विकिरण संबंधी स्टीफन का नियम क्या है | Stefan’s Law of Radiation in Hindi

स्टीफन का नियम

जैसे-जैसे किसी पृष्ठ का ताप बढ़ता है, वैसे-वैसे उस पृष्ठ से अधिकाधिक विकिरण ऊर्जा उत्सर्जित होती है। इस संबंध में वैज्ञानिक स्टीफन ने सन् 1879 में एक नियम का प्रतिपादन किया जिसे “स्टीफन का नियम” कहते हैं। इस नियम के अनुसार, “किसी आदर्श कृष्णिका के एकांक पृष्ठ क्षेत्रफल से प्रति सेकण्ड उत्सर्जित होने वाली विकिरण ऊर्जा उस कृष्णिका के परम ताप के चतुर्थ घात के अनुक्रमानुपाती होती है।”
यदि किसी आदर्श कृष्णिका का परमताप T है। तथा उसके एकांक पृष्ठ क्षेत्रफल से प्रति सेकण्ड उत्सर्जित विकिरण ऊर्जा E हो, तो स्टीफन के नियमानुसार,
E ∝ T4
अथवा
\footnotesize \boxed{ E = σT^4 }
यहां σ एक नियतांक है जिसे ‘स्टीफन नियतांक’ कहते हैं। तथा σ का मात्रक जूल/(मीटर2-सेकण्ड-K4) अथवा वाट/मीटर2-K4 होता है।

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सन् 1884 में बोल्ट्जमैन ने इस नियम का सैद्धान्तिक प्रमाण दिया तथा सिद्ध किया था। कि स्टीफन का नियम केवल आदर्श कृष्णिका के लिए ही लागू होता है। अतः यह नियम ‘स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम’ भी कहलाता है।
स्टीफन का नियम किसी वस्तु के ठण्डे होने की दर नहीं बताता, क्योंकि ठण्डे होने की दर वस्तु के आस-पास के ताप पर भी निर्भर करती है।
“माना यदि परम ताप T1 पर एक आदर्श कृष्णिका को जब परम ताप T2 के वातावरण में रखा जाता है, तो वस्तु के प्रति एकांक क्षेत्रफल से विकिरण उत्सर्जन की दर E1 = σT41 तथा कृष्णिका द्वारा प्रति एकांक क्षेत्रफल द्वारा विकिरण अवशोषण की दर E2 = σT42 होती है।”
अतः एक आदर्श कृष्णिका के एकांक क्षेत्रफल से विकिरण ऊर्जा के क्षय होने की दर निम्न होती है, जिसे “स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम” (Stefan-Boltzmann’s law in Hindi) कहते हैं।
\footnotesize \boxed{ E = σ(T^4_1 - T^4_2) }

स्टीफन नियम की ऊष्मागतिक उपपत्ति

माना कि एक ABCD सिलिण्डर है, जिसकी दीवारें पूर्णतः परिवर्तित करने वाली हैं। तथा इसके अन्दर एक पूर्णतः परिवर्ती पिस्टन P लगा है। माना इसके अन्दर एक विकिरण भरा है जिसका ताप T है तथा ऊर्जा घनत्व u है। जैसे के चित्र में दिखाया गया है।

इसे भी पढे़… विकिरण संबंधी किरचॉफ का नियम क्या है? (kirchhoff’s Radiation Law in Hindi)

स्टीफन का नियम
स्टीफन का नियम

मान यदि सिलिण्डर का आयतन ‘V’ हो, तो विकिरण की कुल आन्तरिक ऊर्जा U = uV ….(1)
माना इसे dQ ऊष्मा बाहर से दी जाती है, जिससे पिस्टन परिवर्तित होकर इसके आयतन में dV का परिवर्तन कर देता है जिससे इसके अन्दर भरे विकिरण के ताप में मामूली-सा अन्तर आ जाता है। यदि इस दौरान आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन dU हुआ हो तथा बाह्य कार्य dW हुआ हो, तो ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से,
dQ = dU + dW
परन्तु U = uV तथा dW = PdV
जहां P विकिरण दाब है, जिसका मान P = \frac{1}{3} होता है। अतः
dQ = d(uV) + \frac{1}{3} udV
या dQ = udV + Vdu + \frac{1}{3} udV
अथवा
dQ = Vdu + \frac{4}{3} udV ….(2)

यदि एण्ट्राॅपी में परिवर्तन ‘dS’ हो, तो ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम से,
dS = \frac{dQ}{T} ….(3)
समीकरण (2) से dQ का मान समीकरण (3) में रखने पर,
dS = \frac{V}{T} du + \frac{4u}{3T} dV ….(4)
अतः इस सूत्र से ज्ञात होता है कि एण्ट्रॉपी S, ऊर्जा घनत्व u व आयतन V का फलन है। अर्थात्
S = f(u, V)
इसलिए
dS = ( \frac{∂S}{∂u} ) du + ( \frac{∂S}{∂V} ) dV …(5)
अब समीकरण (4) व (5) की तुलना करने पर,
\frac{∂S}{∂V} = \frac{4u}{3T}
तथा \frac{∂S}{∂u} = \frac{V}{T} …(6)
चूंकि dS पूर्ण अवकलन है, अतः
\frac{∂^2S}{∂u∂V} = \frac{∂^2S}{∂V∂u}
अर्थात्
\frac{∂}{∂u} ( \frac{∂S}{∂V} ) = \frac{∂}{∂V} ( \frac{∂S}{∂u} ) …(7)

अतः समीकरण (6) से ( \frac{∂S}{∂V} ) तथा ( \frac{∂S}{∂u} ) के मान समीकरण (7) में रखने पर,
\frac{∂}{∂u} ( \frac{4u}{3T} ) = \frac{∂}{∂V} ( \frac{V}{T} )
चूंकि T केवल u का फलन है। अतः
\frac{4}{3} . \frac{1}{T} \frac{4}{3} . \frac{u}{T^2} . \frac{∂T}{∂u} = \frac{1}{T}
या \frac{4}{3T} \frac{1}{T} = \frac{4u}{3T^2} \frac{∂T}{∂u}
या \frac{1}{3T} = \frac{4u}{3T^2} \frac{∂T}{∂u}
या \frac{∂u}{u} = 4 \frac{∂T}{T}

पढ़े… किरचॉफ का पहला और दूसरा नियम क्या है? (Kirchhoff’s Laws in Hindi)

समाकलन करने पर,
log u = 4 log T + log a
{चूंकि log a समाकलन नियतांक है।} अतः
u = aT4 ….(8)
परन्तु एकांक क्षेत्रफल से कुल विकिरण ऊर्जा के उत्सर्जन की दर, ऊर्जा घनत्व से निम्न प्रकार सम्बन्धित होती है। अतः
E = \frac{1}{4} uc
या E = \frac{1}{4} uacT4
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ E = σT^4 } …(9)

“यही ‘स्टीफन का नियम’ है, यहां σ = \frac{1}{4} uac एक नियतांक है, जिसे ‘स्टीफन नियतांक’ कहते हैं।”

अर्थात् यदि एक कृष्णिका (जिसका ताप T1K है) एक काले कोष्ठ में रखी गई है जिसका ताप T2K है, तो कृष्णिका σT41 ऊष्मा प्रति सेकण्ड विकरित करेगी। तथा σT42 ऊष्मा प्रति सेकण्ड अवशोषित करेगी। अतः कृष्णिका द्वारा प्रति सेकण्ड विकरित ऊष्मा का कुल मान
\footnotesize \boxed{ E = σ(T^4_1 - T^4_2) } …(10)

“यही स्टीफन-बोल्ट्जमैन का नियम है।”

Note – स्टीफन नियम से संबंधित प्रशन परिक्षाओं में पूछें जाते हैं, जो इस प्रकार है।
Q. 1 कृष्णिका विकिरण के लिए स्टीफन का नियम क्या है ? इसका ऊष्मागतिकी नियम से निगमन कीजिए ।
Q. 2 स्टीफन-बोल्ट्जमैन नियम को लिखिए ? तथा इसे ऊष्मागतिक रूप से व्युत्पन्न कीजिए ‌।
Q. 3 विकिरण संबंधी स्टीफन का नियम लिखिए ?

  1. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  2. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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