सरल लोलक की गति क्या है, आवर्तकाल का सूत्र ज्ञात करो | Simple Pendulum in Hindi

सरल लोलक क्या है

यदि जब एक भारी बिंदुवत् पिण्ड को एक चिकने ऐंठन रहित, ठोस व भारी लंबी डोरी से लटकाया जाता है, तो उस प्रतिबंध को ‘सरल लोलक (Simple Pendulum in Hindi)’ कहते हैं।

सरल लोलक के आवर्तकाल का सूत्र

माना कि m द्रव्यमान के पिंड को l लंबाई की डोरी से बांध दिया गया है। तथा इसे अल्प कोणीय विस्थापन (θ) दिया गया है तब पिंड पर बल आघूर्ण (I) होगा। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

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सरल लोलक
सरल लोलक

तथा बिंदु O के सापेक्ष प्रत्यानयन बल युग्म mgl sinθ होगा । अतः पिंड की गति का समीकरण,
I \frac{d^2θ}{dt^2} = – mgl sinθ
या I \frac{d^2θ}{dt^2} + mgl sinθ = 0

यदि θ का मान कम रखा जाए तो sinθ = θ अतः

I \frac{d^2θ}{dt^2} + mgl θ = 0
या \frac{d^2θ}{dt^2} + \frac{mgl}{I} θ = 0 ….(1)

तथा यह एक सरल आवर्त गति का समीकरण कहलाता है। जिसका आवर्तकाल
T = 2π \sqrt{ \frac{I}{mgl}}

{चूंकि I = ml2}

T = 2π \sqrt{ \frac{ml^2}{mgl}}

\footnotesize \boxed{T = 2π \sqrt{ \frac{l}{g}}} …(2)

“यही सरल लोलक के आवर्तकाल का सूत्र कहलाता है।”

सेकण्ड लोलक क्या है

यदि किसी लोलक का आवर्तकाल 2 सेकंड हो, तो उसे “सेकण्ड लोलक (second’s pendulum in Hindi)” कहते हैं। अतः सरल लोलक का आवर्तकाल T के सूत्र में T = 2 सेकंड रखने पर,
2 = 2π \sqrt{ \frac{l}{g}}
अथवा
l = \frac{g}{π^2}
अतः किसी स्थान पर g का मान ज्ञात होने पर उस स्थान पर सेकंड लोलक की लंबाई ज्ञात की जा सकती है। पृथ्वी तल पर g का मान 9.8 मोटर/सेकंड2 लेने पर सेकंड लोलक की लंबाई
l = \frac{9.8}{(3.14)^2} = 0.99 मीटर
अर्थात्
l \simeq 1 मीटर

अतः पृथ्वी तल पर सेकंड लोलक की लंबाई लगभग 1 मीटर होती है। चन्द्रमा के तल पर g का मान लगभग g/6 होता है। अतः वहां सेकंड लोलक की लंबाई लगभग 1/6 मीटर अथवा 16.6 सेमी होगी।

सरल लोलक के आवर्तकाल को प्रभावित करने वाले कारक

1.लोलक के आवर्तकाल की आयाम पर निर्भरता – लोलक के सूत्र से यह पता चलता है कि इसका आवर्तकाल आयाम पर निर्भर नहीं करता। परन्तु यह केवल छोटे आयामों के लिए ही सत्य हैं।

2.लोलक के आवर्तकाल की प्रभावी लम्बाई पर निर्भरता – लोलक के सूत्र से यह भी पता चलता है कि लोलक का आवर्तकाल T, लोलक की प्रभावी लंबाई l के वर्गमूल के अनुक्रमानुपाती होता है। यदि लोलक की लंबाई बढ़ाकर चार गुनी कर दें, तो आवर्तकाल दोगुना हो जाएगा।

3.लोलक के आवर्तकाल की पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भरता – लोलक का आवर्तकाल गुरुत्वीय त्वरण g के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। जब किसी लोलक घड़ी को पहाड़ पर अथवा में ले जाया जाता है तो g का मान घटने से इसका आवर्तकाल बढ़ जाता है।
अर्थात् उपग्रह के भीतर प्रत्येक वस्तु भारहीनता की अवस्था में होती है अर्थात् g का प्रभावी मान शून्य होता है। अतः उपग्रह के भीतर लोलक दोलन नहीं करेगा अर्थात् वहां लोलक वाली घड़ी कार्य नहीं कर सकती है।

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Note – मरोड़ी लोलक या ऐंठन लोलक क्या हैं?

मरोड़ी या ऐंठन लोलक क्या हैं

यदि किसी चिकने लंबे एवं मजबूत तार के एक सिरे को दृढ़ वस्तु से बांध दिया जाता है, तथा दूसरे सिरे पर एक भारी वस्तु जैसे गोल डिस्क को केंद्र से बांधकर लटका दिया जाता है, तो इस व्यवस्था को “मरोड़ी लोलक या ऐंठन लोलक (Torsional pendulum in Hindi)” कहते हैं।

ऐंठन लोलक
ऐंठन लोलक

यदि जब किसी गोला चकती को क्षैतिज तल में घुमाकर किसी तार में ऐंठन उत्पन्न करके छोड़ दिया जाता है, तब यह एक सरल आवर्त गति में निश्चित आवर्तकाल से मरोड़ी दोलन करने लगता है। अतः

यदि गोले को θ कोण से घुमा दिया जाता है। तब तार में प्रत्यानयन बलयुग्म, Cθ उत्पन्न होगा, जहां C( = \frac{πηr^4}{2l} ) तार में एकांक ऐंठन के लिए बल युग्म है। यहां तार की लंबाई l एवं r त्रिज्या तथा η तार के पदार्थ का दृढ़ता गुणांक कहलाता है। इस बल के कारण गोले या चकती में \frac{d^2θ}{dt^2} कोणीय त्वरण उत्पन्न हो जाता है। जिससे गोले पर प्रत्यानयन बल आघूर्ण I \frac{d^2θ}{dt^2} कार्य करने लगता है। यहां I गोले या डिस्क का जड़त्व आघूर्ण है।
अब यदि लोलक की गति का समीकरण,

I \frac{d^2θ}{dt^2} + Cθ = 0
या \frac{d^2θ}{dt^2} + \frac{C}{I} θ = 0 …..(3)

यह एक सरल आवर्त गति का समीकरण है। अता मरोड़ी लोलक की गति एक सरल आवर्त गति होगी। तथा जिसका आवर्तकाल

\footnotesize \boxed{T = 2π \sqrt{ \frac{I}{C}}} …..(4)

अतः यह दोलक का कोणीय आयाम के अधिकतम मान के लिए भी आवर्त गति करेगा। यदि तार प्रत्यास्थ सीमा को पार नहीं कर लेता है। तब अवकलन समीकरण को हल करने पर प्राप्त समीकरण
θ = θ0 sin(ωt + φ) …..(5)

अतः “यह एक गोला या डिस्क के कोणीय विस्थापन को दर्शाता है।”

Noet – सरल लोलक से सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 सरल लोलक के आवर्तकाल का व्यांजक ज्ञात कीजिए? तथा दिखाइए की इनकी गति सरल आवर्त गति होती है?
Q. 2 मरोड़ी लोलक किसे कहते हैं। इसके आवर्तकाल का सूत्र ज्ञात करो तथा सिद्ध करो कि इनकी गति सरल आवर्त गति होती है?
Q. 3 निम्नलिखित के आवर्तकाल का व्यांजक ज्ञात कीजिए? तथा दिखाइए कि इसकी गति सरल आवर्त गति होती है?
(1) सरल लोलक तथा
(2) मरोड़ी लोलक या ऐंठन लोलक क्या है?

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