स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम की प्रयोगशाला विधि क्या है | Verification of Stefan’s Law Experiment in Hindi

स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम

सन् 1897 में ल्यूमर एवं प्रिंग्जहाइन ने 100°C तथा 1300°C तापों के बीच स्टीफन के नियम का प्रयोग द्वारा सत्यापन किया। उनके द्वारा प्रयुक्त उपकरण को चित्र में दिखाया गया है।

इसे भी पढे़… स्टीफन नियतांक की प्रयोगशाला विधि क्या है? Stefan’s constant value in Hindi

स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम
स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम

स्टीफन-बोल्ट्जमैन की प्रयोगशाला विधि

इसमें दो कृष्णिकाएं M तथा N प्रयुक्त की जाती है। कृष्णिका M को बोलोमीटर के मानकीकरण में प्रयुक्त किया जाता है। कृष्णिका M तांबे का बना दोहरी दीवार वाला एक बर्तन होता है जिसके भीतर की दीवार को काला कर दिया जाता है। तथा दीवारों के बीच के रिक्त स्थान में उबलता हुआ जल भर दिया जाता है। इस प्रकार बर्तन M, 100°C नियत ताप पर एक कृष्णिका की भांति कार्य करता है। कृष्णिका M का मुंह जल शीतलन शटर O से बन्द किया जा सकता है। इस प्रकार कृष्णिका M से आने वाले विकिरण को रोका जा सकता है। कृष्णिका N का चयन प्रायोगिक ताप की परास पर निर्भर करता है। 200°C से 600°C तक के तापों के लिए तांबे का एक खोकला गोला लिया जाता है।

इस गोले की भीतरी सतह पर प्लैटिनम की कालिख पुती रहती है तथा यह संगलित सोडियम व पोटेशियम नाइट्रेटों के ऊष्मक में रखा होता है। कृष्णिका N जिस ऊष्मक में रखी होती है, उसके ताप को किसी भी वांछित मान पर नियत रखा जा सकता है। ऊष्मक के ताप वैद्युत् युग्म थर्मामीटर T के द्वारा मापा जाता है। उत्सर्जित विकिरण की तीव्रता मापने के लिए M व N के बीच एक ल्यूमर कर्लबोम बोलोमीटर G होता है, जो एक बर्तन में रखा रहता है। इस बर्तन में अनेक जल शीतलक शटर लगे होते हैं। बर्तन P को एक पैमाने पर सरकाया जा सकता है।

और पढे़.. प्लांक का विकिरण क्वांटम नियम क्या है? प्लांक की परिकल्पना (Planck’s Hypothesis in Hindi)

और पढे़… विकिरण संबंधी किरचॉफ का नियम क्या है? (kirchhoff’s Radiation Law in Hindi)

और पढे़… विकिरण संबंधी स्टीफन का नियम क्या है? (Stefan’s Law of Radiation in Hindi)

स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम का सत्यापन

सर्वप्रथम शटर O को उठाकर कृष्णिका M से आने वाले विकिरण को बोलोमीटर G पर डाला जाता है। अब बोलोमीटर को कृष्णिका M से विभिन्न दूरियों पर रखकर बोलोमीटर से जुड़े धारामापी में विक्षेप को पढ़ लिया जाता है। यह पाया जाता है कि विक्षेप सदैव बोलोमीटर G तथा कृष्णिका M के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अतः यह माना जा सकता है कि बोलोमीटर का विक्षेप आपतित विकिरण ऊर्जा के अनुक्रमानुपाती होता है।
अब कृष्णिका N को घेरे हुए ऊष्मक को किसी नियत ताप T तक गर्म किया जाता है तथा जल शीतलक शटर O को उठाकर N से आने वाले विकिरण को बोलोमीटर G पर डाला जाता है। अब ऊष्मक को विभिन्न नियत तापों तक गर्म करके संगत धारामापी में विक्षेपों को पढ़ लिया जाता है।
यदि कृष्णिका N के ताप T पर धारामापी में विक्षेप x हो तथा जल शीतलक शटर O’ का तापांतर हो, तो
x ∝ (T4 – T40)
अथवा
x = K(T4 – T40)

यहां K एक स्थिरांक है। कृष्णिका N के विभिन्न तापों के लिए K का मान एक ही प्राप्त होता है। इससे स्टीफन के नियम की सत्यता सिद्ध हो जाती है।

Note – सम्बन्धित प्रशन –
Q. 1 प्रयोगशाला में स्टीफन के नियम का आप किस विधि से सत्यापन करते हैं ?
Q. 2 स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम क्या है ? तथा प्रयोगशाला में इस विधि का सत्यापन कैसे करते हैं ।

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *