विशेषता गुणांक का श्रांतिकाल

हम जानते हैं कि ; अवमन्दन बल = λ \frac{dx}{dt}
न्यूटन के द्वितीय नियम से,

m \frac{dv}{dt} = – λ dv
\frac{dv}{dt} = – \frac{λ}{m} v
या \frac{dv}{dt} = \frac{2λ}{ι} v
{चूंकि \frac{λ}{m} = 2k = ι }
जहां ι = श्रांतिकाल या समय स्थिरांक है।

\frac{dv}{v} = – \frac{dt}{ι}

यदि कण का प्रारंभिक वेग v0 तथा t समय बाद अंतिम वेग u हो, तब
\int^{v}_{v_0} \frac{dv}{v} = – \frac{1}{ι} \int^t_0 dt

[loge v]uv = – \frac{t}{ι}
या loge v – loge v0 = – \frac{t}{ι}
तथा \frac{v}{v_0} = e \frac{t}{ι}
अर्थात् v = v0 e \frac{t}{ι}

अतः वेग चरघातांकी नियम के अनुसार कम होता है।
तथा यदि, t = ι

\footnotesize \boxed{v = \frac{v_0}{e}}

अतः श्रांतिकाल वह समय है, जिसमें कण का वेग अपने अधिकतम वेग का \frac{1}{e} गुना रह जाता है।
अतः इसी कारण इसको विशेषता गुणांक का श्रांतिकाल कहलाता है।

Note – विशेषता गुणांक से सम्बन्धित प्रश्न –
Q.1 वैधुत परिपथ के गुणता कारक को समझाइए?

Q. 2 विशेषता गुणांक से आप क्या समझते हैं। इसे सिद्ध कीजिए?
Q. 3 विशेषता गुणांक क्या है। परिभाषा एवं सूत्र लिखों तथा श्रांतिकाल को सिद्ध कीजिए ?

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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