एक डायोड AM संसूचक की भांति कैसे उपयोग होता है | Single Diode AM Detector in Hindi

एक डायोड AM संसूचक के रूप में

यदि एक रैखिक संसूचक के लिए p-n संधि डायोड का उपयोग करें, तो इसका एक अभिलाक्षणिक वक्र के रैखिक भाग यह प्रयुक्त होता है। तथा डायोड के दिष्टकारी गुण का उपयोग किया जाता है। इसमें निर्गत वोल्टेज (अथवा धारा) का आयाम निवेशी वोल्टेज (अथवा धारा) के आयाम के अनुक्रमानुपाती होता है। यदि एक डायोड AM संसूचक का एक रैखिक डायोड संसूचक के लिए विद्युतीय परिपथ को चित्र-1 में दिखाया गया है।

इसे भी पढ़ें… p-n संधि डायोड क्या है? के उपयोग (p-n Junction Diode in Hindi)

एक डायोड AM संसूचक
चित्र-1. एक डायोड AM संसूचक की भांति

चित्र से स्पष्ट है कि संधारित्र C फिल्टर परिपथ की भांति कार्य करता है

एक डायोड AM संसूचक की कार्यविधि

यदि निवेशी आयाम माॅडुलित तरंग को एक ट्रांसफार्मर की प्राथमिक कुंडली पर लगाकर डायोड पर आरोपित करते हैं तो ट्रांसफार्मर की द्वितीयक कुंडली और C1 को मिलाकर अनुनादी परिपथ बनाते हैं। तथा संधारित्र C1 की धारिता बदलकर इस प्रकार संयोजित किया जाता है कि यह परिपथ निवेशी सिग्नल के साथ अनुनादी हो जाए, और प्रतिरोध R व संधारित्र C मिलकर एक टैंक परिपथ बनाते हैं। संधारित्र C उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों को उपस्थित कर देता है और प्रतिरोध R के सिरों पर श्रव्य आवृत्ति वोल्टेज प्राप्त हो जाता है जिसमें AC तथा DC दोनों अवयव उपस्थित होते हैं। इनमें से केवल AC अवयव को C2 अपने में से होकर गुजरने देता है और RC के सिरों पर केवल AC श्रव्य आवृत्ति सिग्नल प्राप्त हो जाता है।

पढ़ें… ट्रांजिस्टर का आयाम माॅडुलेटर के रूप में उपयोग क्यों किया जाता है?

एक डायोड AM संसूचक का सिद्धान्त

जब निवेशी परिपथ में आयाम मॉडुलित सिग्नल लगाया जाता है तो डायोड के दिष्टिकरण गुण के कारण निर्गत वोल्टेज सिग्नल में ऋणात्मक अर्द्ध भाग गायाब हो जाता है और केवल धनात्मक अर्द्ध भाग ही शेष रहता है। इसमें से रेडियो आवृत्ति (ωc + ωm) तथा (ωc – ωm) का धारा अवयव संधारित्र से होकर उप-पथित हो जाता है। तथा श्रव्य आवृत्ति ωm का अवयव RL से होकर प्रभावित होता है जिसके संगत निर्गत श्रव्य वोल्टेज V0 प्राप्त हो जाता है।

इसे भी पढ़ें… मॉडुलन की गहराई से क्या तात्पर्य है?, इसका व्यंजक व सूचकांक ज्ञात करो।

एक डायोड AM संसूचक का निर्गत वोल्टेज

माना यदि माॅडुलेशन की गहराई ma है तो संसूचक के द्वारा संयोजित किया जा सकने वाली अधिकतम आवृत्ति
ωch = \frac{1}{RCm_a}
अथवा
fmh = \frac{1}{2πRCm_a} …(1)
यदि (ec)AM = Ec[1 + macosωmt]cosωct समीकरण में निवेशी आयाम माॅडुलित वोल्टेज है तब r डायोड प्रतिरोध व RL लोड प्रतिरोध है तो डायोड से धारा
i = \frac{E_c}{(r + R)} [1 + macosωmt]cosωct …(2)
अब संधारित्र C से ωc आवृत्ति की वाहक तरंग उप-पथित हो जाती है तो लोड प्रतिरोध RL से प्रवाहित धारा का औसत मान
iav = \frac{E_c}{π(r + R)} + \frac{m_aE_ccosω_mt}{π(r + R)} …(3)
अतः लोड प्रतिरोध RL के सिरों पर निर्गत वोल्टेज V0 = iavR हो तो
V0 = \frac{E_cR}{π(r + R)} + \frac{m_aE_cR}{π(r + R)} cosωmt …(4)
अर्थात् समीकरण (4) ही एक डायोड AM संसूचक का निर्गत वोल्टेज का व्यंजक कहलाता है।

Note – संबन्धित प्रशन –
Q.1 एक रैखिक संसूचक के रूप में p-n संधि डायोड के उपयोग को समझाइए।
Q.2 एक डायोड AM संसूचक की भांति कैसे उपयोग में आता है? इसकी कार्य विधि सिद्धांत परिपथ आरेख और व्यंजक स्थापित कीजिए।

Read More –

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *