अध्यारोपण प्रमेय क्या है, इसे सिद्ध कीजिए | superposition theorem in Hindi

अध्यारोपण प्रमेय

जब रेखीए प्रतिबाधा नेटवर्क में दो या दो से अधिक विद्युत वाहक बल स्त्रोत सक्रिय होते हैं तो नेटवर्क के किसी एक बिन्दु पर बहने वाली धारा का मान अध्यारोपण प्रमेय की सहायता से ज्ञात किया जाता है। अर्थात्
इस प्रमेय के अनुसार, “दो या दो से अधिक स्त्रोतों वाले रेखीय नेटवर्क के किसी बिन्दु पर बहने वाली धारा का मान उन सभी धाराओं के योग के बराबर होता है जो अलग-अलग स्त्रोत को सक्रिय मानकर और शेष सभी स्त्रोतों को उस समय उनकी आन्तरिक प्रतिबाधाओं से प्रतिस्थापित करके प्राप्त की जाती है।”

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अध्यारोपण प्रमेय की उत्पत्ति

उदाहरण के लिए, अध्यारोपण की प्रमेय को समझने के लिए हमें निम्न नेटवर्कों पर विचार करेंगे –
जैसा कि चित्र-1 में दिखाया गया है कि एक नेटवर्क जिसमें विद्युत वाहक बल के दो स्त्रोत E1 व E2 हैं जिनकी आन्तरिक प्रतिबाधाएं क्रमशः Z1 व Z2 हैं।

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अध्यारोपण प्रमेय

माना हमें प्रतिबाधा Z से होकर जाने वाली धारा i का मान ज्ञात करना है। इसे अध्यारोपण प्रमेय के नियमानुसार प्राप्त कर सकते हैं।

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(1).सर्वप्रथम E2 को अनुपस्थित मान लेते हैं परन्तु इसकी प्रतिबाधा Z2 को परिपथ में शामिल करते हैं जैसा कि चित्र-2 में दिखाया गया है।

अध्यारोपण प्रमेय

अब माना केवल स्त्रोत E1 के कारण धारा i का मान ज्ञात कर लेते हैं। इसके लिए माना कि E1 से आने वाली धारा i है। अतः KCL (किरचाॅफ के नियम) से Z2 में जाने वाली धारा (i – i1) होगी।
अब mesh ‘1’ व ‘2’ में KVL (किरचाॅफ का वोल्टे्ज नियम) लगाने पर,
iZ1 + i1Z = E1 …(1)
तथा (i – i1)Z2 – i1Z = 0 …(2)
तब समीकरण (1) को Z2 से तथा समीकरण (2) को Z1 से गुणा करने पर,
iZ1Z2 + i1ZZ2 = E1Z2 …(3)
तथा iZ1Z2 – i1Z1Z2 – i1ZZ1 = 0 …(4)
अर्थात् समीकरण (3) में से समीकरण (4) को घटाने पर,
i1(ZZ2 + Z1Z2 + ZZ1) = E1Z2
अथवा
i1 = \frac{E_1Z_2}{ZZ_1 + ZZ_2 + Z_1Z_2} …(5)

(2).अब E1 को अनुपस्थित मानते हैं। परन्तु इसकी प्रतिबाधा Z1 को परिपथ में शामिल करते हैं। जैसा कि चित्र-3 में दिखाया गया है।

अध्यारोपण प्रमेय

माना चित्र में केवल स्त्रोत E2 के कारण धारा i2 की गणना कर लेते हैं। इसके लिए माना कि स्त्रोत E2 से आने वाली धारा i है। अब KCL (किरचॉफ के धारा नियम) से Z1 में जाने वाली धारा (i – i2) होगी।
अब mesh ‘1’ व ‘2’ के लिए KVL (किरचाॅफ का वोल्टे्ज नियम) लगाने पर,
iZ2 + i2Z = E2 …(6)
तथा (i – i2)Z1 – i2Z = 0 …(7)
तब समीकरण (6) को Z1 से तथा समीकरण (7) को Z2 से गुणा करने पर,
iZ1Z2 + i2ZZ1 = E2Z2 …(8)
तथा iZ1Z2 – i2Z1Z2 – i2ZZ2 = 0 …(9)
अर्थात् समीकरण (8) में से समीकरण (9) को घटाने पर,
i2(ZZ1 + Z1Z2 + ZZ2) = E2Z1
अथवा
i2 = \frac{E_2Z_1}{ZZ_1 + ZZ_2 + Z_1Z_2} …(10)

(3).अन्त में धाराओं i1 व i2 का बीजगणितीय योग करते हैं। धारा (i1 + i2) प्रतिबाधा ‘Z’ से होकर बहने वाली वह धारा है जो विद्युत वाहक बल के दोनों स्त्रोतों के कार्यरत रहने पर प्राप्त होती है।
इस प्रकार, समीकरण (5) व (10) को जोड़ने पर (यह ध्यान रखते हुए कि धारा i2, धारा i1 के विपरीत दिष्ट है) अतः प्रतिबाधा Z में बहने वाली धारा,
i = i1 + i2
तब i = \frac{E_1Z_2}{ZZ_1 + ZZ_2 + Z_1Z_2} + \frac{E_2Z_1}{ZZ_1 + ZZ_2 + Z_1Z_2}
अर्थात्
i = \frac{E_1Z_2 + E_2Z_1}{ZZ_1 + ZZ_2 + Z_1Z_2}
“यही प्रतिबाधा ‘Z’ में बहने वाली धारा है।”

Note – अध्यारोपण प्रमेय संबंधित प्रशन –
Q.1 अध्यारोपण प्रमेय लिखिए तथा इसे सिद्ध कीजिए?
Q.2 विद्युतीय नेटवर्क की अध्यारोपण प्रमेय को उदाहरण सहित समझाइए?
Q.3 अध्यारोपण की प्रमेय को समझाइए?

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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