सरल आवर्त गति क्या है, सरल आवर्ती दोलित्र किसे कहते हैं | Simple Harmonic Motion in Hindi

सरल आवर्त गति की परिभाषा

यदि जब कोई कण अपनी माध्य स्थिति से इधर-उधर सरल रेखा में गति करता है। तब उसमें उत्पन्न प्रत्यानयन बल सदैव विस्थापन के समानुपाती होता है। तथा सदैव मध्य बिन्दु की दिशा में होता है। इस प्रकार की गति को “सरल आवर्त गति (simple harmonic motion in Hindi)” कहते हैं। जो दोलित्र सरल आवर्त गति करता है। उसे आवर्ती दोलित्र कहते हैं

सरल आवर्त गति
सरल आवर्त गति

अर्थात् वह तन्त्र जिसकी गति सरल आवर्त गति होती है “सरल आवर्ती दोलक” कहलाता है। कम आयाम के लिए सरल लोलक की गति, दृढ़ आधार से लटके हुए सर्पिल स्प्रिंग के किसी सिरे पर जुड़े हुए द्रव्यमान की गति तथा किसी चुम्बकीय क्षेत्र में स्वतन्त्रता पूर्वक लटकती हुई चुम्बक की गति और L-C सर्किट में संधारित्र के विसर्जन के रोशन आदि सरल आवर्त गति के उदाहरण हैं।

सरल आवर्त गति का अवकल समीकरण

माना कि चित्र-1 के अनुसार, कोई M द्रव्यमान का कण बिंदु O के इधर-उधर सरल आवर्त गति कर रहा है। जिसका आयाम a है। किसी समय दूसरी स्थिति P है। तब, प्रत्यानयन बल
F ∝ -x या F = – cx
या m \frac{d^2x}{dt^2} = – cx

यहाॅ (-) चिन्ह यह दर्शाता है। कि कण पर लगने वाला बल सदैव विस्थापन की विपरीत दिशा में होता है, तो
\frac{d^2x}{dt^2} + \frac{c}{m} x = 0 ….(1)
{चूंकि \frac{c}{m} = ω2} रखने पर, तब

\footnotesize \boxed{ \frac{d^2x}{dt^2} + ω^2x = 0} ….(2)

“यही सरल आवर्त गति का अवकल समीकरण कहलाता है।”

इसे भी पढ़े… व्युत्क्रम वर्ग बल क्या हैं? बलों के अन्तर्गत कणों की गति ज्ञात करों।

सरल आवर्त गति के अवकल समीकरण का हल

इस समीकरण (2) को हल करने के लिए इसमें 2 \frac{dx}{dt} से गुणा करते हैं, तो

2 \frac{dx}{dt} . \frac{d^2x}{dt^2} + ω2.2x \frac{dx}{dt} = 0

अब इस समीकरण का समाकलन करने पर,
( \frac{dx}{dt} )2 + ω2x2 = A ….(3)

जहां A एक समाकलन स्थिरांक हैं।

माना जब विस्थापन अधिकतम है, तब x = a तथा \frac{dx}{dt} = 0
तो समीकरण (3) से ,
0 + ω2a2 = A या A = ω2a2

A का मान समीकरण (3) में रखने पर,
( \frac{dx}{dt} )2 + ω2x2 = ω2a2

( \frac{dx}{dt} )2 = ω2 (a2 – x2)

\footnotesize \boxed{ \frac{dx}{dt} = ω \sqrt{(a^2 - x^2)}} ….(4)
या v = ω \sqrt{(a^2 - x^2)}

यह सरल आवर्त गति के कण के वेग को प्रदर्शित करता है, अतः समीकरण (4) से,
\frac{dx}{ \sqrt{(a^2 - x^2)}} = ωdt

दोनों ओर अवकलन करने पर,
Sin-1 ( \frac{x}{a} ) = ωt + φ
या x = a Sin(ωt + φ) …..(5)

यहाॅ φ समाकलन स्थिरांक हैं। जब t = 0, तब x = 0 अतः φ = 0 तो,

\footnotesize \boxed{x = a Sinωt} …(6)

अतः समीकरण (6) से स्पष्ट होता है, कि “यह सरल आवर्त गति का अवकल समीकरण का अभीष्ट हल है।” अतः समीकरण (5) में ‘a’ कण का अधिकतम विस्थापन है। तथा φ कला नियतांक हैं।

सरल आवर्त गति की विशेषताएं

सरल आवर्त गति करते हुए कण की विशेषताएं निम्नलिखित हैं –

  • कण की गति सरल रेखा में एक स्थिर बिन्दु के इधर-उधर होती है।
  • कण पर लगने वाला प्रत्यानयन बल अथवा त्वरण, सदैव उस स्थिर बिन्दु से कण के विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होता है।
  • इस बल या त्वरण की दिशा सदैव उस स्थिर बिन्दु की ओर होती है। अर्थात् विस्थापन की दिशा के विपरीत होती है।
  • किसी माध्यम में उर्जा हास के नगण्य होने की स्थिति में कण की कुल यांत्रिक ऊर्जा, आयाम, दोलन काल तथा आवृत्ति नियत रहते हैं।
  • कण का आवर्तकाल एवं आवृत्ति, कण के आयाम पर निर्भर नहीं करती हैं।

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आवर्तकाल क्या है (Time period in Hindi)

सरल आवर्त गति करते हुए कण द्वारा 1 कम्पन में लगा समय सरल आवर्त गति का “आवर्तकाल (T)” कहलाता है। अतः सरल आवर्त गति की परिभाषा से स्पष्ट है कि 2x/ω कला में परिवर्तन होने के पश्चात कण अपनी पूर्व स्थिति को प्राप्त करेगा। अतः
x = a Sinω [t + \frac{2π}{ω} ]

अर्थात् \frac{2π}{ω} ही कण का आवर्तकाल होगा। तो,
T = \frac{2π}{ω}

{चूंकि ω = \sqrt{ \frac{m}{c}} तो,

\footnotesize \boxed{T = 2π \sqrt{ \frac{m}{c}}}

ω को कोणीय आवृत्ति कहते हैं। “यही आवर्तकाल सूत्र कहलाता है।”

आयाम क्या है (Amplitude in Hindi)

सरल आवर्त गति करते हुए कण की अपनी साम्य स्थिति से किसी एक और अधिकतम विस्थापन, सरल आवर्त गति का “आयाम” कहलाता है। अतः समीकरण (6) में Sinωt का अधिकतम मान 1 है। अतः विस्थापन x का अधिकतम मान a होगा। तथा यह निर्देश वृत्त की त्रिज्या के बराबर है।

आवृत्ति क्या है (Frequency in Hindi)

सरल आवर्त गति करते कण द्वारा 1 सेकण्ड में किए गए कम्पनों की संख्या को सरल आवर्त गति की “आवृत्ति (n)” कहते हैं। आवृत्ति, आवर्तकाल के व्युत्क्रम के बराबर होती है।
n = \frac{1}{T} = \frac{ω}{2π}

कला क्या है (Phase in Hindi)

जब कोई कण कम्पन करता है तो भिन्न-भिन्न क्षणों पर उसकी स्थिति तथा गति की दिशा भिन्न-भिन्न होती है। किसी क्षण कम्पन कण की “कला” को उस क्षण की स्थिति तथा गति की दिशा को व्यक्त करती है।

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सरल आवर्ती दोलित्र की औसत ऊर्जा

सरल आवर्ती दोलित्र किसे कहते हैं। इसके बारे में हम पिछले अध्याय में पड़ चुके हैं । इसमें हम सरल आवर्ती दोलित्र की औसत ऊर्जा के बारे में सरल भाषा तथा विस्तार से अध्ययन करेंगे । माना

औसत गतिज ऊर्जा – दोलित्र की औसत गतिज ऊर्जा K1 है, तो

K1 = \int^T_0 K dt

K1 = \frac{1}{T} \int^T_0 ( \frac{1}{2} mv2) dt ….(6)

अब समीकरण (5) से,
\frac{dx}{dt} = v = aω Cos(ωt + φ)

अतः समीकरण (6) से,
K1 = \frac{1}{T} \int^T_0 \frac{1}{2} ma2ω2 Cos2(ωt + φ)dt
या K1 = \frac{ma^2ω^2}{2T} \int^T_0 \frac{1}{2} [1 + Cos(2ωt + φ)]dt
या K1 = \frac{1}{4} \frac{ma^2ω^2}{(2π/ω)} \frac{2π}{ω}

{चूंकि T = \frac{2π}{ω} }
K1 = \frac{1}{4} ma2ω2

\footnotesize \boxed{K_1 = \frac{1}{4} ca^2}

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औसत स्थितिज ऊर्जा – दोलित्र की औसत गतिज ऊर्जा U2 है, तो

U2 = \frac{1}{T} \int^T_0 U dt

U2 = \frac{1}{T} \int^T_0 ( \frac{1}{2} cx2) dt

U2 = \frac{1}{T} \int^T_0 \frac{1}{2} c.a2 Sin2(ωt + φ) dt

U2 = \frac{ca^2}{2T} \int^T_0 Sin2(ωt + φ) dt
अतः \footnotesize \boxed{U_2 = \frac{1}{2} ca^2}

दोलित्र की औसत ऊर्जा – E = K1 + U2

E = \frac{1}{4} ca2 + \frac{1}{4} ca2

\footnotesize \boxed{E = \frac{1}{2} ca^2 = स्थिरांक}

अतः समीकरणों से स्पष्ट होता है कि “सरल आवर्ती दोलित्र की औसत गतिज ऊर्जा में औसत यान्त्रिक ऊर्जा स्थिर (नियत) रहती है।” यही ‘सरल आवर्ती दोलित्र की औसत ऊर्जा’ कहलाती है।

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Note – सरल आवर्त गति से सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 सरल आवर्त गति किसे कहते हैं? इसके लिए अवकल समीकरण को ज्ञात कीजिए, तथा इसके लिए वेग, विस्थापन तथा आवर्तकाल के लिए सूत्र स्थापित कीजिए?
Q. 2 सरल आवर्त गति की परिभाषा दीजिए। सरल आवर्त गति के लिए अवकल समीकरण प्राप्त कीजिए तथा इसको हल कीजिए? दिखाइए की सरल आवर्त गति में यान्त्रिक ऊर्जा स्थिर रहती है?
Q. 3 सरल आवर्त गति किसे कहते हैं। इसके समीकरण को स्थापित कीजिए? तथा आवर्तकाल का सूत्र लिखिए?

निष्कर्ष – हमें उम्मीद है कि यह आर्टिकल आपको पसन्द आया होगा तो इसे अपने दोस्तों में भेजें और यदि कोई सवाल या क्योरी हो, तो आप हमें कमेंट्स कर के बताएं हम जल्द ही उसका हल प्राप्त कर देंगे।

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