उपग्रह क्या है, पृथ्वी के चारों और चक्कर लगाते उपग्रहों की ऊर्जाएं | Satellite Orbiting Earth in Hindi

उपग्रह क्या है

वे आकाशीय पिण्ड जो सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं, ‘ग्रह’ कहलाते हैं जबकि वे आकाशीय पिण्ड जो ग्रह के चारों ओर चक्कर लगाते हैं, “उपग्रह (Satellites in Hindi)” कहलाते हैं। पृथ्वी एक ग्रह है क्योंकि यह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है। तथा चन्द्रमा एकमात्र प्राकृतिक आकाशीय पिण्ड है जो पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है। अर्थात् “चन्द्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है।” सभी उपग्रह, ग्रह द्वारा उपग्रह है अतः ग्रहों पर आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल के अन्तर्गत गति करते हैं।

और पढ़ें… भू-स्थिर उपग्रह किसे कहते है, पृथ्वी तल से ऊंचाई ज्ञात कीजिए

उपग्रह का पलायन वेग (Escape velocity in Hindi)

वह वेग जिससे किसी वस्तु को पृथ्वी से ऊपर की ओर फेंकने पर वह वस्तु पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र से ठीक बाहर चली जाए, ‘पलायन वेग’ कहलाता है।
माना m द्रव्यमान की एक वस्तु पृथ्वी सतह पर स्थित है। यदि पृथ्वी की त्रिज्या R का गोला मान लें, तो वस्तु की गुरूत्वीय ऊर्जा

U = – \frac{GMm}{R}

यहां (-) चिन्ह बताता है। कि वस्तु को अनन्त तक ले जाने में (यहां स्थिति ऊर्जा शून्य है) GMm/R ऊर्जा देनी होगी।
स्पष्ट है कि GMm/R से अधिक गतिज ऊर्जा वाली वस्तु पृथ्वी से पूर्ण रूप से पलायन करती है। अतः वस्तु का पलायन वेग ve लेने पर
\frac{1}{2} mv2e = \frac{GMm}{R} ….(1)
\frac{1}{2} v2e = \frac{GM}{R}
या ve = \sqrt{ \frac{2GM}{R}} ….(2)

लेकिन पृथ्वी की सतह पर,
g = \frac{GM}{R^2}
{ चूंकि \frac{GM}{R} = gR } अतः

\footnotesize \boxed{v_e = \sqrt{2gR}} ….(3)

अतः यही “पृथ्वी की सतह पर किसी वस्तु का पलायन वेग कहलाता है।” ‘अर्थात् पलायन वेग किसी वस्तु के द्रव्य मान पर निर्भर नहीं करता है।’

इसे भी पढ़ें.. केप्लर के ग्रहों की गति के नियम लिखिए एवं सिद्ध कीजिए?

उपग्रह का कक्षीय वेग (Orbital velocity in Hindi)

वह वेग जिससे किसी वस्तु को फेंकने पर वह वस्तु पृथ्वी की कक्षा में गति करने लगे, तो वह ‘कक्षीय वेग’ कहलाता है।
माना m द्रव्यमान की एक वस्तु पृथ्वी की सतह पर स्थित है। यदि पृथ्वी की त्रिज्या R का गोला मान लें, तो v0 कक्षीय वेग से वृत्ताकार कक्षा में घूम रही वस्तु के लिए अभिकेन्द्रीय बल, पृथ्वी तथा वस्तु के बीच जाने वाले गुरुत्वाकर्षण बल से प्राप्त होगा। अर्थात्
\frac{GMm}{R^2} = \frac{mv^2_0}{R}
v20 = \frac{GM}{R} ….(1)

यहां M पृथ्वी का द्रव्यमान है। अतः समीकरण (1) से,
v0 = \sqrt{ \frac{GM}{R}} ….(2)

{चूंकि \frac{GM}{R} = gR} अतः

\footnotesize \boxed{v_0 = \sqrt{gR}} ….(3)

अतः इस समीकरण को “कक्षीय वेग का अभीष्ट व्यांजक (सूत्र) कहते है।”

कक्षीय वेग तथा पलायन वेग में संबंध

पृथ्वी के समीप किसी उपग्रह का कक्षीय वेग vo = \sqrt{ \frac{GM}{R} } = \sqrt{gR} होता है तथा पृथ्वी तल से फेंकी गई किसी वस्तु का पलायन वेग ve = \sqrt{ \frac{2GM}{R} } = \sqrt{2gR} होता है। अतः
\frac{v_o}{v_e} = \frac{ \sqrt{gR} }{ \sqrt{2gR} } = \frac{1}{ \sqrt{2}}
अथवा
\footnotesize \boxed{ v_e = \sqrt{2} v_o }
यदि पृथ्वी के समीप चक्कर काटते उपग्रह का कक्षीय वेग किसी कारणवश बढ़कर \sqrt{2} गुना (अर्थात् पहले से लगभग 41% अधिक) हो जाए (अथवा उपग्रह की गतिज ऊर्जा दोगुनी हो जाये) तो वह उपग्रह अपनी कक्षा को छोड़कर पलायन कर जाएगा। अर्थात् पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र से बाहर चला जाएगा।

पढ़ें.. व्युत्क्रम वर्ग बल क्या हैं, बलों के अन्तर्गत कणों की गति ज्ञात करों?

पृथ्वी के चक्कर लगाते उपग्रह की ऊर्जाएं

माना किसी ग्रह की परिक्रमण कक्षा पृथ्वी की सतह से ‘h’ ऊंचाई पर स्थित है। अर्थात् (r = R + h) ।
अतः यहां ‘R’ पृथ्वी की त्रिज्या है, ‘r’ पृथ्वी के केंद्र से उपग्रह की दूरी तथा ‘h’ पृथ्वी की सतह से ऊंचाई है।

पृथ्वी के चारों और चक्कर लगाते उपग्रह
पृथ्वी के चारों और चक्कर लगाते उपग्रह

माना पृथ्वी का द्रव्यमान ‘M’ व उपग्रह का द्रव्यमान ‘m’ है। यदि उपग्रह की अपनी कक्षा में रेखीय चाल ‘v’ है। तो उपग्रह की वृत्तीय गति के लिए आवश्यक अभिकेंद्रीय बल = \frac{mv^2}{r} अतः पृथ्वी के द्वारा लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल

F = \frac{GMm}{r^2}
अतः \frac{GMm}{r^2} = \frac{mv^2}{r}
या v2 = \frac{GM}{r} इसलिए,

उपग्रह की गतिज ऊर्जा

K = \frac{1}{2} mv2

\footnotesize \boxed{K = \frac{1}{2} \frac{GMm}{r}} ….(1)

माना यदि उपग्रह को अनन्त दूरी से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के अंदर तक लाने में W जूल कार्य प्राप्त हो, तो उपग्रह की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा होगी

U = – W = – \int^r_∞ \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r}

U = – \int^r_∞ (- \frac{GMm}{r^2} ) \widehat{r} .d \overrightarrow{r}
या U = – \int^r_∞ (- \frac{GMm}{r^2} )dr
U = – GMm( \frac{1}{r} )r इसलिए,

और पढ़ें.. सरल आवर्त गति क्या है

उपग्रह की स्थितिज ऊर्जा

\footnotesize \boxed{U = - \frac{GMm}{r}} ….(2)

उपग्रह की कुल ऊर्जा
E = U + K

या E = – \frac{GMm}{r} + \frac{GMm}{2r}

उपग्रह की कुल ऊर्जा (E)

\footnotesize \boxed{E = - \frac{1}{2} \frac{GMm}{r}} ….(3)

अतः इन समीकरणों से स्पष्ट है। कि पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाते हुए उपग्रह की गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा तथा कुल ऊर्जा को प्रदर्शित करता है।

Note – उपग्रह से सम्बन्धित प्रश्न –

Q.1 उपग्रह क्या है ? पृथ्वी के चारों और चक्कर लगाते उपग्रहों की गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा तथा कुल ऊर्जा के व्यंजक स्थापित कीजिए ?
Q.2 पृथ्वी के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाते एक कृत्रिम उपग्रह की गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा तथा कुल ऊर्जा को सिद्ध कीजिए ?

Q.3 पृथ्वी के समीप परिक्रमा करने वाले कृत्रिम उपग्रह के कक्षीय वेग तथा पलायन वेग में संबंध लिखिए ?
Q.4 पलायन वेग तथा कक्षीय वेग में क्या अन्तर है ?

Share This Post

One thought on “उपग्रह क्या है, पृथ्वी के चारों और चक्कर लगाते उपग्रहों की ऊर्जाएं | Satellite Orbiting Earth in Hindi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *