उत्क्रमणीय तथा अनुत्क्रमणीय प्रक्रम क्या होते हैं, उदाहरण, शर्तें | Reversible and Irreversible Processes in Hindi

अर्द्ध-स्थैतिक प्रक्रम क्या है

यदि किसी निकाय में कोई प्रक्रम अनन्त-सूक्ष्म गति से हो ताकि निकाय सदैव साम्यावस्थाओं के संतत अनुक्रम में रहे, तो ऐसे प्रक्रम को “अर्द्ध-स्थैतिक प्रक्रम” कहते हैं।
उदाहरण के लिए – किसी गैस के दाब में अनन्त-सूक्ष्म परिवर्तन करने पर गैस का प्रसार ‘अर्द्ध-स्थैतिक प्रसार’ होगा।
अर्द्ध-स्थैतिक प्रक्रम एक आदर्श प्रक्रम है। इसे व्यवहार में पूर्णतः प्राप्त नहीं किया जा सकता है। यह केवल कुछ दशाओं में सन्निकटतः प्राप्त हो सकता है।

1.उत्क्रमणीय प्रक्रम (Reversible Processes in Hindi)

“उत्क्रमणीय प्रक्रम उस प्रक्रम को कहते हैं जिसे बाह्य दशाओं में अल्प परिवर्तन करके, उत्क्रमित करने पर सीधे प्रक्रम में हुए सभी परिवर्तनों की विपरीत दिशा में ठीक-ठीक पुनरावृत्ति हो जाए, तथा प्रक्रम में हिस्सा लेने वाली सभी पदार्थो व बाह्य प्रतिवेश में कोई परिवर्तन न रहे।”
उदाहरण के लिए – यदि किसी निकाय को Q ऊष्मा दी जाए और उससे W कार्य प्राप्त हो तब उत्क्रमित प्रक्रम में निकाय पर W कार्य किए जाने पर उससे उतनी ही ऊष्मा Q प्राप्त होती है।

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उत्क्रमणीयता की शर्तें (Conditions of reversibility in Hindi)

कोई भी प्रक्रम तभी उत्क्रमणीय हो सकता है जब वह निम्न दो शर्तों को पूरा करता हो।

(1).”प्रक्रम में क्षयकारी बल जैसे घर्षण, श्यानता, अप्रत्यास्थता, वैद्युत प्रतिरोध, चुम्बकीय प्रतिरोध, इत्यादि पूर्णतः अनुपस्थित होने चाहिए।” माना कि एक पिस्टन युक्त बेलनाकार बर्तन में गैस भरी है। तथा बर्तन एक नियत ताप स्त्रोत के संपर्क में है। पिस्टन पर इतना भार रखा है कि पिस्टन द्वारा गैस पर लगने वाला दाब पिस्टन पर गैस द्वारा लगने वाले दाब से ठीक सन्तुलित है। यदि पिस्टन पर भार कम कर दें, तो गैस का प्रसार होगा तथा गैस पिस्टन को बाह्य दाब के विरुद्ध धकेलने में तथा पिस्टन व बर्तन की दीवारों के बीच के घर्षण-बल के विरुद्ध बाह्य कार्य करेगी। इस कार्य के लिए आवश्यक ऊष्मा स्त्रोत से ली जाएगी। अब यदि पिस्टन पर भार बढ़ाकर पहले के बराबर कर दें, तो गैस संपीडित होगी। तथा पिस्टन गैस के दाब के विरुद्ध तथा पिस्टन व बर्तन की दीवारों के बीच घर्षण के विरुद्ध कार्य करेगा। इस प्रकार प्रक्रम के समय पिस्टन को धकेलने में किया गया कार्य तो वापिस मिल जाएगा, परंतु घर्षण के विरुद्ध किया गया कार्य वापिस नहीं होगा बल्कि पिस्टन को भी घर्षण के विरुद्ध कार्य करना होगा। अतः गैस का प्रसार अनुत्क्रमणीय होगा। स्पष्ट है कि इसका कारण ‘घर्षण’ की उपस्थिति है। इसी प्रकार अन्य क्षयकारी प्रभाव जैसे अप्रत्यास्थता, वैद्युत प्रतिरोध, इत्यादि भी किसी प्रक्रम को अनुत्क्रमणीय बनाते हैं। अतः प्रक्रम के उत्क्रमणीय होने के लिए क्षयकारी बल पूर्णतः अनुपस्थित होने चाहिए।

(2).”प्रक्रम अर्द्ध-स्थैतिक होना चाहिए अर्थात् प्रक्रम की प्रत्येक स्थिति में भाग के दाब तथा ताप, बाह्य प्रतिवेश के दाब व ताप में अन्तर अनन्त-सूक्ष्म होना चाहिए, अर्थात् प्रक्रम तथा बाह्य प्रतिवेश के बीच यान्त्रिक, ऊष्मीय तथा रासायनिक साम्य बना रहना चाहिए।” जब गैस का प्रसार होता है, तो गैस द्वारा कार्य पिस्टन की गतिज ऊर्जा देने में भी किया जाता है। उत्क्रमण प्रक्रम (संपीडन) में यह कार्य वापिस नहीं होता है, बल्कि पिस्टन को गतिज ऊर्जा देने में पुनः कार्य करना पड़ता है। अतः गैस के प्रसार को उत्क्रमणीय बनाने के लिए पिस्टन पर लगने वाले गैस के दाब तथा पिस्टन द्वारा गैस पर लगाए जाने वाले दाब में अनन्त-सूक्ष्म अन्तर होना चाहिए। अर्थात् गैस बाह्य प्रतिवेश के साथ यान्त्रिक साम्य में रहनी चाहिए। इस दशा में गैस का प्रसार (अथवा संपीडन), ‘अत्यन्त धीरे-धीरे’ होगा जिससे कोई विशेष गतिज ऊर्जा उत्पन्न नहीं होगी।
गैस तथा तप्त-स्त्रोत के बीच तापान्तर होने के कारण भी अनुत्क्रमणीय उत्पन्न होती है। प्रसार के समय ऊष्मा स्त्रोत से गैस में प्रवाहित होती है परन्तु संपीडन के संभव ऊष्मा गैस से स्त्रोत में प्रवाहित नहीं होती (क्योंकि स्त्रोत ऊॅंचें ताप पर है)। यदि गैस व स्त्रोत के ताप में अनन्त-सूक्ष्म अन्तर है, तब प्रसार के समय स्त्रोत से ली गई उष्मा संपीडन के समय स्त्रोत को लौटा दी जाएगी। अतः प्रक्रम के उत्क्रमणीय होने के लिए गैस को बाह्य प्रतिवेश के साथ ऊष्मीय साम्य में होना चाहिए ।
ये शर्तें व्यवहार में कभी पूरी नहीं होती है। अतः उत्क्रमणीय प्रक्रम एक ‘आदर्श’ प्रक्रम है।

2.अनुत्क्रमणीय प्रक्रम (Irreversible Processes in Hindi)

वह प्रक्रम जिसे बिल्कुल ठीक-ठीक उत्क्रमित नहीं किया जा सकता। वह प्रक्रम “अनुत्क्रमणीय प्रक्रम” कहलाता है। सभी व्यवहारिक प्रक्रम, जैसे- जूल-टाॅमसन प्रसार, मुक्त प्रसार, तार का विधुत द्वारा गर्म होना, द्रवों तथा गैसों का विसरण, इत्यादि अनुत्क्रमणीय प्रक्रम है। सभी प्राकृतिक प्रक्रम, जैसे चालन, विकिरण, रेडियोएक्टिव क्षय, इत्यादि भी अनुत्क्रमणीय प्रक्रम है।

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q.1 उत्क्रमणीय तथा अनुत्क्रमणीय प्रक्रम क्या होते हैं ? उदाहरण दीजिए । उत्क्रमणीय प्रक्रम के लिए आवश्यक शर्तों की व्याख्या कीजिए ?
Q.2 उत्क्रमणीय तथा अनुत्क्रमणीय प्रक्रम क्या है ? उदाहरण सहित समझाइए ?

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