किसी खोखले अहाते में विकिरण की उष्मागतिकी क्या है | Radiation in a hollow enclosure in Hindi

किसी खोखले अहाते में विकिरण की ऊष्मागतिकी

एक खोखले अहाते या बन्द बर्तन जिसकी दीवारें एक नियत ताप पर हो, तो विकिरण सिद्धान्त में इसका अधिक महत्त्व होता है, क्योंकि इसके अन्दर मिलने वाले विकिरण के विशेष गुण होते हैं। इसीलिए अब हम इसका अध्ययन करेंगे। इसके लिए “ऊर्जा घनत्व” की परिभाषा करते हैं। “ऊर्जा घनत्व से तात्पर्य प्रति एकांक आयतन में उपस्थित विकिरण ऊर्जा से है।” इस प्रकार यदि किसी क्षण किसी बिन्दु के परितः किसी आयतन dV में विकिरण ऊर्जा E हो, तो उस बिन्दु पर ऊर्जा घनत्व,
u = \frac{E}{dV}

यदि किसी समान ताप के अहाते के अन्दर का आयतन उसकी दीवारों से उत्सर्जित सभी तरंगदैर्ध्यों के विकिरणों से भरा होता है। यदि विकिरण अहाते की एक दीवार से दूसरी दीवार तक आता जाता है। तो यह विकिरण दीवारों की ऊष्मीय ऊर्जा से उत्पन्न होता है, अतः इसे ऊर्जा का ही हिस्सा समझा जाता है। इस प्रकार विकिरण की निम्न विशेषताएं होती है।

1.विकिरण अहाते की दीवारों का आकार

“यह विकिरण अहाते की दीवारों के आकार, आकृति व पदार्थ आदि के लिए, दीवारों की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता, बल्कि केवल उनके ताप पर निर्भर करता है।”
यह बात कुछ अजीब लग सकती है, क्योंकि हम सोच सकते हैं कि यदि अहाते की दीवारों पर पॉलिश करने के बजाएं उन्हें काला पोत दिया जाए, तो ऊर्जा घनत्व अधिक हो जाएगा। यद्यपि यह सही है कि काली पुती दीवारें पाॅलिश की हुई दीवारों की अपेक्षा प्रति सेकंड अधिक विकिरण उर्जा का विकिरण करेंगी, परन्तु यह जैसे ही दीवार के किसी हिस्से पर गिरेगा तुरन्त अवशोषित भी हो जाएगा, जबकि पाॅलिश की हुई सतह से उत्सर्जित विकिरण अवशोषित होने के पूर्व कई बार परावर्तित होगा। अर्थात् दोनों स्थितियों में ऊर्जा घनत्व समान होगा। इसे निम्न प्रकार सिद्ध किया जा सकता है।

विकिरण अहाते की ऊष्मागतिकी

दो अहातों M व N पर विचार कीजिए जैसा के चित्र में दिखाया गया है।

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खोखले अहाते में विकिरण

माना ये समान ताप T पर हैं परन्तु इनके आकार और इनके पदार्थ भिन्न-भिन्न है। माना विकिरण ऊर्जा का घनत्व अहाते की दीवारों के ताप तथा उनकी प्रकृति पर इस प्रकार निर्भर करता है कि M में ऊर्जा घनत्व uM अहाते N में ऊर्जा घनत्व uN से अधिक है, तो
uM > uN
अब यदि M व N के बीच एक ऐसे पर्दे S द्वारा उष्मीय सम्पर्क किया जाए जो कि विकिरण के लिए पारदर्शी हो, तब पर्दे पर N की अपेक्षा M से अधिक ऊर्जा आपतित होगी तथा पर्दे द्वारा कुछ ऊर्जा M व N को संचरित हो जाएगी। कुछ समय उपरान्त दोनों अहातों को अलग करके उन्हें ऊष्मीय साम्य प्राप्त करने दिया जाता है। क्योंकि अब N में ऊर्जा घनत्व उस पूर्व मान से अधिक है जो ताप T पर था, N कि दीवारें अहाते के स्थान से उर्जा अवशोषित करेंगी और उनका ताप बढ़ने लगेगा। इसके विपरीत M में ऊर्जा घनत्व उसके ताप T के पूर्व ऊर्जा घनत्व कम होगा। अतः M की दीवारें अन्दर के स्थान को ऊर्जा देंगी और फलतः ठण्डी होने लगेगी। स्पष्ट है कि इस प्रकार हमने दोनों अहातों के बीच बिना कोई ऊर्जा व्यय किये ही एक तपांतर उत्पन्न कर दिया है। इस तापांतर में एक कार्नो इंजन कार्य कर सकता है जो कि कुछ ऊष्मीय ऊर्जा कार्य में बदल सकता है जब तक कि दोनों के ताप बराबर न हो जाए ।
uN > uM
यदि अहाते M का ताप बढ़ेगा और N का ताप गिरेगा। यहां भी तापांतर उत्पन्न हो जाता है। पर कार्नो इंजन से कुछ ऊष्मा कार्य में बदली जा सकती है। इस प्रकार बिना कोई व्यय किए, हम सतत् यान्त्रिक कार्य प्राप्त कर सकते हैं। परन्तु यह ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम के सर्वथा विरुद्ध है। अतः हमारी प्रारंभिक परिकल्पना है कि M में ऊर्जा घनत्व N में ऊर्जा घनत्व से अलग है, जो कि सही नहीं है। “वास्तव में एक समान ताप वाले अहाते में ऊर्जा-घनत्व केवल अहाते के ताप पर निर्भर करता है, अहाते की दीवारों की प्रकृति पर नहीं।”

निष्कर्ष

पुनः यह सिद्ध करने के लिए कि अहाते में प्रत्येक तरंगदैर्ध्य से संबंधित ऊर्जा घनत्व uλ भी समान होता है, हम यह विचार करते हैं कि ताप T पर दोनों अहातों M व N के बीच एक ऐसा फिल्टर लगा हो, जिससे केवल एक तरंगदैर्ध्य का विकिरण गुजर सकता है। माना अहाते M में उर्जा घनत्व का वितरण इस प्रकार है कि λ1, λ2, λ3,…. के लिए ऊर्जा घनत्व क्रमशः u1, u2, u3,…. आदि है। इसी प्रकार माना अहाते N में तरंगदैर्ध्यों λ1, λ2, λ3,…. के लिए ऊर्जा घनत्व क्रमशः u’1, u’2, u’3,…. है। ऐसे विकिरण को ऊर्जा घनत्व का स्पेक्ट्रमी वितरण कहते हैं। हम यह भी सिद्ध करेंगे कि u1 = u’1, u’2, u’3,…. अर्थात् व्यापक रूप से सभी तरंगदैर्ध्यों के लिए uλ = u’λ माना फिल्टर से λ1 तरंगदैर्ध्यों के विकिरण गुजर सकते हैं। यदि u1 > u’1 तो अहाते M से अहाते N में ऊर्जा जाएगी और इस प्रकार M व N में एक तापांतर उत्पन्न हो जाएगा और हम एक कार्नो इंजन को इन तापांतरों के बीच लगाकर ऊष्मा के एक भाग को कार्य में परिवर्तित कर सकते हैं। यदि जब तक कि दोनों के ताप बराबर न हो जाएं। यदि u1 > u’1 शर्त बनी रहे तो फिल्टर के कारण N का ताप M के ताप से पुनः अधिक हो जाएगा (क्योंकि M का ताप बढ़ने पर M → N की और ऊष्मा चलेगी जिसमें N का ताप बढ़ेगा) और हम पुनः ऊष्मा के कुछ भाग को कार्य में परिवर्तित कर सकेंगे। बिना ऊर्जा व्यय किए कार्य प्राप्त करना, ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम का उल्लंघन है। अतः u1, u’1 से अधिक नहीं हो सकता। इसी प्रकार यह भी सिद्ध किया जा सकता है कि u’1 > u1 अतः u1 = u’1 यही निष्कर्ष सभी तरंगदैर्ध्यों के लिए लागू होता है। अर्थात् इस प्रकार यह निष्कर्ष निकालता है कि “अहाते में उपस्थित विकिरण का ऊर्जा-घनत्व केवल उसके ताप पर निर्भर करता है, अहाते की दीवारों के पदार्थ की प्रकृति पर नहीं।”

2.अहाते में विकिरण की प्रकृति

“अहाते में उपस्थित विकिरण वस्तुओं की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है।” अर्थात् इसे सिद्ध करने के लिए माना विषमांगी संरचना की एक वस्तु अहाते में रखी है। तब वस्तु के विभिन्न भागों की भिन्न-भिन्न अवशोषण व उत्सर्जन क्षमताएं होंगी । चूंकि साम्यावस्था में इसका ताप स्थिर रहता है, अतः इसके द्वारा अवशोषित ऊर्जा उसके द्वारा उत्सर्जित ऊर्जा के बराबर होगी। हम जानते हैं कि किसी वस्तु से उत्सर्जित ऊर्जा वही समान होती है चाहे अहाते के सापेक्ष उसकी स्थिति या झुकाव कुछ भी क्यों ना हो ।

निष्कर्ष

अतः यह निष्कर्ष निकलता है कि वस्तु द्वारा अवशोषित उर्जा भी समान होगी चाहे उसकी स्थिति या झुकाव को अहाते के सापेक्ष कैसे भी परिवर्तित किया जाए क्योंकि वस्तु विभिन्न पृष्ठों की अवशोषण क्षमताएं अलग-अलग है अतः यह तभी संभव है जबकि अहाते में विभिन्न दिशाओं में चलने वाला विकिरण परिमाण व गुणता दोनों में समरूप हो । अर्थात् यह विकिरण समदैशिक होता है। दूसरे शब्दों में, सभी दिशाओं में इसके समान गुण होते हैं स्पष्ट है कि यह विकिरण इसमें उपस्थित वस्तुओं की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता।

3.अहाते में रखी वस्तु का ताप

माना अहाते में रखी वस्तु का ताप उतना ही होता है जितना कि अहाते की दीवारों का ताप होता है। इसे निम्न प्रकार सिद्ध किया जा सकता हैं। माना अहाते के अन्दर एक वस्तु M रखी है माना साम्यवस्था में M का ताप अहाते के ताप से भिन्न है। तब कार्नो इंजन द्वारा ऊष्मा का स्थानान्तरण दीवारों से वस्तु M को किया जा सकता है। इस प्रक्रम में ऊष्मा का कुछ भाग कार्य में परिवर्तित हो जाएगा। इस प्रकार हम बिना ‘सिंक’ के भी ऊष्मीय ऊर्जा को कार्य में परिवर्तित कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में, हमें किसी ताप पर एक ही वस्तु द्वारा किसी दूसरी वस्तु को कम ताप पर रखे बिना ही कार्य के सतत् प्राप्ति हो सकती है, परन्तु यह ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम के विरुद्ध माना जाता है।

निष्कर्ष

अतः हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि अहाते के अन्दर रखी सभी वस्तुओं का ताप अन्ततः दीवारों से ताप के बराबर हो जाएगा। उपर्युक्त विवेचना से पता चलता हैं कि “एक समान ताप के अहाते में विकिरण अहाते की दीवारों की प्रकृति पर तथा उसमें उपस्थित वस्तुओं की आकृति पर निर्भर नहीं करता, बल्कि केवल अहाते के स्थिर ताप पर निर्भर करता है।”

Note – सम्बन्धित प्रशन –
Q. 1 किसी खोखले अहाते में विकिरण ऊर्जा की ऊष्मागतिकी को समझाइए ?
Q. 2 खोखले बाड़े में विकिरण ऊर्जा से क्या तात्पर्य है ? इसके कितने प्रकार होते हैं ? सिद्ध कीजिए ।

  1. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  2. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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