ऊष्मागतिकी फलन क्या है, परिभाषा व प्रकारों को समझाइए | thermodynamic functions in Hindi

ऊष्मागतिकी फलन क्या है

किसी ऊष्मागतिकी निकाय की स्थिति को प्रदर्शित करने के लिए कुछ ऊष्मागतिकी निर्देशांकों को चर राशियों जैसे – ताप (T), आयतन (V), दाब (P) तथा एण्ट्रॉपी (S) की आवश्यकता होती है। इन चर राशियों के पदों में कुछ फलनों को परिभाषित किया जाता है, जिन्हें “ऊष्मागतिकी फलन” कहा जाता है ।
ऊष्मागतिकी फलन चार प्रकार के होते हैं। जो कि इस प्रकार प्रदर्शित है।

  • आन्तरिक ऊर्जा (internal energy)
  • हैल्महोल्ट्ज फलन या हैल्महोल्ट्ज मुक्त ऊर्जा (helmholtz function or helmholtz free energy)
  • एन्थैल्पी (enthalpy)
  • गिब्स फलन या गिब्स मुक्त ऊर्जा (Gibbs function or Gibbs free energy)

ऊष्मागतिकी विभव क्या है

जब किसी ऊष्मागतिकी निकाय की वैधुत स्थैतिकी में विद्युत विभव के अवकलन के द्वारा विद्युत क्षेत्र की तीव्रता की गणना की जाती है। यदि \overrightarrow{E} = – gradV इसी प्रकार ऊष्मागतिकी में, ऊष्मागतिकी फलनों के अवकलन से ऊष्मागतिकी निर्देशांक ज्ञात किए जा सकते हैं। इसलिए ऊष्मागतिकी फलनों को “ऊष्मागतिकी विभव” भी कहते हैं।

ऊष्मागतिकी फलनों के प्रमुख चार फलन निम्न प्रकार हैं।

1.आन्तरिक ऊर्जा (U)

किसी ऊष्मागतिकी निकाय की आन्तरिक ऊर्जा उस निकाय के आण्विक संघटन तथा अणुओं की गति के कारण होती है। तथा ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से यह स्पष्ट है कि निकाय की आन्तरिक ऊर्जा एक अद्वितीय फलन है जो निम्न प्रकार परिभाषित है। अतः इसी कारण ऊर्जा उसकी आन्तरिक ऊर्जा (U) कहलाती है।
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से,
dQ = dU + dW
या dU = dQ – dW
तथा ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम से,
dU = TdS – PdV ….(1)
{चूंकि dQ = TdS, dW = PdV}
अतः यदि प्रक्रम रुद्धोष्म हो, तो dS = 0 समीकरण (1) में रखने पर,
dU = – PdV या dU = – dW
अर्थात् रुद्धोष्म प्रक्रम के अन्तर्गत किसी निकाय की आन्तरिक ऊर्जा में वृद्धि, उस निकाय पर किए गए कार्य के बराबर होती है।

2.हैल्महोल्ट्ज फलन (F)

यह मुक्त ऊर्जा या कार्य फलन है जिसे निम्न प्रकार परिभाषित किया जाता है। अर्थात् ‘उत्क्रमणीय परिवर्तनों के लिए निकाय द्वारा किया गया कार्य इस फलन F में परिवर्तन के बराबर होता है।’ अतः
ऊष्मागतिकी के प्रथम तथा द्वितीय नियम से,
dU = TdS – dW
यदि प्रक्रम को इस प्रकार चुना जाए कि निकाय के परिवेश को ऊष्मा का स्थानान्तरण इस प्रकार हो, कि निकाय का ताप स्थिर बना रहे, तब
dU = d(TS) – dW (यदि T = नियतांक)
d(U – TS) = – dW
अथवा
dF = – dW ….(2)
अर्थात्
F = U – TS = θ (हैल्महोलट्ज फलन है।)
dF = dU – d(TS)
या dF = (TdS – PdV) – (TdS – SdT)
{चूंकि dU = TdS – PdV}
अर्थात्
dF = – PdV – SdT
अतः यहां F = U – TS को हैल्महोल्ट्ज फलन कहा जाता है। अतः एक उत्क्रमणीय प्रक्रम के लिए निकाय द्वारा किया गया कार्य हैल्महोल्ट्ज फलन में कमी के तुल्य होता है। इसे “हैल्महोल्ट्ज मुक्त ऊर्जा” भी कहा जाता है।

इसे भी पढे़…ऊष्मागतिकी का तृतीय नियम

3.एन्थैल्पी (enthalpy in Hindi) (H)

एन्थैल्पी एक अद्वितीय फलन है। तथा इसका मान निकाय के द्रव्यमान पर निर्भर करता है और यह निकाय की कुल ऊर्जा को निरूपित करता है। इसे निम्न प्रकार परिभाषित किया जाता है।
H = U + PV ….(3)
तब अत्यंत सूक्ष्म उत्क्रमणीय परिवर्तन के लिए,
dH = d(U + PV)
या dH = dU + d(PV)
dH = TdS – PdV + PdV + VdP
dH = TdS + VdP
समदाबी प्रक्रम के लिए dP = 0 अतः
dH = TdS = dQ (यदि P = नियतांक है) …(4)
अर्थात् समदाबी प्रक्रम के अन्तर्गत निकाय द्वारा ग्रहण की गई ऊष्मा निकाय की एंथैल्पी में वृद्धि के तुल्य होती हैं।

4.गिब्स फलन या गिब्स मुक्त ऊर्जा (G)

यदि समतापी प्रक्रम तथा समदाबी प्रक्रम के द्वारा किसी ऊष्मागतिकी निकाय में परिवर्तन किया जाता है, तो निकाय का गिब्स फलन सदैव नियत रहता है। तथा गिब्स फलन को निम्न प्रकार परिभाषित किया जाता है।
G = U + PV – TS
या G = H – TS = F + PV
एंथैल्पी निकाय की अवस्था को नष्ट करने के लिए एक अद्वितीय फलन है।
dG = dU + d(PV) – d(TS)
या dG = dU + PdV + VdP – TdS – SdT
dG = TdS – PdV + PdV + VdP – TdS – SdT
या dG = VdP – SdT
अतः समतापी एवं समदाबी प्रक्रम के लिए dP = 0 तथा dT = 0 अथवा dG = 0
अर्थात्
G = स्थिरांक
अतः उत्क्रमणीय समतापी एवं समदाबी प्रक्रम में निकाय की गिब्स मुक्त ऊर्जा नियत रहती है।

Note – ऊष्मागतिकी फलन से सम्बन्धित प्रशन पूछें जाते हैं।
Q. 1 ऊष्मागतिकी फलन क्या है ? इसकी परिभाषा दीजिए ?
Q. 2 ऊष्मागतिकी फलन से आप क्या समझते हैं ? इन्हें ऊष्मागतिकी विभव क्यों कहते हैं ? समझाइए ‌।
Q. 3 ऊष्मागतिकी विभव को परिभाषित कीजिए ? तथा इनसे मैक्सवेल के ऊष्मागतिकी संबंध प्राप्त कीजिए ?
Q. 4 ऊष्मागतिकी फलन से क्या तात्पर्य है ? इसके कितने प्रकार होते हैं ? सभी को सिद्ध कीजिए ?

  1. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  2. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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