तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धांत क्या है, विस्पंद क्या है | superposition principal in Hindi

तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धांत

किसी माध्यम में दो या दो से अधिक प्रगामी तरंगें एक साथ परन्तु एक-दूसरे की गति को बिना प्रभावित किए चल सकती है। अतः माध्यम के प्रत्येक कण का किसी क्षण परिणामी विस्थापन दोनों तरंगों द्वारा अलग-अलग उत्पन्न विस्थापन के सदिश योग के बराबर होता है। इस सिद्धांत को ‘अध्यारोपण का सिद्धांत’ कहते हैं। अर्थात्
y = y1 + y2 + y3 + …

ध्वनि तरंगों में विस्पन्द

जब लगभग बराबर आवृत्ति वाली दो ध्वनि तरंगें एक साथ उत्पन्न की जाती हैं, तो माध्यम में उनके अध्यारोपण से प्राप्त ध्वनि की तीव्रता बारी-बारी से घटती और बढ़ती रहती है। ध्वनि की तीव्रता में होने वाले इस चढ़ाव व उतराव को ‘विस्पन्द’ कहते हैं। ध्वनि की तीव्रता में होने वाले एक चढ़ाव तथा एक उतराव को मिलाकर ‘एक विस्पन्द’ कहते हैं। अतः एक सेकंड में ध्वनि की तीव्रता में होने वाले चढ़ाव व उतराव की संख्या को ‘विस्पन्द आवृत्ति’ कहते हैं।

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विस्पन्द आवृत्ति का समीकरण

माना दो ध्वनि स्त्रोतों की आवृत्तियां n1 व n2 है तथा प्रत्येक ध्वनि का आयाम a है तथा दोनों तरंगें एक ही दिशा में जा रही हैं। तब इन तरंगों द्वारा माध्यम के कण का विस्थापन y1 व y2 है तो सरल आवर्त गति के समीकरण से,
y1 = a sinω1t = a sin2πn1t
y2 = a sinω2t = a sin2πn2t
अध्यारोपण के सिद्धांत से, कण का परिणामी विस्थापन
y = y1 + y2 = a[sin2πn1t + sin2πn2t]
y = 2asin2π \frac{(n_1 + n_2)t}{2} cos2π \frac{(n_1 - n_2)t}{2}
y = 2a cosπ(n1 – n2)t sinπ(n1 + n2)t
{माना चूंकि 2a cosπ(n1 – n2)t = A} तब,
y = A sinπ(n1 + n2)t
अतः समीकरण से स्पष्ट है कि दोनों तरंगों के अध्यारोपण से कण एक सरल आवर्त गति करता हैं। तथा यहां आयाम a, समय t के मान पर निर्भर करता है।
चूंकि cosπ(n1 – n2)t का अधिकतम मान ±1 तथा न्यूनतम मान शून्य हो सकता है अतः आयाम A का अधिकतम मान ±2a तथा न्यूनतम मान शून्य होगा।

आयाम के अधिकतम मान के लिए

cosπ(n1 – n2)t = ±1
यह तभी संभव है जब π पूर्ण गणित हो, अर्थात्
π(n1 – n2)t = kπ
अथवा
t = \frac{k}{n_1 - n_2}
यदि k = 0, 1, 2, 3… रखने पर,
t = 0, \frac{1}{n_1 - n_2} , \frac{2}{n_1 - n_2} , \frac{3}{n_1 - n_2} … …(1)
अतः इन क्षणों पर आयाम का मान अधिकतम होगा जिसके फलस्वरूप ध्वनि की तीव्रता (I = kA2) भी अधिकतम होगी।

आयाम के न्यूनतम मान के लिए

cosπ(n1 – n2)t = 0
यह तभी संभव है जब π/2 विषय गणित हो, अर्थात्
π(n1 – n2)t = \frac{kπ}{2}
अथवा
t = \frac{k}{2(n_1 - n_2)}
यदि k = 1, 3, 5… रखने पर,
t = \frac{1}{2(n_1 - n_2)} , \frac{3}{2(n_1 - n_2)} , \frac{5}{2(n_1 - n_2)} … …(2)

अतः इन क्षणों पर आयाम न्यूनतम होगा जिसके फलस्वरूप ध्वनि की तीव्रता भी न्यूनतम होगी।
अर्थात् उपर्युक्त समीकरणों (1) व (2) से स्पष्ट है कि अधिकतम तीव्रता के ठीक बीच-बीच में न्यूनतम तीव्रताएं आती है।
अतः विस्पन्दों की एक सेकंड संख्या (आवृत्ति) = n1 – n2 = ध्वनि-स्त्रोतों की आवृत्तियों का अन्तर,
इससे स्पष्ट है कि ध्वनि की तीव्रता में 1 सेकंड में (n1 – n2) चढ़ाव तथा (n1 – n2) उतराव आते हैं। अर्थात 1 सेकंड में (n1 – n2) विस्पन्द सुनाई देंगे।

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विस्पन्दों के व्यवहारिक उपयोग

आवृत्ति ज्ञात करना – यदि किसी स्वरित्र की आवृत्ति n1 ज्ञात हो तो हम किसी दूसरे स्वरित्र की आवृत्ति जो लगभग n1 के बराबर है विस्पन्दों की सहायता से ज्ञात कर सकते हैं।
बाजों को समस्वरण करना – बाजे वाले अपने बाजों को समस्वरण करने के लिए विस्पन्दों का उपयोग करते हैं। तथा दो बाजों को एक के बाद एक बजाते हैं एक की आवृत्ति को इस प्रकार समायोजित करते हैं कि इसकी ध्यान उसके कानों को दूसरे बाजे की ध्वनि के समान प्रतीत होने लगे।
खानों में खतरनाक गैसों का पता लगाने में – इसके लिए समान प्रकार के दो छोटे पाइप लेकर एक पाइप में शुद्ध वायु तथा दूसरे पाइप में खान की वायु प्रवाहित करते हैं। यदि खान की वायु शुद्ध है तो दोनों पाइप समस्वरित होते हैं। अतः विस्पन्द सुनाई नहीं देते हैं।

Note – सम्बन्धित प्रशन
Q.1 तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धांत क्या है? तथा सिद्ध कीजिए कि प्रति सेकंड उत्पन्न विस्पन्दों की संख्या दो ध्वनि स्त्रोतों की आवृत्तियों के अन्तर के बराबर होती है।
Q.2 विस्पन्द किसे कहते हैं? लगभग समान आवृत्ति वाले दो स्रोतों द्वारा उत्पन्न विस्पन्दों की आवृत्ति के लिए व्यंजक स्थापित कीजिए।

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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