ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम क्या है, आवश्यकता | Second Law of Thermodynamics in Hindi

ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम की आवश्यकता

ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम यान्त्रिक कार्य को पूर्णतः ऊष्मा में तथा ऊष्मा को पूर्णतः यान्त्रिक कार्य में बदला जा सकता है। यह यान्त्रिक कार्य तथा ऊष्मा की तुल्यता को बताता है। परन्तु व्यवहार में यह पाया जाता है कि यान्त्रिक कार्य तो उष्मा में पूर्णतः बदला जा सकता है। परन्तु ऊष्मा को यान्त्रिक कार्य में आवश्यक शर्तों के अंतर्गत एक सीमा तक ही बदला जा सकता है।
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम इन सीमाओं तथा शर्तों के बारे में नहीं बताता है। इसके अतिरिक्त ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम विभिन्न तापों वाली दो वस्तुओं के बीच ऊष्मा प्रवाह की दशा के बारे में कुछ नहीं बताता है। इस प्रकार ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊष्मागतिकी अध्ययन की सम्पूर्णता की दृष्टि से अपर्याप्त है। तथा ऊष्मा के दिशात्मक गुणधर्मों का ऊष्मागतिकी में समावेश करने के लिए ‘ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम की आवश्यकता’ हुई।
ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम ऊष्मा का कार्य में रूपांतरण किन शर्तों के अंतर्गत किस सीमा तक होता है तथा ऊष्मा स्थानान्तरण की दिशा क्या होती है। इस प्रकार ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम का पूरक होता है।

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ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम

ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम को निम्न दो महत्वपूर्ण कथनों के रूप में व्यक्त किया जा सकता है।

1.केल्विन-प्लांक का कथन

केल्विन तथा प्लांक ने द्वितीय नियम के कथन को निम्न प्रकार से व्यक्त किया है। जो इस प्रकार है, “ऐसे किसी भी ऊष्मा इंजन का निर्माण असम्भव है, जोकि चक्रीय प्रक्रम में किसी ऊष्मा स्त्रोत से ऊष्मा लेकर कार्यकारी निकाय में कई परिवर्तन किए बिना उसे पूर्ण रूप से कार्य में बदल दें।”
दूसरे शब्दों में, इस कथन को इस प्रकार भी व्यक्त कर सकते हैं, “किसी ऐसे व्यक्ति का बनाया जाना असंभव है जो की किसी चक्कर में कार्य करते हुए एक विद्युत स्त्रोत से उस्मान लेकर लगातार तुल्य मात्रा में कार्य को संपादित कर सके।”

2.क्लाॅसियस का कथन

यह कथन रेफ्रिजरेटर के कार्य करने के सिद्धांत पर आधारित है-
“ऐसी किसी भी स्वचालित मशीन का निर्माण असम्भव है जोकि चक्रीय प्रक्रम में किसी बाह्य उर्जा स्त्रोत से ऊर्जा लिए बिना कम ताप वाली वस्तु से ऊष्मा लेकर अधिक ताप वाली वस्तु पर पहुंचा दें।”
दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि, “ऊष्मा स्वतः ही ठण्डी वस्तु से गर्म वस्तु की ओर प्रवाहित नहीं हो सकती है।”

वास्तव में यह दोनों कथन एक ही तथ्य को प्रकट करते हैं मात्र प्रयोग किए गए शब्द भिन्न हैं। इस प्रकार ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम सिद्ध होता है।

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केल्विन-प्लांक तथा क्लॉसियस के कथनों की तुलना

उपर्युक्त कथनों से प्रतीत होता है कि केल्विन प्लांक का कथन तथा क्लॉसियस का कथन एक-दूसरे से संबन्धित नहीं है। परन्तु दोनों कथन एक-दूसरे के तुल्य हैं।
जैसा की चित्र-1 (a) में एक ऊष्मा इंजन E तथा रेफ्रिजरेटर R एक ही स्त्रोत व सिंक के बीच कार्य करते दिखाए गए हैं। स्त्रोत का ताप T1 तथा सिंक का ताप T2 (T1 > T2) है। माना कि इंजन E स्त्रोत से Q1 ऊष्मा लेकर W कार्य करता है। तथा शेष ऊष्मा को सिंक को दे देता है, इस प्रकार इंजन केल्विन-प्लांक के कथन का पालन करता है। अब माना कि रेफ्रिजरेटर R सिंक से Q2 ऊष्मा लेकर स्त्रोत को दे देता है। जैसे कि चित्र में दिखाया गया है।

ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम

अर्थात् जबकि इस पर बाह्य स्त्रोत द्वारा कोई कार्य नहीं हुआ। अतः रेफ्रिजरेटर को आपस में जोड़कर एक ऐसी स्वचालित मशीन बनाएं, कि चक्रीय प्रक्रम में कार्य करें जैसा कि चित्र-1 (b) में दिखाया गया है, तो यह मशीन प्रत्येक चक्र में स्त्रोत से (Q1 – Q2) ऊष्मा लेगी (क्योंकि स्त्रोत Q1 ऊष्मा देता है तथा Q2 ऊष्मा लेता है) तथा सम्पूर्ण ऊष्मा (Q1 – Q2) को कार्य में बदलकर सिंक को कुछ भी ऊष्मा नहीं देता क्योंकि सिंक Q2 ऊष्मा प्राप्त करता है तथा Q2 ही ऊष्मा देता है। स्पष्ट है कि यह मशीन केल्विन प्लांक के नियम का उल्लंघन करती है।

अब चित्र-2 (a) में एक रेफ्रिजरेटर R तथा एक ऊष्मा इंजन E एक ही स्त्रोत व सिंक के बीच कार्य करते हुए दिखाए गए हैं। माना कि रेफ्रिजरेटर सिंक से Q2 ऊष्मा लेता है। इस पर बाह्य ऊर्जा स्त्रोत से कार्य W = Q1 किया जाता है जिससे यह (Q1 + Q2) ऊष्मा स्त्रोत को दे देता है। इस प्रकार रेफ्रिजरेटर क्लाॅसियस के कथन का पालन करता है। माना कि इंजन E स्त्रोत से ऊष्मा Q1 लेकर उसे पूर्णतः कार्य में बदल देता है। अर्थात् Q1 = W तथा सिंक को कुछ भी ऊष्मा नहीं देता है। इस प्रकार यह इंजन केल्विन के नियम का उल्लंघन करता है। जैसा की चित्र में दिखाया गया है।

ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम

अब यदि इंजन तथा रेफ्रिजरेटर को आपस में जोड़ दिया जाए तथा एक ऐसी स्वचालित मशीन बनाएं, जो कि चक्रीय प्रक्रम में कार्य करें। जैसा कि चित्र-2 (b) दिखाया गया है। यदि मशीन प्रत्येक चक्र में सिंक से Q2 ऊष्मा लेगी (क्योंकि सिंक Q2 ऊष्मा देता है तथा कुछ भी ऊष्मा प्राप्त नहीं करता) तथा इस ऊष्मा को स्त्रोत द्वारा स्थानांतरित कर देगी क्योंकि स्त्रोत Q1 ऊष्मा देता है। तथा (Q1 + Q2) ऊष्मा प्राप्त करता है। जबकि इस पर बाह्य ऊर्जा स्त्रोत द्वारा कुछ भी कार्य नहीं किया जाता है। ‘स्पष्ट है कि यह मशीन क्लाॅसियस के कथन का उल्लंघन करती हैं।’ उपर्युक्त व्याख्या से स्पष्ट है कि ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम दोनों कथनों में से किसी एक कथन का उल्लंघन होने पर दूसरे कथन का उल्लंघन स्वतः ही हो जाता है। अतः ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम के दोनों कथन एक-दूसरे के तुल्य होते हैं।

Note – सम्बन्धित प्रश्न
Q. 1 ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम के केल्विन-प्लांक तथा क्लॉसियस के कथन को लिखिए ?
Q. 2 ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम की आवश्यकता समझाइए। इसके दोनों कथनों का उल्लेख कीजिए तथा तुल्यता को भी सिद्ध कीजिए ?
Q. 3 ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम क्या है ? केल्विन प्लांक तथा क्लॉसियस के कथनों की तुलना कीजिए ?

  1. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
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